हरियाणा के पलवल जिले में शुक्रवार सुबह एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जब रिहायशी इलाके में स्थित एक धागा और रस्सी बनाने वाली फैक्ट्री में अचानक भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही देर में पूरी फैक्ट्री धुएं और लपटों से घिर गई। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और आसपास के लोग अपने घरों से बाहर निकल आए।

यह घटना पलवल के पातली गेट इलाके में दयानंद स्कूल के पास स्थित एक फैक्ट्री में हुई। बताया जा रहा है कि यह फैक्ट्री लंबे समय से रिहायशी क्षेत्र के बीच संचालित हो रही थी। शुक्रवार सुबह करीब सवा नौ बजे बिजली आने के बाद फैक्ट्री के अंदर लगे सीसीटीवी कैमरों में अचानक स्पार्किंग दिखाई दी। कुछ ही क्षणों में यह स्पार्किंग आग में बदल गई और आग तेजी से पूरे परिसर में फैलने लगी।
उस समय फैक्ट्री के अंदर कुछ कर्मचारी काम कर रहे थे। उन्होंने जैसे ही आग की लपटें देखीं, तुरंत फैक्ट्री में मौजूद छोटे अग्निशमन सिलेंडरों की मदद से आग बुझाने की कोशिश शुरू कर दी। लेकिन आग तेजी से फैलती चली गई और कुछ ही समय में बेसमेंट से लेकर पहली और दूसरी मंजिल तक पहुंच गई।
जब कर्मचारियों को लगा कि आग पर काबू पाना संभव नहीं है, तो उन्होंने तुरंत इसकी सूचना फायर ब्रिगेड को दी। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का अभियान शुरू किया गया।
दमकल विभाग की कुल 16 गाड़ियां और करीब 20 फायर फाइटर्स आग बुझाने में जुट गए। आग इतनी भीषण थी कि उसे काबू में करने में करीब पांच घंटे का समय लग गया। दमकल कर्मियों को लगातार पानी की बौछार कर आग की लपटों को नियंत्रित करना पड़ा।
आग बुझाने के दौरान फायर कर्मियों को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा। फैक्ट्री के अंदर घना धुआं भर गया था, जिससे वहां प्रवेश करना बेहद मुश्किल हो गया था। इसके अलावा आग की वजह से बिल्डिंग के कमजोर होने का खतरा भी बना हुआ था। इसके बावजूद दमकल कर्मियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर आग बुझाने का काम जारी रखा।
फायर विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बेसमेंट में धुएं का स्तर काफी अधिक था, जिससे वहां जाना बेहद खतरनाक था। इसके बावजूद टीम ने साहस दिखाते हुए अंदर जाकर हालात को काबू में किया। दमकल कर्मियों ने काफी मेहनत के बाद पहली और दूसरी मंजिल पर रखा कुछ सामान भी सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
प्रारंभिक आकलन के मुताबिक इस आगजनी में फैक्ट्री को करीब 40 से 50 लाख रुपये तक का नुकसान हुआ है। आग की वजह से मशीनें, कच्चा माल और तैयार माल का बड़ा हिस्सा जलकर राख हो गया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह फैक्ट्री पिछले 10 से 12 वर्षों से रिहायशी इलाके में चल रही थी। लोगों के मुताबिक फैक्ट्री में फायर सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे और न ही इसके पास फायर विभाग की आवश्यक एनओसी थी।
इस घटना के बाद आसपास के मकानों पर भी इसका असर देखने को मिला। फैक्ट्री के पास रहने वाले पवन भाटी के घर की दीवार में आग की वजह से दरार आ गई। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने एहतियातन उनके घर को खाली करवा दिया।
पवन भाटी ने बताया कि उन्होंने अपने परिवार को फिलहाल पड़ोसियों के घर भेज दिया है ताकि किसी तरह का खतरा न रहे। उनका कहना है कि इस फैक्ट्री को लेकर पहले भी कई बार शिकायत की गई थी, लेकिन इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
फैक्ट्री के मालिक प्रभात ने बताया कि आग लगने से उन्हें भारी नुकसान हुआ है। उनके मुताबिक फैक्ट्री में रखा कच्चा माल, मशीनें और तैयार माल का बड़ा हिस्सा जलकर नष्ट हो गया। उन्होंने बताया कि घटना के समय फैक्ट्री में तीन से चार कर्मचारी मौजूद थे, लेकिन सभी सुरक्षित हैं और किसी को कोई चोट नहीं आई है।
इस घटना के बाद इलाके के लोगों में चिंता का माहौल है। उनका कहना है कि अगर आग समय रहते काबू में नहीं आती तो आसपास के कई मकान भी इसकी चपेट में आ सकते थे और बड़ा हादसा हो सकता था।
स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि रिहायशी इलाकों में चल रही ऐसी फैक्ट्रियों की जांच की जाए और बिना अनुमति तथा बिना सुरक्षा व्यवस्था के चल रही इकाइयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
फिलहाल दमकल विभाग और प्रशासन इस पूरे मामले की जांच कर रहे हैं। शुरुआती तौर पर आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि पूरी जांच के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेगा।
इस घटना ने एक बार फिर रिहायशी क्षेत्रों में बिना पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम के चल रही फैक्ट्रियों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोग चाहते हैं कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए प्रशासन सख्त कदम उठाए।
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