हरियाणा सरकार ने प्रदेश की किशोरियों को गंभीर बीमारियों से बचाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य अभियान की शुरुआत की है। इस योजना के तहत राज्य में लगभग 3 लाख लड़कियों को ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) वैक्सीन मुफ्त में लगाई जाएगी। यह कदम खास तौर पर सर्वाइकल कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी की रोकथाम को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।

राज्य की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने इस योजना के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि फिलहाल सभी जिलों में 14 वर्ष की आयु की किशोरियों की पहचान के लिए विशेष सर्वेक्षण चलाया जा रहा है। इस सर्वे के जरिए पात्र लाभार्थियों की सूची तैयार की जा रही है, ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी योग्य किशोरी इस योजना से वंचित न रह जाए।
इस स्वास्थ्य अभियान की शुरुआत 28 फरवरी 2026 को नायब सिंह सैनी द्वारा की गई थी। योजना के तहत उन किशोरियों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिन्होंने 14 वर्ष की आयु पूरी कर ली है, लेकिन अभी 15 वर्ष की नहीं हुई हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह आयु वर्ग टीकाकरण के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि इस समय शरीर में वैक्सीन का प्रभाव अधिक कारगर होता है।
HPV वैक्सीन महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह वैक्सीन ह्यूमन पैपिलोमावायरस के उन खतरनाक प्रकारों से बचाव करती है, जो सर्वाइकल कैंसर के प्रमुख कारण होते हैं। विशेष रूप से यह टाइप 16 और 18 से सुरक्षा प्रदान करती है, जो इस कैंसर के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार माने जाते हैं। इसके अलावा यह टाइप 6 और 11 से भी सुरक्षा देती है, जो अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़े होते हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने इस पूरे टीकाकरण अभियान को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संचालित करने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। टीकाकरण से पहले यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि लाभार्थी किशोरी खाली पेट न हो। अभिभावकों को भी इस बारे में जागरूक किया जा रहा है कि वे अपनी बच्चियों को वैक्सीन लगवाने से पहले कुछ खाने के लिए जरूर दें।
टीकाकरण केंद्रों पर उन किशोरियों के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं, जो घर से बिना नाश्ता किए पहुंचती हैं। वहां हल्के जलपान की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, ताकि कोई भी बच्ची असहज महसूस न करे। इसके साथ ही, वैक्सीन लगने के बाद सभी किशोरियों को कम से कम 30 मिनट तक निगरानी में रखा जाता है, ताकि किसी भी तरह की प्रतिक्रिया को तुरंत संभाला जा सके।
टीकाकरण केंद्रों पर ऑब्जर्वेशन रूम की व्यवस्था भी की गई है, जहां किशोरियों को आरामदायक माहौल दिया जाता है। यहां ऐसी गतिविधियां आयोजित की जाती हैं, जो उनका ध्यान टीकाकरण के बाद होने वाले हल्के दर्द या घबराहट से हटाने में मदद करती हैं। इससे मानसिक तनाव कम होता है और प्रक्रिया को सहज बनाया जाता है।
सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि टीकाकरण से पहले प्रत्येक लाभार्थी की स्वास्थ्य स्थिति की जांच की जाए। इसमें यह देखा जाता है कि किशोरी को कोई गंभीर एलर्जी तो नहीं है, वह किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त तो नहीं है, या पहले उसे HPV वैक्सीन लग चुकी है या नहीं। इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर ही वैक्सीन दी जाती है।
अभियान के तहत अभिभावकों की सहमति लेना भी अनिवार्य किया गया है। इसके लिए OTP आधारित डिजिटल अनुमति या लिखित सहमति ली जाती है। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि अभिभावक पूरी तरह जागरूक हैं और उनकी सहमति से ही टीकाकरण किया जा रहा है।
इस पूरी प्रक्रिया को डिजिटल रूप से भी मॉनिटर किया जा रहा है। U-WIN पोर्टल के माध्यम से सभी लाभार्थियों का डेटा दर्ज किया जा रहा है और टीकाकरण के बाद डिजिटल प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं। इससे पारदर्शिता बनी रहती है और भविष्य में रिकॉर्ड को आसानी से ट्रैक किया जा सकता है।
सरकार इस योजना के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए भी विशेष प्रयास कर रही है। स्कूलों के शिक्षकों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा वर्कर्स और स्थानीय समुदाय के नेताओं को इस अभियान से जोड़ा गया है। ये लोग घर-घर जाकर परिवारों को इस वैक्सीन के महत्व के बारे में जानकारी दे रहे हैं और उन्हें इस योजना का लाभ उठाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, HPV वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है और इसके साइड इफेक्ट्स बहुत ही सामान्य होते हैं, जैसे इंजेक्शन वाली जगह पर हल्का दर्द, बुखार या बदन दर्द। ऐसे मामलों में डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवा लेने से राहत मिल जाती है और ये लक्षण कुछ ही समय में खत्म हो जाते हैं।
अब तक इस योजना के तहत लगभग 3280 किशोरियों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है और आने वाले समय में इस संख्या को तेजी से बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का उद्देश्य है कि सभी पात्र किशोरियों को इस योजना का लाभ मिले और उन्हें गंभीर बीमारियों से सुरक्षित किया जा सके।
यह पहल न केवल स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में एक मजबूत कदम है, बल्कि समाज में जागरूकता बढ़ाने का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम है। अगर यह अभियान सफलतापूर्वक लागू होता है, तो आने वाले वर्षों में सर्वाइकल कैंसर के मामलों में बड़ी कमी देखी जा सकती है।
अंततः, हरियाणा सरकार की यह योजना महिलाओं के स्वास्थ्य को सशक्त बनाने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास है। यह न सिर्फ वर्तमान पीढ़ी को सुरक्षित करने का काम करेगी, बल्कि भविष्य में एक स्वस्थ समाज के निर्माण में भी अहम भूमिका निभाएगी।
स्वर्णिम टाईम्स : Swarnim Times आपका अपना इंटरनेट अख़बार !