भारत की बढ़ती समुद्री शक्ति और वैश्विक सहयोग की नीति का भव्य प्रदर्शन बुधवार को देखने को मिलेगा, जब द्रौपदी मुर्मू इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू के दौरान अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक बेड़े की सलामी लेंगी। यह समारोह आंध्र प्रदेश के समुद्री शहर विशाखापत्तनम में आयोजित किया जा रहा है, जो इस समय दुनिया की कई नौसेनाओं का केंद्र बना हुआ है।

भारतीय नौसेना द्वारा आयोजित इस बड़े आयोजन का उद्देश्य मित्र देशों की नौसेनाओं के साथ सामंजस्य बढ़ाना, समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना और सहयोग के नए आयाम स्थापित करना है। अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास ‘मिलन 2026’ के साथ आयोजित यह कार्यक्रम भारत की रणनीतिक भूमिका और समुद्री कूटनीति दोनों को मजबूती देता है।
राष्ट्रपति मुर्मू सुबह बंगाल की खाड़ी में समुद्र के बीच खड़े नौसैनिक बेड़े का निरीक्षण करेंगी। इस दौरान वे युद्धपोत पर सवार होकर भारतीय और विदेशी जहाजों की कतारों का जायजा लेंगी। इस भव्य समीक्षा में भारत सहित मित्र देशों के दर्जनों युद्धपोत और पनडुब्बियां शामिल होंगी, जो समुद्री सहयोग की नई तस्वीर पेश करेंगी।
समारोह का सबसे आकर्षक हिस्सा हवाई सलामी होगी, जिसमें 50 से अधिक लड़ाकू विमान और हेलिकॉप्टर आकाश में फ्लाई-पास्ट कर राष्ट्रपति को सम्मान देंगे। नौसेना के लड़ाकू विमानों के साथ स्वदेशी तकनीक से बने विमान भी उड़ान भरेंगे, जो आत्मनिर्भर भारत के रक्षा क्षेत्र में बढ़ते कदमों का संकेत है। इसके अलावा नौसेना के विशेष समुद्री कमांडो भी समुद्र के बीच अपनी युद्धक क्षमता और विशेष ऑपरेशन कौशल का प्रदर्शन करेंगे।
यह आयोजन केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन नहीं, बल्कि भारत की समुद्री कूटनीति का महत्वपूर्ण मंच भी माना जा रहा है। नरेंद्र मोदी के ‘सागर’ विजन के तहत भारत खुद को हिंद महासागर क्षेत्र में एक भरोसेमंद सुरक्षा साझेदार के रूप में स्थापित कर रहा है। इस नीति का उद्देश्य क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना, समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और विकासशील देशों के साथ सहयोग को मजबूत करना है।
इस कार्यक्रम में दुनिया के अनेक देशों की नौसेनाओं की भागीदारी भारत के बढ़ते अंतरराष्ट्रीय प्रभाव को दर्शाती है। कई देशों के प्रतिनिधि, युद्धपोत और सैन्य विशेषज्ञ यहां मौजूद रहेंगे, जिससे सामरिक साझेदारी और रक्षा सहयोग के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है। यह भी संकेत देता है कि भारत अब केवल क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि वैश्विक समुद्री व्यवस्था में अहम भूमिका निभाने की स्थिति में पहुंच रहा है।
भारत में फ्लीट रिव्यू की परंपरा नई नहीं है। इसकी शुरुआत 1953 में हुई थी, जब देश के प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने भारतीय नौसेना के जहाजों का निरीक्षण किया था। उस समय यह आयोजन सीमित स्तर पर था, लेकिन आज यह अंतरराष्ट्रीय स्तर का भव्य समारोह बन चुका है।
विशाखापत्तनम में इससे पहले भी नौसैनिक समीक्षा का आयोजन हो चुका है, लेकिन इस बार इसे विशेष माना जा रहा है क्योंकि यह एक बड़े अंतरराष्ट्रीय युद्धाभ्यास के साथ आयोजित किया जा रहा है। आने वाले दिनों में यहां नौसैनिक अभ्यास, समुद्री संगोष्ठियां और विभिन्न रणनीतिक चर्चाएं भी होंगी, जिनमें समुद्री सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा और सहयोगी अभियानों जैसे मुद्दों पर विचार होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजन भारत को न केवल सैन्य दृष्टि से मजबूत बनाते हैं, बल्कि कूटनीतिक रूप से भी नई पहचान देते हैं। इससे भारत का संदेश स्पष्ट होता है कि वह क्षेत्रीय शांति, समुद्री कानूनों के सम्मान और साझेदारी आधारित सुरक्षा व्यवस्था का समर्थक है।
कुल मिलाकर, यह समारोह भारत की समुद्री क्षमता, तकनीकी प्रगति और वैश्विक साझेदारी की झलक पेश करेगा। राष्ट्रपति की मौजूदगी इसे और भी प्रतिष्ठित बना रही है, जबकि मित्र देशों की भागीदारी इसे अंतरराष्ट्रीय महत्व का आयोजन बना देती है।
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