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गैस सिलिंडर की सप्लाई रुकी तो मुरथल के ढाबों पर संकट, कई जगह रसोई बंद होने का खतरा

हरियाणा के Sonipat जिले में स्थित मशहूर Murthal के ढाबे अपने स्वादिष्ट पराठों और देसी खाने के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध हैं। हर दिन यहां सैकड़ों लोग खाना खाने के लिए पहुंचते हैं। लेकिन इन दिनों यहां के ढाबा संचालकों के सामने एक नई परेशानी खड़ी हो गई है। कॉमर्शियल गैस सिलिंडर की सप्लाई बंद होने से कई ढाबों की रसोई पर संकट मंडराने लगा है।

मुरथल के ढाबे मुख्य रूप से NH-44 के किनारे स्थित हैं, जहां दिल्ली से लेकर पंजाब और हरियाणा तक के लोग खाने के लिए आते हैं। देर रात भी यहां ढाबों पर भारी भीड़ देखने को मिलती है। लेकिन अब गैस की कमी के कारण कई ढाबा संचालक चिंतित नजर आ रहे हैं।

मुरथल में करीब 100 से ज्यादा छोटे-बड़े ढाबे हैं। इनमें से लगभग 25 बड़े ढाबों में पाइपलाइन के जरिए पीएनजी गैस की सुविधा है, जबकि बाकी ढाबे कॉमर्शियल गैस सिलिंडरों के भरोसे ही अपना काम चलाते हैं। ऐसे में जब सिलिंडर की आपूर्ति बंद हो जाती है तो उन ढाबों के सामने सबसे बड़ी परेशानी खड़ी हो जाती है जिनके पास पाइपलाइन गैस का विकल्प नहीं है।

जानकारी के मुताबिक हाईवे पर दिल्ली से पानीपत जाने वाली लेन के किनारे ही पीएनजी गैस की पाइपलाइन डाली गई है। इसी कारण उस तरफ स्थित ढाबों को ही पाइपलाइन गैस का कनेक्शन मिला हुआ है। लेकिन हाईवे के दूसरी तरफ स्थित कई ढाबों तक अभी तक पाइपलाइन नहीं पहुंची है, जिससे उन्हें पूरी तरह सिलिंडरों पर निर्भर रहना पड़ता है।

ढाबा संचालकों का कहना है कि फिलहाल उनके पास कुछ दिनों का गैस स्टॉक मौजूद है, लेकिन अगर जल्द ही सप्लाई शुरू नहीं हुई तो खाना बनाना मुश्किल हो जाएगा। कई ढाबों में रोजाना बड़ी मात्रा में गैस की खपत होती है क्योंकि यहां लगातार ग्राहकों की भीड़ लगी रहती है।

मुरथल के एक प्रसिद्ध ढाबे Mannat Haveli Dhaba के मैनेजर सचिन ने बताया कि मुरथल में सड़क के दोनों ओर गैस पाइपलाइन नहीं बिछाई गई है। उन्होंने कहा कि केवल दिल्ली-पानीपत लेन की ओर ही पाइपलाइन है और उसी तरफ के कुछ बड़े ढाबों को इसका कनेक्शन मिला हुआ है।

उन्होंने बताया कि उनके ढाबे में रोजाना करीब 15 कॉमर्शियल गैस सिलिंडरों की खपत होती है। आमतौर पर वे दो से तीन सिलिंडरों का बैकअप रखते हैं ताकि अचानक सप्लाई रुकने पर कुछ दिन तक काम चल सके। फिलहाल उनके पास तीन-चार दिन का स्टॉक मौजूद है, लेकिन इसके बाद परेशानी बढ़ सकती है।

स्थिति को देखते हुए कुछ ढाबा संचालकों ने वैकल्पिक इंतजाम भी शुरू कर दिए हैं। कई जगह इंडक्शन भट्ठी और डीजल से चलने वाली भट्ठियों का इस्तेमाल करने की तैयारी की जा रही है ताकि गैस की कमी के बावजूद खाना बनाना जारी रखा जा सके।

हालांकि ढाबा संचालकों का कहना है कि ऐसी व्यवस्था तुरंत करना आसान नहीं होता। इंडक्शन या डीजल भट्ठी की सप्लाई भी तुरंत नहीं मिलती और इन्हें लगाने में समय और खर्च दोनों लगता है। कई छोटे ढाबों के लिए यह व्यवस्था करना काफी मुश्किल है।

मुरथल के ढाबे केवल स्थानीय लोगों के लिए ही नहीं बल्कि दूर-दराज से आने वाले यात्रियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र हैं। खासकर दिल्ली और आसपास के इलाकों के लोग रात में ड्राइव पर निकलकर यहां पराठे खाने के लिए पहुंचते हैं।

ढाबा संचालकों का कहना है कि अगर गैस की समस्या ज्यादा दिनों तक बनी रही तो कई ढाबों को अपना काम सीमित करना पड़ सकता है। इससे न केवल उनका व्यापार प्रभावित होगा बल्कि यहां आने वाले ग्राहकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

कई ढाबा मालिकों का मानना है कि भविष्य में इस तरह की समस्या से बचने के लिए हाईवे के दोनों ओर पीएनजी गैस पाइपलाइन बिछाई जानी चाहिए। इससे गैस की सप्लाई नियमित बनी रहेगी और ढाबों को सिलिंडरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

फिलहाल मुरथल के ढाबा संचालक उम्मीद कर रहे हैं कि कॉमर्शियल गैस सिलिंडरों की सप्लाई जल्द बहाल हो जाएगी। लेकिन अगर यह समस्या लंबे समय तक बनी रहती है तो मुरथल के मशहूर ढाबों की रौनक पर असर पड़ सकता है और कई ढाबों को अपनी रसोई बंद करने तक की नौबत आ सकती है।

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