हरियाणा के नारनौल में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक अहम और चौंकाने वाली कार्रवाई सामने आई है। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने एक ऐसे मामले का खुलासा किया है, जिसमें बैंक खाता अनफ्रीज कराने के नाम पर आम नागरिक से रिश्वत मांगी जा रही थी। इस पूरे घटनाक्रम में ACB ने जाल बिछाकर दो आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ लिया और उनके पास से 10 हजार रुपये की रिश्वत राशि बरामद की गई। इस मामले में अब एक साइबर क्राइम अधिकारी की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है, जिससे यह मामला और गंभीर हो गया है।

मिली जानकारी के अनुसार, इस केस की शुरुआत महेंद्रगढ़ जिले के सतनाली क्षेत्र के रहने वाले नीरज की शिकायत से हुई। नीरज का बैंक खाता किसी तकनीकी या कानूनी कारण से फ्रीज हो गया था, जिसके चलते वह अपने पैसे का इस्तेमाल नहीं कर पा रहा था। इसी परेशानी के बीच उसके पास एक फोन कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर स्थित साइबर क्राइम शाखा से जुड़ा बताया।
फोन पर बात करने वाले व्यक्ति ने नीरज को भरोसा दिलाया कि उसका बैंक खाता जल्द ही अनफ्रीज कराया जा सकता है, लेकिन इसके बदले उसे 10 हजार रुपये देने होंगे। इस मांग ने नीरज को असहज कर दिया। उसे समझ आ गया कि यह मामला रिश्वतखोरी से जुड़ा हो सकता है। उसने तुरंत इस बारे में एंटी करप्शन ब्यूरो को सूचित किया और पूरी घटना की जानकारी साझा की।
शिकायत मिलते ही ACB टीम हरकत में आ गई। अधिकारियों ने इस मामले की गंभीरता को समझते हुए एक ट्रैप प्लान तैयार किया। नीरज को निर्देश दिए गए कि वह आरोपियों से संपर्क बनाए रखे और उन्हें पैसे देने के लिए एक स्थान तय करे। योजना के अनुसार, आरोपियों को नारनौल के महावीर चौक पर बुलाया गया।
निर्धारित समय और स्थान पर जब नीरज पहुंचा, तो आरोपियों में से एक युवक वहां आया और पैसे लेने के लिए तैयार हो गया। जैसे ही नीरज ने उसे 10 हजार रुपये दिए, पहले से छिपकर बैठी ACB टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे मौके पर ही पकड़ लिया। गिरफ्तार किए गए युवक की पहचान गौरव के रूप में हुई।
ACB टीम ने मौके पर ही गौरव की तलाशी ली, जिसमें उसके पास से 500-500 रुपये के 20 नोट बरामद हुए। यह वही रकम थी, जो रिश्वत के तौर पर ली गई थी। इस पूरी कार्रवाई के दौरान ड्यूटी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी भी सुनिश्चित की गई थी, जिससे प्रक्रिया पूरी तरह कानूनी और पारदर्शी बनी रहे।
गौरव से पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आईं। उसने बताया कि वह अकेले काम नहीं कर रहा था, बल्कि यह एक सुनियोजित योजना का हिस्सा था। उसके बयान के आधार पर ACB टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दूसरे आरोपी जितेंद्र को भी गिरफ्तार कर लिया।
जांच में यह भी सामने आया कि जितेंद्र का संबंध उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर स्थित साइबर क्राइम शाखा से है। वह वहां तैनात जांच अधिकारी (IO) सत्येंद्र का भाई बताया जा रहा है। आरोप है कि इस पूरे मामले में उसी अधिकारी की भूमिका हो सकती है और उसके कहने पर ही रिश्वत की मांग की गई थी।
इस खुलासे के बाद मामला और भी पेचीदा हो गया है। अब ACB की टीम इस एंगल से भी जांच कर रही है कि क्या साइबर क्राइम शाखा का कोई अधिकारी इस पूरे रैकेट में शामिल है। यदि ऐसा साबित होता है, तो यह एक बड़े स्तर का भ्रष्टाचार मामला बन सकता है।
ACB अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में हर पहलू की गहराई से जांच की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या इसी तरह और लोगों से भी पैसे वसूले गए हैं। अगर जांच में ऐसे और मामले सामने आते हैं, तो इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना एक बार फिर यह दर्शाती है कि कुछ लोग किस तरह सरकारी प्रक्रियाओं का गलत फायदा उठाकर आम जनता को ठगने की कोशिश करते हैं। बैंक खाता फ्रीज होना किसी भी व्यक्ति के लिए गंभीर समस्या होती है, और इसी स्थिति का फायदा उठाकर आरोपी लोगों से अवैध वसूली करते हैं।
हालांकि, इस मामले में नीरज की समझदारी और जागरूकता काबिल-ए-तारीफ है। उसने बिना डरे इस पूरे मामले की शिकायत की, जिसके कारण यह रैकेट सामने आ सका। उसकी इस पहल से न केवल दोषियों को पकड़ने में मदद मिली, बल्कि अन्य लोगों को भी सतर्क रहने का संदेश मिला है।
फिलहाल, दोनों गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और ACB टीम इस मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच में जुटी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी खुलासे हो सकते हैं।
कुल मिलाकर, नारनौल में हुई यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सख्त कदम के रूप में देखी जा रही है। यह दर्शाता है कि यदि आम नागरिक जागरूक रहें और गलत के खिलाफ आवाज उठाएं, तो ऐसे मामलों में प्रभावी कार्रवाई संभव है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में आगे क्या सामने आता है और दोषियों को किस तरह की सजा मिलती है।
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