हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले से सामने आए एक गंभीर मामले में राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए सरकारी स्कूल के एक शिक्षक को निलंबित कर दिया है। सातवीं कक्षा की छात्रा के साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोप में गिरफ्तार किए गए टीजीटी हिंदी शिक्षक समीर कौशिक पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देश के बाद त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई की गई। शिक्षक के खिलाफ पोक्सो एक्ट सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज है।

यह मामला कुरुक्षेत्र के कनीपला स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय से जुड़ा है। पीड़ित छात्रा के परिजनों ने आरोप लगाया था कि स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षक ने उनकी नाबालिग बेटी के साथ अनुचित व्यवहार किया। परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने 19 दिसंबर को आरोपी शिक्षक के खिलाफ पोक्सो एक्ट और एससी/एसटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। जांच के दौरान पुलिस ने शिक्षक को गिरफ्तार भी कर लिया था।
हालांकि, गिरफ्तारी के बावजूद शिक्षक के निलंबन को लेकर कोई तत्काल विभागीय आदेश जारी नहीं हुआ था, जिससे परिजनों और स्थानीय लोगों में नाराजगी बनी हुई थी। इसी बीच पीड़ित परिवार ने मुख्यमंत्री के जनसंवाद कार्यक्रम के दौरान अपनी शिकायत सीधे रखी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया और मौके पर ही पंचकूला स्थित उच्च अधिकारियों से फोन पर बात कर आरोपी शिक्षक को तत्काल निलंबित करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री के आदेश के कुछ ही समय बाद मौलिक शिक्षा विभाग के महानिदेशक की ओर से शिक्षक समीर कौशिक को निलंबित करने का औपचारिक आदेश जारी कर दिया गया। निलंबन आदेश में स्पष्ट किया गया है कि निलंबन अवधि के दौरान शिक्षक का मुख्यालय जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय, कुरुक्षेत्र रहेगा। बिना पूर्व अनुमति के वह मुख्यालय नहीं छोड़ सकेगा। नियमों के अनुसार, इस अवधि में उसे निर्धारित भत्ते दिए जाएंगे।
पीड़ित छात्रा के परिजनों का कहना है कि उनकी बेटी कनीपला के सरकारी स्कूल में सातवीं कक्षा की छात्रा है और शिक्षक द्वारा किए गए व्यवहार से वह मानसिक रूप से आहत हुई है। परिजनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी। उनका कहना है कि स्कूल जैसे सुरक्षित माने जाने वाले स्थान पर इस तरह की घटनाएं बच्चों और अभिभावकों दोनों के लिए चिंता का विषय हैं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले की जांच पोक्सो एक्ट के तहत की जा रही है, जो नाबालिगों से जुड़े अपराधों में बेहद सख्त कानून माना जाता है। इसके तहत दोष सिद्ध होने पर आरोपी को कड़ी सजा का प्रावधान है। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान सभी तथ्यों और सबूतों को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की जा रही है।
इस मामले के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में भी हलचल तेज हो गई है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस तरह के मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो आरोपी शिक्षक के खिलाफ आगे और भी कठोर विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के हस्तक्षेप के बाद हुई इस त्वरित कार्रवाई को लेकर लोगों ने सरकार की सराहना की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे यह संदेश जाता है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में सरकार संवेदनशील है और दोषियों को किसी भी स्तर पर संरक्षण नहीं दिया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सिर्फ कार्रवाई ही नहीं, बल्कि निगरानी व्यवस्था को भी और मजबूत करने की जरूरत है। शिक्षकों की नियमित काउंसलिंग, शिकायतों पर त्वरित सुनवाई और सख्त नियमों के पालन से ही ऐसे मामलों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।
फिलहाल आरोपी शिक्षक पुलिस हिरासत में है और न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। शिक्षा विभाग की ओर से साफ कर दिया गया है कि जांच पूरी होने तक आरोपी को किसी भी शैक्षणिक कार्य से दूर रखा जाएगा। इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर समाज, प्रशासन और शिक्षा व्यवस्था—तीनों को मिलकर और अधिक सतर्क होने की आवश्यकता है।
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