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वाराणसी की नेशनल खिलाड़ी की दर्दनाक कहानी: कोमा में जिंदगी की जंग, दहेज प्रताड़ना के आरोपों से मचा हड़कंप

उत्तर प्रदेश के वाराणसी से एक ऐसी दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। कभी वॉलीबॉल कोर्ट पर अपने खेल से देश का नाम रोशन करने वाली नेशनल खिलाड़ी प्रिया सरोज आज जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही हैं। उनकी हालत इतनी गंभीर है कि वह कोमा में हैं, न किसी को पहचान पा रही हैं और न ही किसी से बात कर पा रही हैं। परिवार का आरोप है कि यह पूरी घटना दहेज प्रताड़ना और लगातार मानसिक उत्पीड़न का परिणाम है।

प्रिया सरोज वाराणसी के परमानंदपुर क्षेत्र की रहने वाली हैं और बचपन से ही खेल के प्रति उनका गहरा लगाव था। मेहनत, लगन और प्रतिभा के दम पर उन्होंने वॉलीबॉल में राष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बनाई। कई प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर उन्होंने न सिर्फ अपने परिवार का बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया था। लोगों को उम्मीद थी कि प्रिया आगे चलकर देश के लिए और भी बड़े मंच पर खेलेंगी।

परिवार के अनुसार, प्रिया की शादी फरवरी 2024 में वाराणसी के बीएलडब्ल्यू क्षेत्र निवासी अमित वर्मा से हुई थी, जो जूनियर इंजीनियर (JE) के पद पर कार्यरत हैं। शादी धूमधाम से हुई थी और परिवार ने बेटी को खुशहाल जीवन की उम्मीद के साथ विदा किया था। शुरुआती दिनों में सब कुछ सामान्य नजर आया, लेकिन कुछ ही समय बाद हालात बदलने लगे।

शादी के बाद अमित वर्मा की पोस्टिंग गोरखपुर हो गई, जहां वह प्रिया को अपने साथ ले गया। प्रिया की मां निशा का आरोप है कि वहीं से बेटी की जिंदगी में परेशानियों की शुरुआत हुई। पहले तो सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन धीरे-धीरे व्यवहार में बदलाव आने लगा। आरोप है कि प्रिया पर मानसिक दबाव बनाया जाने लगा और उससे संपत्ति तथा जमीन अपने नाम कराने की मांग की जाने लगी।

परिवार का कहना है कि प्रिया ने लंबे समय तक रिश्ते को बचाने की कोशिश की और हर कठिन परिस्थिति को सहन किया। वह चाहती थीं कि उनका घर टूटे नहीं, लेकिन लगातार बढ़ते मानसिक दबाव ने उन्हें अंदर से तोड़ दिया। धीरे-धीरे उनकी मानसिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ने लगा।

करीब 14 महीने बाद परिवार को अचानक एक फोन कॉल मिला, जिसने सब कुछ बदल दिया। फोन पर बताया गया कि प्रिया ने आत्महत्या की कोशिश की है और उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यह खबर सुनते ही परिवार गोरखपुर पहुंचा, जहां उन्हें बताया गया कि प्रिया की जान तो बच गई है, लेकिन वह कोमा में चली गई हैं।

अस्पताल में डॉक्टरों ने बताया कि लंबे समय तक ऑक्सीजन की कमी और गंभीर मानसिक तनाव के कारण प्रिया की हालत बेहद नाजुक हो गई है। उनकी याददाश्त प्रभावित हुई है और बोलने की क्षमता भी खत्म हो चुकी है। अब वह अपने परिवार को भी पहचानने में असमर्थ हैं, जिससे परिजन पूरी तरह टूट गए हैं।

इस घटना के बाद प्रिया की मां निशा का रो-रोकर बुरा हाल है। उनका कहना है कि जिस बेटी को उन्होंने बड़े अरमानों से विदा किया था, वह आज अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रही है। मां लगातार न्याय की मांग कर रही हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपील कर रही हैं।

परिवार का आरोप है कि यह सब मानसिक प्रताड़ना और दहेज के लिए बनाए गए दबाव का नतीजा है। उनका कहना है कि अगर समय रहते इस पर ध्यान दिया जाता, तो शायद उनकी बेटी आज इस हालत में नहीं होती। परिवार ने यह भी दावा किया है कि प्रिया को लगातार संपत्ति अपने नाम कराने के लिए दबाव बनाया जा रहा था।

प्रिया के पूर्व कोच और शिक्षक राहुल ने भी इस घटना पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने बताया कि प्रिया बचपन से ही बहुत प्रतिभाशाली खिलाड़ी थीं और उनमें आगे बढ़ने की अपार क्षमता थी। उन्होंने कई राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन किया था और उनका भविष्य बेहद उज्ज्वल माना जा रहा था।

इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है। लोग सोशल मीडिया पर भी प्रिया के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपील कर रहे हैं। यह मामला अब सिर्फ एक परिवार का नहीं, बल्कि समाज में महिलाओं की सुरक्षा और दहेज प्रताड़ना जैसे गंभीर मुद्दों का प्रतीक बन गया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों में समय रहते कार्रवाई न होने से हालात और बिगड़ जाते हैं। यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर कब तक बेटियां इस तरह की मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का शिकार होती रहेंगी।

पुलिस और प्रशासन से परिजनों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक कानूनी मामला नहीं, बल्कि एक बेटी की जिंदगी से जुड़ा सवाल है।

फिलहाल प्रिया का इलाज जारी है और डॉक्टर उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं। परिवार हर पल उनकी सेहत में सुधार की उम्मीद कर रहा है, लेकिन स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है।

कुल मिलाकर, वाराणसी की यह घटना एक बेहद दर्दनाक कहानी है, जहां एक होनहार खिलाड़ी आज जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही है और उसका परिवार न्याय की उम्मीद में दर-दर भटक रहा है।

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