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मेरठ में चौक के नाम को लेकर बवाल, आंबेडकर चौक का बोर्ड लगते ही मचा हंगामा

मेरठ के लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र में स्थित गुर्जर चौक उस समय चर्चा का केंद्र बन गया, जब वहां अचानक एक नया बोर्ड लगा दिखाई दिया। इस बोर्ड पर चौक का नाम बदलकर “आंबेडकर चौक” लिखा गया था। जैसे ही स्थानीय लोगों की नजर इस पर पड़ी, इलाके में हलचल मच गई। देखते ही देखते वहां लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई और माहौल तनावपूर्ण हो गया।

जानकारी के अनुसार, एक युवक ने अपने स्तर पर गुर्जर चौक पर नया बोर्ड लगाकर उसका नाम आंबेडकर चौक घोषित करने की कोशिश की। यह कदम बिना किसी प्रशासनिक अनुमति के उठाया गया था। स्थानीय लोगों का कहना था कि चौक का नाम वर्षों से गुर्जर चौक के नाम से जाना जाता है और अचानक नाम बदलने का प्रयास उन्हें स्वीकार्य नहीं है। इसी बात को लेकर कुछ लोगों ने मौके पर विरोध जताना शुरू कर दिया।

विरोध की खबर तेजी से आसपास के इलाकों में फैल गई। कुछ ही समय में चौक पर काफी संख्या में लोग जमा हो गए। भीड़ में अलग-अलग विचार रखने वाले लोग मौजूद थे। कुछ लोग इसे डॉ. भीमराव आंबेडकर के सम्मान से जोड़कर देख रहे थे, तो कुछ लोग इसे बिना अनुमति नाम बदलने का प्रयास बता रहे थे। स्थिति धीरे-धीरे गरमाने लगी और माहौल में तनाव साफ महसूस किया जा सकता था।

सूचना मिलते ही लिसाड़ी गेट थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने पहले हालात का जायजा लिया और वहां मौजूद लोगों से बातचीत की। अधिकारियों ने भीड़ को समझाने का प्रयास किया कि बिना प्रशासनिक अनुमति के किसी सार्वजनिक स्थल का नाम बदला नहीं जा सकता। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी को चौक का नाम बदलने की मांग रखनी है तो इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन करना होगा।

पुलिस की मौजूदगी से स्थिति कुछ हद तक नियंत्रण में आई। अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की और कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। इसके बाद नए लगाए गए “आंबेडकर चौक” के बोर्ड को हटवा दिया गया। बोर्ड हटते ही वहां मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली, हालांकि कुछ लोग इस फैसले से असहमत भी दिखाई दिए।

घटना की जानकारी मिलने पर एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने भी पूरे मामले पर बयान दिया। उन्होंने बताया कि इस संबंध में अभी तक किसी भी पक्ष की ओर से कोई लिखित शिकायत या तहरीर नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को शांतिपूर्ण तरीके से संभाल लिया है। यदि कोई व्यक्ति इस मामले में तहरीर देता है, तो उसके आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

एसपी सिटी ने यह भी कहा कि किसी भी सार्वजनिक स्थल का नाम बदलने के लिए एक निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया होती है। संबंधित विभागों की अनुमति और शासन स्तर पर मंजूरी के बाद ही ऐसा कदम उठाया जा सकता है। बिना अनुमति किसी भी प्रकार का बोर्ड लगाना या नाम परिवर्तन करना कानून व्यवस्था की दृष्टि से उचित नहीं है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह चौक लंबे समय से गुर्जर चौक के नाम से जाना जाता रहा है और इसी नाम से इसकी पहचान बनी हुई है। अचानक नाम बदलने की कोशिश से लोगों की भावनाएं आहत हुईं। वहीं, कुछ लोगों का यह भी मानना है कि डॉ. भीमराव आंबेडकर देश के संविधान निर्माता और महान समाज सुधारक थे, इसलिए उनके नाम पर चौक या अन्य स्थानों का नामकरण करना सम्मान की बात है। हालांकि, उनका भी मानना था कि यह काम प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत ही होना चाहिए।

घटना के बाद इलाके में पुलिस की निगरानी कुछ समय तक बढ़ा दी गई, ताकि दोबारा किसी प्रकार का विवाद न हो। पुलिस अधिकारियों ने स्थानीय लोगों से अपील की कि वे किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें और शांति बनाए रखें। प्रशासन की ओर से यह भी कहा गया कि यदि कोई संगठन या व्यक्ति चौक का नाम बदलने की मांग करना चाहता है, तो वह संबंधित विभाग में औपचारिक आवेदन कर सकता है।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सार्वजनिक स्थलों के नाम को लेकर समाज में संवेदनशीलता कितनी गहरी है। नाम केवल पहचान नहीं होते, बल्कि उनसे लोगों की भावनाएं, इतिहास और सामाजिक जुड़ाव भी जुड़े होते हैं। ऐसे में बिना अनुमति या एकतरफा निर्णय से अक्सर विवाद की स्थिति बन जाती है।

फिलहाल पुलिस ने स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में बताया है और इलाके में शांति बनी हुई है। प्रशासन का कहना है कि यदि भविष्य में कोई शिकायत मिलती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि आगे से इस तरह के मामलों में पहले आपसी सहमति और प्रशासनिक अनुमति ली जाएगी, ताकि अनावश्यक तनाव की स्थिति न बने।

मेरठ के इस घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि छोटे से कदम से भी बड़ा विवाद खड़ा हो सकता है, खासकर तब जब मामला सार्वजनिक पहचान और भावनाओं से जुड़ा हो। पुलिस और प्रशासन की तत्परता से फिलहाल स्थिति संभल गई, लेकिन यह घटना लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।

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