हरियाणा के पानीपत जिले में एक युवक ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए एक ही परिवार के पांच लोगों की जान बचाकर मानवता की मिसाल पेश की है। यह घटना उस समय हुई जब एक कार अचानक अनियंत्रित होकर नहर में गिर गई और उसमें सवार पूरा परिवार डूबने लगा। मौके पर मौजूद 24 वर्षीय युवक ने बिना अपनी जान की परवाह किए नहर में छलांग लगा दी और सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

मिली जानकारी के अनुसार, सौदापुर गांव निवासी दीपक अपनी पत्नी मंजू और तीन बच्चों के साथ अपने ससुराल शेखपुरा गनौर से वापस घर लौट रहे थे। रात करीब 8 बजे जब वे नरायणा नहर के पुल के पास पहुंचे, तभी अचानक उनकी कार का संतुलन बिगड़ गया और वह सीधे नहर में जा गिरी। कार के गिरते ही उसका पिछला हिस्सा पुल के खंभे से टकराया, जिससे पीछे का शीशा टूट गया और पानी तेजी से गाड़ी के अंदर भरने लगा।
नहर में गिरते ही परिवार के लोग घबरा गए और मदद के लिए चिल्लाने लगे। अंधेरे और तेज बहाव के कारण स्थिति और भी भयावह हो गई थी। तभी पास से गुजर रहे सचिन छौक्कर नामक युवक की नजर इस हादसे पर पड़ी। वह अपने ट्रैक्टर पर सवार था और जैसे ही उसने कार को नहर में गिरते देखा, उसने तुरंत ट्रैक्टर रोक दिया।
सचिन ने बिना देर किए नहर में छलांग लगा दी। कूदते समय उसे चोट भी आई, लेकिन उसने इसकी परवाह नहीं की। वह सीधे कार के पास पहुंचा और सबसे पहले बच्चों को बाहर निकालना शुरू किया। एक-एक कर उसने तीनों बच्चों को सुरक्षित किनारे तक पहुंचाया।
इसके बाद उसने दीपक की पत्नी मंजू को बाहर निकाला, जो काफी घबराई हुई थीं और खुद को संभाल नहीं पा रही थीं। अंत में सचिन ने दीपक को भी कार से बाहर निकाला, जो अंदर फंसे हुए थे और पानी भरने के कारण उनकी हालत बिगड़ रही थी।
इस पूरी घटना में सचिन ने जिस तरह से हिम्मत और समझदारी दिखाई, वह काबिले तारीफ है। अगर वह समय पर वहां नहीं पहुंचता, तो यह हादसा जानलेवा साबित हो सकता था। उसकी बहादुरी के चलते ही पांच लोगों की जिंदगी बच पाई।
घटना की जानकारी मिलते ही समालखा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। वहीं, स्थानीय लोगों और राहगीरों ने सचिन की जमकर सराहना की। सभी का कहना है कि ऐसे साहसी युवाओं को सरकार द्वारा सम्मानित किया जाना चाहिए, ताकि समाज में सकारात्मक संदेश जाए।
यह घटना हमें यह सिखाती है कि मुश्किल वक्त में अगर हिम्मत और इंसानियत से काम लिया जाए, तो बड़े से बड़ा संकट भी टल सकता है। सचिन छौक्कर ने जो किया, वह न सिर्फ एक परिवार के लिए नई जिंदगी लेकर आया, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन गया।
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