देहरादून: रक्षक ही जब भक्षक बन जाए, तो मासूम बचपन किस तरह कुचला जाता है, इसकी एक दिल दहला देने वाली बानगी देहरादून की विशेष अदालत में देखने को मिली। पिता और पुत्री के पवित्र रिश्ते को तार-तार करते हुए, एक वायुसेना कर्मी (Air Force Personnel) ने अपनी ही बेटी को अपनी हवस का शिकार बनाया। 12 साल तक चले इस शोषण के अंत में कानून ने अपना काम किया और दोषी पिता को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।

यहाँ इस पूरे मामले का विस्तृत विवरण दिया गया है:
1. अदालत का फैसला और सख्त टिप्पणी
देहरादून की विशेष न्यायाधीश अर्चना सागर की अदालत ने इस मामले को समाज के लिए एक ‘कलंक’ और ‘विकृत कामुकता’ (Perverted Sexuality) का उदाहरण बताया।
सजा: दोषी पिता को 20 वर्ष का कठोर कारावास।
जुर्माना: 25,000 रुपये का आर्थिक दंड।
मुआवजा: राज्य सरकार को आदेश दिया गया है कि पीड़िता को तीन लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए, ताकि वह अपने जीवन को पटरी पर ला सके।
कोर्ट की टिप्पणी: अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे कृत्य न केवल बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए घातक हैं, बल्कि यह उस भरोसे का भी खून है जो एक बच्चा अपने पिता पर करता है।
2. 12 साल का नरक: 5 साल की उम्र से शुरू हुई दरिंदगी
पीड़िता ने अदालत के सामने जो बयान दिए, वे रूह कंपा देने वाले थे। दरिंदगी का यह सिलसिला तब शुरू हुआ जब बच्ची महज 5 साल की थी और उसे दुनिया की समझ भी नहीं थी। यह शोषण 17 साल की उम्र तक लगातार चलता रहा।
पोस्टिंग के दौरान शोषण: आरोपी वायुसेना में था, इसलिए उसकी पोस्टिंग अलग-अलग शहरों में होती थी। उसने मथुरा, गुजरात और फिर देहरादून में अपनी पोस्टिंग के दौरान बेटी के साथ कई बार दुष्कर्म किया।
डिजिटल उत्पीड़न: दरिंदे की मानसिकता इतनी विकृत थी कि जब वह ड्यूटी पर घर से दूर होता था, तब भी वह बेटी को नहीं बख्शता था। वह वीडियो कॉल करके उसे कपड़े उतारने पर मजबूर करता था और मना करने पर बुरी तरह पीटने की धमकी देता था।
3. गुड़िया तोड़कर बनाई दहशत: मनोवैज्ञानिक दबाव
इस केस में सबसे दर्दनाक पहलू वह तरीका था जिससे पिता ने बेटी को चुप कराया।
5 साल की उम्र में बच्ची को अपनी गुड़िया बहुत प्यारी थी। पिता ने उसे डराने के लिए उस गुड़िया को छीना और उसके हाथ-पैर तोड़ दिए।
उसने धमकी दी कि, “अगर किसी को कुछ बताया, तो तेरा हाल भी इस गुड़िया जैसा करूँगा।”
इस एक घटना ने बच्ची के मन में इतना गहरा डर बैठा दिया कि वह अगले 12 सालों तक घुट-घुट कर जीती रही।
4. बेबसी की दास्तां: बीमार भाइयों की खातिर खामोशी
अक्सर सवाल उठता है कि माँ और बेटी इतने सालों तक चुप क्यों रहीं? इसके पीछे एक मजबूरी छिपी थी।
दो बीमार भाई: पीड़िता के दो छोटे भाई हैं। उनमें से एक ‘स्पेशल चाइल्ड’ (डाउन सिंड्रोम) है और दूसरा ‘ब्लड कैंसर’ जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रहा है।
आर्थिक निर्भरता: इन दोनों बीमार बच्चों का महंगा इलाज और घर का पूरा खर्च पिता की नौकरी पर निर्भर था। माँ को डर था कि अगर पिता जेल गया, तो बेटों का इलाज रुक जाएगा। इसी ममता और मजबूरी का फायदा उठाकर आरोपी दरिंदगी करता रहा।
अंततः 17 नवंबर 2023 को सब्र का बांध टूट गया और बेटी ने माँ को सारी सच्चाई बता दी, जिसके बाद रायपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई।
5. बचाव पक्ष की दलील और कोर्ट का करारा जवाब
सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देकर उसे बचाने की कोशिश की।
दलील: बचाव पक्ष ने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट में पीड़िता के शरीर पर चोट के निशान नहीं हैं और हाइमन सुरक्षित (Intact) है, इसलिए रेप नहीं हुआ।
कोर्ट का फैसला: अदालत ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मेडिकल साक्ष्य ही एकमात्र सबूत नहीं होते। कोई भी बेटी अपने सगे पिता पर इतना घिनौना और झूठा आरोप नहीं लगाएगी। जैसे-जैसे वह बड़ी हुई, उसे अपने साथ हो रहे अन्याय का अहसास हुआ और उसकी गवाही पूरी तरह विश्वसनीय है।
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