उत्तर प्रदेश के मेरठ से सामने आया एक सनसनीखेज मामला लोगों को अंदर तक झकझोर देने वाला है। यह घटना किसी थ्रिलर फिल्म की कहानी जैसी लग सकती है, लेकिन हकीकत इससे भी ज्यादा डरावनी है। यहां एक पिता ने अपनी ही बेटी की मौत के बाद उसके शव को करीब पांच महीने तक घर में छिपाकर रखा। हैरानी की बात यह है कि इस दौरान उसने न तो अंतिम संस्कार किया और न ही किसी को इसकी जानकारी दी। बदबू को छिपाने के लिए वह लगातार परफ्यूम का इस्तेमाल करता रहा, ताकि आसपास के लोगों को शक न हो सके।

कैसे खुला रहस्य
यह मामला मेरठ के तेली मोहल्ले का है, जहां रहने वाले उदय भानु विश्वास नाम के व्यक्ति ने अपनी बेटी प्रियंका की मौत को दुनिया से छिपाए रखा। शुरुआत में किसी को इस बात का अंदाजा नहीं हुआ, क्योंकि जब भी पड़ोसी या रिश्तेदार प्रियंका के बारे में पूछते, तो वह कहता कि उसकी बेटी देहरादून में नौकरी कर रही है।
समय बीतने के साथ घर से अजीब सी बदबू आने लगी। हालांकि पिता लगातार परफ्यूम छिड़ककर इस बदबू को दबाने की कोशिश करता रहा, लेकिन धीरे-धीरे यह बदबू इतनी तेज हो गई कि आसपास के लोगों को शक होने लगा। आखिरकार रिश्तेदारों ने स्थिति को गंभीर समझते हुए पुलिस को सूचना दे दी।
कमरे का दरवाजा खुलते ही उड़ गए होश
जब पुलिस मौके पर पहुंची और संदिग्ध कमरे का दरवाजा खोला, तो अंदर का नजारा बेहद भयावह था। कमरे में हर तरफ गंदगी फैली हुई थी और बेड पर एक सड़ी-गली लाश पड़ी थी। शव की हालत इतनी खराब हो चुकी थी कि पहचान करना मुश्किल हो गया था। शरीर लगभग कंकाल में तब्दील हो चुका था।
इस दृश्य को देखकर पुलिसकर्मी और वहां मौजूद लोग भी सन्न रह गए। पूरे कमरे में बदबू का ऐसा माहौल था कि वहां खड़ा होना भी मुश्किल हो रहा था। पुलिस ने तुरंत शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
पिता का अजीब व्यवहार
इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि उदय भानु विश्वास ने अपनी बेटी की मौत के बाद सामान्य व्यवहार बनाए रखा। वह लोगों से मिलता-जुलता रहा और बार-बार यही कहता रहा कि उसकी बेटी बाहर नौकरी कर रही है।
बताया जाता है कि कुछ समय के लिए वह खुद भी घर छोड़कर देहरादून चला गया था। वहां भी उसने लोगों को यही बताया कि उसकी बेटी अस्पताल में भर्ती है। इस दौरान वह समय-समय पर मेरठ लौटता रहा और घर में परफ्यूम छिड़ककर बदबू को दबाने की कोशिश करता रहा।
रिश्तेदारों की सतर्कता से सामने आया सच
परिवार के एक सदस्य ने बताया कि उन्होंने उदय भानु को आखिरी बार 5 दिसंबर को देखा था। इसके बाद वह अचानक गायब हो गया था। लंबे समय तक उसका कोई पता नहीं चला। फिर एक दिन सूचना मिली कि वह बेगमबाग इलाके में एक चाय की दुकान पर दिखाई दिया है।
रिश्तेदार तुरंत वहां पहुंचे और उसे पकड़ लिया। पहले तो उसने बात टालने की कोशिश की, लेकिन जब सख्ती से पूछताछ की गई, तो उसने सच्चाई कबूल कर ली। उसने बताया कि उसकी बेटी की मौत हो चुकी है और उसका शव घर के अंदर रखा हुआ है।
यह सुनकर रिश्तेदारों के पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद यह पूरा मामला उजागर हुआ।
बीमारी बनी मौत की वजह
जानकारी के मुताबिक, प्रियंका पेशे से एक शिक्षिका थी और पिछले कुछ समय से पीलिया (जॉन्डिस) से पीड़ित थी। परिवार ने उसका इलाज कराया, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। यहां तक कि झाड़-फूंक का भी सहारा लिया गया, लेकिन अंततः उसकी जान नहीं बच सकी।
प्रियंका की मौत के बाद पिता मानसिक रूप से पूरी तरह टूट गया। उसने बेटी के अंतिम संस्कार के बजाय उसे अपने पास ही रखने का फैसला किया। यही फैसला आगे चलकर इस भयावह स्थिति में बदल गया।
पहले भी झेल चुका था सदमा
उदय भानु विश्वास के जीवन में यह पहली त्रासदी नहीं थी। बताया जाता है कि उसकी पत्नी ने साल 2013 में आत्महत्या कर ली थी। इस घटना के बाद से ही वह मानसिक तनाव में रहने लगा था।
पत्नी की मौत के बाद उसकी दुनिया केवल उसकी बेटी तक सीमित रह गई थी। जब बेटी की भी मौत हो गई, तो वह इस सदमे को सहन नहीं कर पाया और उसने हकीकत को स्वीकार करने के बजाय उसे छिपाने का रास्ता चुना।
मानसिक स्थिति पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज कितना जागरूक है। किसी व्यक्ति का अपनी बेटी की लाश के साथ महीनों तक रहना सामान्य व्यवहार नहीं माना जा सकता।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के मामलों में व्यक्ति गहरे मानसिक आघात और अकेलेपन का शिकार होता है। वह वास्तविकता को स्वीकार नहीं कर पाता और एक काल्पनिक दुनिया में जीने लगता है। उदय भानु विश्वास के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ प्रतीत होता है।
पुलिस की कार्रवाई
मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया और पिता को हिरासत में ले लिया गया। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि कहीं इस मामले में कोई और पहलू तो नहीं है।
हालांकि शुरुआती जांच में यह साफ हो चुका है कि प्रियंका की मौत बीमारी के कारण हुई थी और इसमें किसी तरह की साजिश या हत्या का मामला नहीं है। फिर भी पुलिस हर एंगल से जांच कर रही है।
समाज के लिए सबक
यह घटना सिर्फ एक अपराध या सनसनीखेज खबर नहीं है, बल्कि समाज के लिए एक बड़ा सबक भी है। यह दिखाती है कि मानसिक तनाव और अकेलापन इंसान को किस हद तक ले जा सकता है।
अगर समय रहते उदय भानु को मानसिक सहारा और मदद मिल जाती, तो शायद यह स्थिति इतनी भयावह नहीं बनती। परिवार और समाज की जिम्मेदारी है कि वे अपने आसपास के लोगों की मानसिक स्थिति पर भी ध्यान दें और जरूरत पड़ने पर उनकी मदद करें।
निष्कर्ष
मेरठ की यह घटना हर किसी को सोचने पर मजबूर कर देती है। एक पिता का अपनी बेटी की लाश के साथ महीनों तक रहना न सिर्फ डरावना है, बल्कि बेहद दुखद भी है। यह घटना बताती है कि दुख और मानसिक तनाव इंसान को किस कदर तोड़ सकता है।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है और आरोपी पिता से पूछताछ जारी है। वहीं, यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी भी है कि मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज करना कितना खतरनाक हो सकता है।
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