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SBI लॉकर विवाद में बैंक मैनेजर सहित चार गिरफ्तार, 8 महीने बाद पुलिस ने खोला मामला

हरियाणा के Faridabad में भारतीय स्टेट बैंक की सेक्टर-15 स्थित शाखा में लॉकर से जुड़े एक बड़े विवाद का खुलासा हुआ है। करीब आठ महीने तक चली जांच के बाद पुलिस ने इस मामले में बैंक के तत्कालीन मैनेजर समेत चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान कई ऐसे दस्तावेज सामने आए हैं जो आरोपियों की भूमिका की ओर इशारा करते हैं।

यह मामला सेक्टर-15 स्थित State Bank of India की शाखा का है, जहां एक ग्राहक के लॉकर से जुड़े रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ी सामने आई थी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की और कई महीनों की पड़ताल के बाद चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस ने जिन लोगों को गिरफ्तार किया है उनमें उस समय की बैंक मैनेजर प्रीति कटारिया, एके सिंह, भावना नरवाल और बैंक से जुड़े वेंडर नीरज शर्मा शामिल हैं। बताया जा रहा है कि आरोपी वेंडर नीरज शर्मा ने पहले अदालत में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी, लेकिन अदालत ने उसकी याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद पुलिस ने उसे भी हिरासत में लेकर पूछताछ की और बाद में गिरफ्तार कर लिया।

मामले की शुरुआत तब हुई जब सेक्टर-15ए निवासी चार्टर्ड अकाउंटेंट डीसी गर्ग ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। उन्होंने बताया कि उनका वर्ष 2014 से बैंक की इस शाखा में एक लॉकर है। इसके साथ ही उनका बैंक में खाता भी है, जिससे हर साल लॉकर का शुल्क स्वतः कटता रहता है।

डीसी गर्ग ने अपनी शिकायत में बताया कि उनके पास लॉकर की चाबी भी मौजूद है और उन्होंने अपने लॉकर में काफी कीमती सामान रखा हुआ था। उनके अनुसार लॉकर में लगभग एक किलोग्राम सोने के आभूषण और करीब तीन किलोग्राम चांदी के गहने रखे हुए थे। यह सामान परिवार की कई वर्षों की बचत और पारिवारिक गहनों का हिस्सा था।

उन्होंने बताया कि लगभग आठ महीने पहले उन्होंने आखिरी बार अपना लॉकर खोला था और उस समय सब कुछ ठीक था। लेकिन कुछ समय बाद जब उनकी पत्नी नीलम बैंक में लॉकर खोलने के लिए पहुंचीं तो उन्हें एक चौंकाने वाली जानकारी मिली।

नीलम जब बैंक कर्मचारियों के पास लॉकर खोलने की प्रक्रिया के लिए गईं तो उन्हें बताया गया कि उनके नाम का लॉकर वहां मौजूद नहीं है। यह सुनकर वह हैरान रह गईं। इसके बाद उन्होंने कर्मचारियों को लॉकर नंबर बताया, लेकिन कर्मचारियों ने कहा कि वह लॉकर अब किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर दर्ज है।

यह सुनकर परिवार के लोग पूरी तरह चौंक गए। उन्होंने बैंक अधिकारियों से इस बारे में विस्तार से जानकारी मांगी, लेकिन उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। जब डीसी गर्ग ने बैंक से यह पूछा कि उनके लॉकर का रिकॉर्ड कैसे बदला गया और इसमें रखे सामान का क्या हुआ, तो बैंक की ओर से उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।

उन्होंने यह भी पूछा कि अगर बैंक ने लॉकर को तोड़ा या उसमें कोई बदलाव किया था तो इसके लिए कौन-सी आधिकारिक प्रक्रिया अपनाई गई। सामान्य नियमों के अनुसार यदि किसी लॉकर को खोला या बदला जाता है तो ग्राहक को पहले सूचना दी जाती है और पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड रखा जाता है। लेकिन इस मामले में ऐसा कोई स्पष्ट रिकॉर्ड सामने नहीं आया।

बार-बार सवाल पूछने के बावजूद जब उन्हें कोई ठोस जवाब नहीं मिला तो डीसी गर्ग ने पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने बैंक के रिकॉर्ड, दस्तावेजों और कर्मचारियों से जुड़ी जानकारी की जांच शुरू कर दी।

जांच के दौरान पुलिस ने बैंक के कई दस्तावेज खंगाले और संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ की। धीरे-धीरे जांच में कुछ ऐसे तथ्य सामने आए जिनसे बैंक के कुछ अधिकारियों और संबंधित लोगों की भूमिका संदिग्ध नजर आने लगी।

करीब आठ महीने तक चली जांच के बाद पुलिस ने चार लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ के दौरान मिले तथ्यों और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने चारों को गिरफ्तार कर लिया।

मामले की जानकारी देते हुए Mukesh Malhotra ने बताया कि जांच के दौरान बैंक से जुड़े कई दस्तावेज पुलिस को मिले हैं, जिनसे आरोपियों की भूमिका सामने आई है। उन्होंने बताया कि चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और उनसे आगे की पूछताछ की जा रही है।

पुलिस अब यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि लॉकर में रखा कीमती सामान कहां गया और क्या इस मामले में अन्य लोग भी शामिल हैं। इसके लिए बैंक के रिकॉर्ड और संबंधित लोगों से लगातार पूछताछ की जा रही है।

यह मामला सामने आने के बाद बैंक ग्राहकों के बीच भी चिंता का माहौल बन गया है, क्योंकि बैंक लॉकर को आमतौर पर सबसे सुरक्षित जगह माना जाता है। ऐसे में यदि लॉकर से जुड़े रिकॉर्ड में गड़बड़ी सामने आती है तो यह ग्राहकों के भरोसे पर भी सवाल खड़े करता है।

फिलहाल पुलिस मामले की जांच आगे बढ़ा रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे असल में क्या हुआ। आने वाले दिनों में पूछताछ और जांच के आधार पर इस मामले में और भी खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

पीड़ित परिवार को उम्मीद है कि जांच पूरी होने के बाद उन्हें न्याय मिलेगा और उनके लॉकर में रखे गए कीमती सामान के बारे में भी सच्चाई सामने आएगी।

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