हरियाणा के अंबाला जिले में सुरक्षा एजेंसियों ने एक ऐसी खुफिया साजिश का पर्दाफाश किया है, जिसने देश की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अंबाला के बकनौर एयरफोर्स स्टेशन के आसपास पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI की ओर से एक हाई-टेक जासूसी नेटवर्क चलाने की कोशिश की गई थी, जिसमें सोलर पावर्ड सीसीटीवी कैमरे के जरिए भारतीय वायुसेना की गतिविधियों की लाइव निगरानी कर डेटा विदेश भेजा जा रहा था। हालांकि, भारतीय वायुसेना की सतर्कता और समय रहते की गई कार्रवाई के चलते यह पूरी योजना विफल हो गई।

यह मामला उस समय सामने आया जब एयरफोर्स स्टेशन के आसपास नियमित गश्त के दौरान सुरक्षा बलों की नजर एक संदिग्ध उपकरण पर पड़ी। यह उपकरण एक बिजली के खंभे पर लगाया गया सोलर पावर्ड कैमरा था, जो सामान्य निगरानी कैमरे जैसा दिख रहा था। शुरुआत में सुरक्षा बलों ने इसे सामान्य मानते हुए हटाकर अपने कब्जे में ले लिया। लेकिन बाद में जब इसकी जांच आगे बढ़ी तो इसके पीछे एक बड़े जासूसी नेटवर्क का खुलासा हुआ।
जांच में सामने आया कि यह कोई साधारण सीसीटीवी कैमरा नहीं था, बल्कि इसे विशेष रूप से एयरफोर्स स्टेशन की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए लगाया गया था। इसमें सोलर पैनल के जरिए ऊर्जा प्राप्त करने की व्यवस्था थी, जिससे यह बिना किसी बाहरी बिजली कनेक्शन के लगातार काम कर सकता था। यह कैमरा दिन-रात रिकॉर्डिंग करने में सक्षम था और इसमें एक सिम कार्ड लगाया गया था, जिसकी मदद से यह डेटा मोबाइल नेटवर्क के जरिए ट्रांसफर कर रहा था।
सबसे खतरनाक बात यह सामने आई कि इस कैमरे से मिलने वाली लाइव फीड को एक मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए सीधे विदेश में बैठे हैंडलर्स तक भेजा जा रहा था। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस नेटवर्क का संबंध पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़ा हुआ पाया गया है। यह पूरा सिस्टम इस तरह डिजाइन किया गया था कि लंबे समय तक किसी को शक भी न हो और लगातार सैन्य गतिविधियों की निगरानी होती रहे।
इस मामले का बड़ा खुलासा तब हुआ जब दिल्ली पुलिस ने 29 मार्च को इस जासूसी नेटवर्क से जुड़े छह आरोपियों को गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने हरियाणा के अंबाला जिले के मलौर गांव के पास एयरफोर्स स्टेशन से लगभग तीन किलोमीटर दूर यह कैमरा लगाया था। उनका उद्देश्य साफ था—भारतीय वायुसेना की गतिविधियों पर नजर रखना और संवेदनशील जानकारी पाकिस्तान तक पहुंचाना।
आरोपियों ने यह भी बताया कि उन्होंने इस कैमरे को इस तरह सेट किया था कि यह सोलर एनर्जी से लगातार चलता रहे और 24 घंटे डेटा भेजता रहे। यह कैमरा सड़क किनारे लगे एक बिजली के खंभे पर लगाया गया था, जिससे एयरफोर्स स्टेशन की ओर जाने वाली मुख्य सड़क और वहां की हलचल पर आसानी से नजर रखी जा सके।
दिलचस्प बात यह रही कि भारतीय वायुसेना की गश्ती टीम ने लगभग 12 दिन पहले ही इस संदिग्ध कैमरे को पहचान लिया था। उस समय इसे तुरंत हटाकर कब्जे में ले लिया गया था, हालांकि तब यह स्पष्ट नहीं था कि इसका उपयोग किस उद्देश्य से किया जा रहा था। बाद में दिल्ली पुलिस की जांच के दौरान इसके पीछे की पूरी साजिश का पर्दाफाश हुआ।
इसके बाद दिल्ली पुलिस 1 अप्रैल को गांव मलौर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। वहां स्थानीय लोगों से पूछताछ की गई और उस स्थान की गहन जांच की गई जहां कैमरा लगाया गया था। जांच में यह भी सामने आया कि यह कोई अकेली घटना नहीं हो सकती, बल्कि इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था, जो देश के संवेदनशील सैन्य ठिकानों की निगरानी कर रहा था।
जांच एजेंसियों का मानना है कि इस तरह के सोलर पावर्ड कैमरों का इस्तेमाल इसलिए किया गया क्योंकि इन्हें बिजली की जरूरत नहीं होती और ये लंबे समय तक बिना किसी रुकावट के काम कर सकते हैं। इन्हें खुले स्थानों पर आसानी से लगाया जा सकता है और दूर से नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे इन्हें पकड़ना बेहद मुश्किल हो जाता है।
इस पूरे मामले ने भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को एक नई चुनौती के सामने खड़ा कर दिया है। अब जासूसी केवल पारंपरिक तरीकों तक सीमित नहीं रही, बल्कि तकनीक आधारित उपकरणों के जरिए भी संवेदनशील जानकारी चुराने की कोशिशें की जा रही हैं। यह एक ऐसा खतरा है जो दिखाई नहीं देता, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।
इस घटना के बाद अंबाला और आसपास के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है। एयरफोर्स स्टेशन के आसपास गश्त बढ़ा दी गई है और हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां लगातार इलाके की निगरानी कर रही हैं ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी कोशिश को तुरंत रोका जा सके।
फिलहाल गिरफ्तार किए गए छह आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और क्या देश के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह के जासूसी उपकरण लगाए गए हैं। इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि यह पूरा नेटवर्क कितना बड़ा है और इसकी जड़ें कहां तक फैली हुई हैं।
यह घटना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि देश की सुरक्षा के सामने अब नए प्रकार के खतरे खड़े हो रहे हैं, जिनसे निपटने के लिए आधुनिक तकनीक और मजबूत निगरानी व्यवस्था की जरूरत है। सीमा पार जासूसी के साथ-साथ अब तकनीक आधारित जासूसी भी एक गंभीर चुनौती बन चुकी है।
कुल मिलाकर, अंबाला की यह घटना न केवल एक जासूसी साजिश का खुलासा है, बल्कि यह भी दिखाती है कि भारतीय सुरक्षा बलों की सतर्कता के कारण बड़े खतरे समय रहते टल सकते हैं। हालांकि, यह मामला भविष्य के लिए एक चेतावनी भी है कि सुरक्षा व्यवस्था को लगातार और मजबूत करने की आवश्यकता है ताकि ऐसी किसी भी साजिश को शुरुआत में ही खत्म किया जा सके।
स्वर्णिम टाईम्स : Swarnim Times आपका अपना इंटरनेट अख़बार !