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चैत्र नवरात्र का शुभारंभ: मां शैलपुत्री की आराधना से गूंजे मंदिर, विश्व शांति के लिए होगा विशेष यज्ञ

उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश में आज से Chaitra Navratri की शुरुआत हो गई है। इस पावन अवसर पर मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है, जिसकी शुरुआत पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना और कलश स्थापना से होती है।

सुबह के शुभ मुहूर्त में श्रद्धालुओं ने घरों और मंदिरों में विधि-विधान से घट स्थापना की और देवी मां का आह्वान किया। वातावरण “जय माता दी” के जयकारों और भक्ति गीतों से भक्तिमय हो गया है।

मां शैलपुत्री की पूजा से होती है शुरुआत

नवरात्र के पहले दिन Maa Shailputri की पूजा की जाती है। इन्हें पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है, इसी कारण इनका नाम शैलपुत्री पड़ा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ये देवी शक्ति का प्रथम स्वरूप हैं और जीवन में स्थिरता, साहस और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती हैं।

मां शैलपुत्री का वाहन वृषभ (बैल) है और वे दाहिने हाथ में त्रिशूल तथा बाएं हाथ में कमल धारण करती हैं। उनके मस्तक पर अर्धचंद्र सुशोभित रहता है। भक्त इन्हें शुद्ध घी या दूध से बनी खीर का भोग अर्पित करते हैं और “ऊं देवी शैलपुत्र्यै नमः” मंत्र का जाप करते हैं।

पौराणिक कथा से जुड़ा महत्व

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, मां शैलपुत्री पिछले जन्म में Sati थीं, जो प्रजापति दक्ष की पुत्री और भगवान शिव की पत्नी थीं। बाद में उन्होंने हिमालय के घर पुनर्जन्म लिया और शैलपुत्री के रूप में प्रकट हुईं।

उनकी पूजा से जीवन में स्थिरता आती है और व्यक्ति के मूलाधार चक्र को संतुलन मिलता है, जिससे मानसिक और शारीरिक शक्ति बढ़ती है।

मंदिरों में भव्य तैयारियां

नवरात्र के शुभारंभ को लेकर मंदिरों में विशेष सजावट की गई है। फूलों, रंग-बिरंगी रोशनी और आकर्षक झांकियों से मंदिरों को सजाया गया है। लखनऊ के प्रसिद्ध Chandrika Devi Temple, Badi Kali Ji Temple Chowk और Durga Ji Temple Shastri Nagar में खास तैयारियां की गई हैं।

भक्तों की सुविधा के लिए लंबी कतारों को व्यवस्थित करने हेतु बैरिकेडिंग, टेंट और पेयजल की व्यवस्था की गई है। सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए गए हैं।

नौ दिनों तक अलग-अलग स्वरूपों की पूजा

नवरात्र के दौरान देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है, जिनमें शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री शामिल हैं।

हर दिन अलग-अलग भोग अर्पित करने का भी विशेष महत्व है। पहले दिन घी, दूसरे दिन शक्कर, तीसरे दिन दूध, चौथे दिन मालपुआ, पांचवें दिन केला, छठे दिन शहद, सातवें दिन गुड़, आठवें दिन नारियल और नवमी को धान चढ़ाने की परंपरा है।

दुर्गा सप्तशती पाठ का महत्व

नवरात्र के दौरान Durga Saptashati का पाठ विशेष फलदायी माना जाता है। इसमें 13 अध्याय होते हैं, जिनके नियमित पाठ से रोग, भय, बाधा और कष्टों का नाश होता है।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, नवरात्र में नवार्ण मंत्र की साधना और दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से सुख, समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।

मंदिरों में होंगे विशेष कार्यक्रम

नवरात्र के दौरान मंदिरों में भजन-कीर्तन, हवन और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाएगा। चौक स्थित काली जी मंदिर में हर दिन मां का अलग-अलग फूलों और फलों से शृंगार किया जाएगा।

भक्तों को प्रतिदिन अलग-अलग स्वरूपों में मां के दर्शन होंगे, जिससे उनका आस्था और भक्ति का अनुभव और गहरा होगा।

फूलों से सजे देवी दरबार

शहर के कई मंदिरों को विशेष रूप से फूलों से सजाया गया है। चौपटिया स्थित संदोहन देवी मंदिर में मोगरा और गुलाब के फूलों से पूरा परिसर महक रहा है।

यहां भक्तों की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं और संकरी गलियों में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग की गई है।

विश्व शांति के लिए विशेष यज्ञ

इस बार नवरात्र के दौरान एक विशेष पहल भी देखने को मिल रही है। Durga Ji Temple Shastri Nagar में विश्व शांति की कामना के लिए यज्ञ आयोजित किया जाएगा।

यह यज्ञ Iran और United States के बीच चल रहे तनाव को समाप्त करने और वैश्विक शांति के लिए किया जाएगा। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे और सामूहिक रूप से शांति की प्रार्थना करेंगे।

शुभ मुहूर्त में घट स्थापना

घट स्थापना के लिए सुबह 6:52 से 10:13 बजे तक का समय अत्यंत शुभ माना गया है। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त 11:50 से 12:38 बजे तक भी अनुकूल है।

घट स्थापना देवी शक्ति के आवाहन का प्रतीक है और इसे नवरात्र की सबसे महत्वपूर्ण विधि माना जाता है।

निष्कर्ष

Chaitra Navratri का यह पावन पर्व आस्था, भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। मां शैलपुत्री की पूजा से जहां जीवन में स्थिरता और शक्ति मिलती है, वहीं नौ दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में हर दिन देवी के अलग स्वरूप की आराधना से जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है।

इस बार नवरात्र न केवल धार्मिक दृष्टि से खास है, बल्कि विश्व शांति की कामना के लिए किए जा रहे विशेष यज्ञ के कारण भी यह और अधिक महत्वपूर्ण बन गया है। श्रद्धा और विश्वास के इस पर्व में हर भक्त अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना कर रहा है।

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