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फर्जी खातों का खेल: साइबर ठगों को बैंक डिटेल बेचने वाले चार आरोपी गिरफ्तार

गुरुग्राम पुलिस ने साइबर अपराध के एक संगठित नेटवर्क का खुलासा करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो फर्जी बैंक खाते तैयार कर उन्हें साइबर ठगों को उपलब्ध कराते थे। यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और देश-विदेश में बैठे ठगों को बैंकिंग सुविधा मुहैया कराकर ठगी की वारदातों को आसान बना रहा था।

पुलिस जांच में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी बेहद सुनियोजित तरीके से काम करते थे। ये लोग पहले फर्जी फर्मों के कागजात तैयार करवाते थे, फिर उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर अलग-अलग बैंकों में खाते खुलवाते थे। इसके बाद ये खाते साइबर ठगों को मोटी रकम लेकर बेच दिए जाते थे, जिनका इस्तेमाल ऑनलाइन ठगी, फर्जी निवेश स्कीम और अन्य धोखाधड़ी के मामलों में किया जाता था।

गिरफ्तार आरोपियों में प्रवेश अहलावत, सागर, अभिषेक और यासीन नूर मोहम्मद शामिल हैं। ये चारों अलग-अलग राज्यों से ताल्लुक रखते हैं, जिससे साफ है कि यह नेटवर्क केवल एक जिले तक सीमित नहीं था, बल्कि कई राज्यों में फैला हुआ था। पुलिस को शक है कि इनके तार अंतरराष्ट्रीय गिरोहों से भी जुड़े हो सकते हैं।

पुलिस ने आरोपियों के पास से 16 बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज जैसे चेक बुक, पासबुक और डेबिट कार्ड बरामद किए हैं। इसके अलावा चार पासपोर्ट और छह मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं, जो इस बात का संकेत हैं कि आरोपी बड़े स्तर पर इस अवैध धंधे में शामिल थे। मोबाइल फोन की जांच से और भी अहम सुराग मिलने की संभावना जताई जा रही है।

पूछताछ के दौरान आरोपियों ने खुलासा किया कि वे इन खातों को विदेशी साइबर ठगों, खासकर चीनी नेटवर्क को बेचते थे। इसके बदले उन्हें मोटी रकम मिलती थी। हालांकि अब तक उन्हें करीब एक लाख रुपये ही मिले थे, लेकिन आगे हर खाते पर 50 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक मिलने की डील तय थी।

इस पूरे नेटवर्क में अभिषेक की भूमिका अहम बताई जा रही है। उसी के जरिए अन्य आरोपियों का संपर्क हुआ और पूरे गिरोह ने मिलकर इस अवैध कारोबार को अंजाम दिया। अभिषेक ने ही इन खातों को आगे अन्य लोगों तक पहुंचाया, जो इन्हें साइबर ठगों तक सप्लाई करते थे।

गुरुग्राम पुलिस ने चारों आरोपियों को अदालत में पेश किया। कोर्ट ने यासीन और सागर को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया, जबकि प्रवेश और अभिषेक को दो दिन के पुलिस रिमांड पर सौंपा गया है। पुलिस अब रिमांड के दौरान उनसे गहन पूछताछ कर रही है, ताकि इस नेटवर्क के बाकी सदस्यों और इसके पूरे ऑपरेशन का खुलासा किया जा सके।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर ठगी के मामलों में केवल ठगी करने वाले ही नहीं, बल्कि इस तरह से सहयोग करने वाले लोग भी बराबर के जिम्मेदार होते हैं। बैंक खाते उपलब्ध कराना साइबर अपराध की एक अहम कड़ी है, क्योंकि इन्हीं खातों के जरिए ठगी की रकम ट्रांसफर और निकाली जाती है।

जांच एजेंसियां अब इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि इन खातों के जरिए अब तक कितने लोगों को ठगा गया और कितनी रकम का लेन-देन हुआ। साथ ही, यह भी जांच की जा रही है कि इस गिरोह के संपर्क किन-किन अन्य लोगों या संगठनों से जुड़े हुए हैं।

यह मामला एक बार फिर यह साबित करता है कि साइबर अपराध अब एक संगठित इंडस्ट्री का रूप ले चुका है, जिसमें अलग-अलग स्तर पर लोग अपनी-अपनी भूमिका निभाते हैं। ऐसे में पुलिस और जांच एजेंसियों के लिए इन नेटवर्क को तोड़ना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

पुलिस ने आम नागरिकों से भी सतर्क रहने की अपील की है। किसी भी अजनबी व्यक्ति के कहने पर बैंक खाता खुलवाना या अपनी बैंक डिटेल साझा करना गंभीर जोखिम भरा हो सकता है। अगर किसी को इस तरह की कोई संदिग्ध गतिविधि नजर आती है, तो तुरंत इसकी सूचना पुलिस को देनी चाहिए।

फिलहाल पुलिस इस मामले में आगे की कार्रवाई कर रही है और उम्मीद जताई जा रही है कि पूछताछ के दौरान और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। इस कार्रवाई से साइबर अपराधियों के नेटवर्क पर एक बड़ा झटका लगा है और भविष्य में इस तरह के मामलों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।

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