घर खरीदारों के साथ कथित धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में Enforcement Directorate (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी के गुरुग्राम जोनल कार्यालय ने हरियाणा के Sonipat जिले के कमासपुर क्षेत्र में स्थित करीब 206.40 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच के दौरान की गई है और इसे Prevention of Money Laundering Act, 2002 (पीएमएलए) के तहत अंजाम दिया गया है।

ईडी के अनुसार यह पूरा मामला रियल एस्टेट कंपनी TDI Infrastructure Limited से जुड़ा हुआ है, जिसे पहले इंटाइम प्रमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम से जाना जाता था। जांच में सामने आया है कि कंपनी और उससे जुड़ी सहयोगी कंपनियों के नाम पर सोनीपत के कमासपुर इलाके में बड़ी मात्रा में जमीन और व्यावसायिक संपत्तियां मौजूद हैं।
जांच एजेंसी ने जिन संपत्तियों को कुर्क किया है, उनमें कमासपुर में स्थित लगभग 8.3 एकड़ जमीन के कई हिस्से और कई कमर्शियल यूनिट्स शामिल हैं। इन संपत्तियों की कुल अनुमानित कीमत करीब 206.40 करोड़ रुपये बताई जा रही है। ईडी ने इन सभी संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच कर लिया है ताकि जांच पूरी होने तक इन्हें बेचा या ट्रांसफर न किया जा सके।
ईडी की जांच की शुरुआत उन मामलों के आधार पर की गई, जो पहले से ही कानून प्रवर्तन एजेंसियों के पास दर्ज थे। जानकारी के मुताबिक दिल्ली पुलिस और आर्थिक अपराध शाखा द्वारा इस मामले में कुल 26 एफआईआर दर्ज की गई थीं। इन मामलों में कंपनी और उससे जुड़े लोगों पर घर खरीदारों से धोखाधड़ी करने के आरोप लगाए गए थे। इन एफआईआर और चार्जशीट के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की।
जांच एजेंसी के मुताबिक आरोप है कि कंपनी, उसके प्रमोटर्स और प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों ने बड़ी संख्या में लोगों से फ्लैट और प्लॉट देने के नाम पर पैसा लिया, लेकिन निर्धारित समय के भीतर परियोजनाओं को पूरा नहीं किया। कई मामलों में खरीदारों को वर्षों तक इंतजार करना पड़ा और उन्हें उनका घर नहीं मिला।
ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि कुछ प्रोजेक्ट्स में 16 से 18 साल तक की देरी हुई है। इतने लंबे समय तक परियोजनाओं का अधूरा रहना हजारों घर खरीदारों के लिए परेशानी का कारण बना। कई लोगों ने अपनी जीवनभर की जमा पूंजी इन प्रोजेक्ट्स में निवेश की थी।
जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि कंपनी ने सोनीपत क्षेत्र में कुल 23 आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाएं शुरू की थीं। इन परियोजनाओं को वर्ष 2005 से 2014 के बीच अलग-अलग समय पर लॉन्च किया गया था। इन योजनाओं का बड़े स्तर पर प्रचार किया गया और लोगों को आकर्षक ऑफर्स देकर निवेश के लिए प्रेरित किया गया।
ईडी के अनुसार इन सभी परियोजनाओं में कुल 14,105 घर खरीदारों ने फ्लैट और प्लॉट बुक किए थे। बुकिंग के दौरान कंपनी ने इन ग्राहकों से अग्रिम भुगतान के रूप में बड़ी रकम ली। जांच में सामने आया कि कंपनी ने इन खरीदारों से कुल मिलाकर करीब 4619.43 करोड़ रुपये एकत्र किए थे।
हालांकि आरोप है कि इस राशि का उपयोग परियोजनाओं के निर्माण कार्य को पूरा करने में पूरी तरह नहीं किया गया। जांच एजेंसी का कहना है कि कंपनी के प्रमोटर्स और प्रबंधन ने इस धनराशि का बड़ा हिस्सा अन्य सहयोगी कंपनियों और जमीन खरीदने वाली इकाइयों में ट्रांसफर कर दिया।
ईडी के मुताबिक इन पैसों का उपयोग अन्य निवेशों में किया गया और कुछ हिस्से से कंपनी के पुराने कर्ज भी चुकाए गए। इससे परियोजनाओं के निर्माण कार्य पर असर पड़ा और हजारों खरीदारों को अपने घर के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा।
जांच एजेंसी ने बताया कि इस मामले में यह पहली कार्रवाई नहीं है। इससे पहले भी जांच के दौरान करीब 45.48 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों को अटैच किया जा चुका है। अब ताजा कार्रवाई के बाद इस पूरे मामले में कुर्क की गई संपत्तियों की कुल कीमत बढ़कर करीब 251.88 करोड़ रुपये हो गई है।
ईडी के अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में आगे भी जांच जारी रहेगी। यदि जांच के दौरान और संपत्तियों या अवैध लेन-देन का पता चलता है तो एजेंसी आगे भी कार्रवाई कर सकती है।
इस मामले में बड़ी संख्या में घर खरीदार प्रभावित बताए जा रहे हैं। कई लोगों ने वर्षों पहले फ्लैट और प्लॉट बुक किए थे, लेकिन आज तक उन्हें उनका मकान नहीं मिल पाया। ऐसे में जांच एजेंसियों की कार्रवाई से प्रभावित लोगों को कुछ उम्मीद जरूर जगी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रियल एस्टेट क्षेत्र में इस तरह की जांच और सख्त कार्रवाई से पारदर्शिता बढ़ सकती है और भविष्य में निवेशकों का भरोसा मजबूत हो सकता है। वहीं जिन लोगों ने इन परियोजनाओं में पैसा लगाया था, वे अब उम्मीद कर रहे हैं कि जांच पूरी होने के बाद उन्हें किसी न किसी रूप में न्याय मिल सकेगा।
फिलहाल ईडी इस पूरे मामले में पैसों के प्रवाह, कंपनियों के नेटवर्क और संपत्तियों की खरीद-फरोख्त से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच कर रही है। आने वाले समय में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना भी जताई जा रही है।
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