हरियाणा के कुरुक्षेत्र स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) में एक दुखद और चिंताजनक घटना सामने आई है। यहां बीटेक कर रहे एक छात्र ने अपने हॉस्टल के कमरे में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। इस घटना के बाद पूरे कैंपस में शोक और सन्नाटा पसरा हुआ है।

मृतक की पहचान पवन कुमार के रूप में हुई है, जो मेवात का निवासी था और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के पांचवें सेमेस्टर का छात्र था। वह हॉस्टल नंबर-8 के ब्लॉक-सी में कमरा नंबर 452 में रहता था।
मिली जानकारी के अनुसार, पवन मंगलवार शाम से अपने कमरे में ही था और बाहर नहीं निकला। उसके दोस्तों ने पहले इसे सामान्य बात समझा, लेकिन जब देर रात तक कमरे से कोई हलचल नहीं हुई, तो उन्हें चिंता होने लगी। दोस्तों ने दरवाजा खटखटाया, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं मिला। जब उन्होंने किसी तरह कमरे के अंदर झांककर देखा, तो पवन को पंखे से लटका हुआ पाया।
यह दृश्य देखकर छात्र घबरा गए और तुरंत हॉस्टल के सुरक्षा कर्मियों को सूचना दी गई। इसके बाद पुलिस को बुलाया गया। पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर शव को नीचे उतारा और अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
घटनास्थल पर पहुंची फॉरेंसिक टीम ने भी जांच शुरू की और कमरे से जरूरी साक्ष्य जुटाए। हालांकि मौके से कोई स्पष्ट सुसाइड नोट नहीं मिला, जिससे आत्महत्या के पीछे की वजह तुरंत स्पष्ट नहीं हो पाई।
पुलिस को कमरे से एक नोटबुक जरूर मिली है, जिसमें कर्ज से संबंधित कुछ बातें लिखी हुई बताई जा रही हैं। इस आधार पर यह आशंका जताई जा रही है कि छात्र किसी आर्थिक दबाव या मानसिक तनाव में हो सकता है। हालांकि पुलिस अभी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है और हर पहलू से जांच कर रही है।
घटना की सूचना मिलते ही NIT के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। संस्थान के निदेशक डॉ. बीवी रमन्ना रेड्डी ने घटना पर दुख व्यक्त किया और कहा कि मामले की पूरी जानकारी संबंधित अधिकारियों से ली जा रही है।
इस घटना के बाद हॉस्टल में रहने वाले अन्य छात्र भी काफी सदमे में हैं। उनका कहना है कि पवन सामान्य स्वभाव का था और उसने कभी इस तरह की परेशानी का जिक्र नहीं किया था।
पुलिस अब छात्र के दोस्तों, सहपाठियों और शिक्षकों से बातचीत कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वह किसी प्रकार के तनाव या समस्या से जूझ रहा था या नहीं। साथ ही उसके मोबाइल फोन और अन्य निजी सामान की भी जांच की जा रही है।
यह घटना एक बार फिर छात्रों के बीच बढ़ते मानसिक दबाव और तनाव की ओर इशारा करती है। पढ़ाई, करियर और व्यक्तिगत समस्याएं कई बार छात्रों को अंदर ही अंदर प्रभावित करती हैं, लेकिन वे इसे किसी से साझा नहीं कर पाते।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद ही आत्महत्या के कारणों को लेकर कुछ स्पष्ट कहा जा सकेगा।
यह घटना न केवल संस्थान के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए एक गंभीर संदेश है कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर समय रहते ध्यान देना बेहद जरूरी है।
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