वाराणसी के कैंट थाना क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के एक कर्मचारी और उसकी पत्नी पर भरोसे में लेकर करीब दो करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का गंभीर आरोप लगा है। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामला वर्ष 2022 से जुड़ा है, लेकिन अब इसके तथ्यों के सामने आने के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।

कैंट थाना क्षेत्र के अर्दली बाजार निवासी शिवांगी बरनवाल ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि उनके पिता घनश्याम बरनवाल भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा से सेवानिवृत्त कर्मचारी थे। पिता के निधन के बाद परिवार के विभिन्न बैंक खातों में ग्रेच्युटी, पेंशन, फिक्स्ड डिपॉजिट और अन्य मदों में लगभग दो करोड़ रुपये जमा थे। परिवार आर्थिक रूप से सुरक्षित था, लेकिन इसी स्थिति का कथित रूप से आरोपियों ने फायदा उठाया।
पीड़िता के अनुसार, एसबीआई की मुख्य शाखा में कार्यरत शक्ति शुक्ला और उनकी पत्नी पूजा शुक्ला बैंक कर्मचारी होने के कारण उनके घर आने-जाने लगे। शुरुआत में व्यवहार बेहद मित्रवत था, जिससे धीरे-धीरे पारिवारिक संबंध जैसे बन गए। इसी भरोसे का लाभ उठाकर आरोपियों ने पीड़िता की मां को यह कहकर डराया कि यदि इतनी बड़ी रकम बैंक खातों में रखी गई तो आयकर विभाग कार्रवाई कर सकता है और जेल तक जाना पड़ सकता है।
डर और भ्रम के माहौल में आरोपियों ने धन को “सुरक्षित” रखने का भरोसा दिलाया। पीड़िता का आरोप है कि इसी बहाने उनकी मां से हस्ताक्षरित चेक, मोबाइल फोन और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी अपने कब्जे में ले ली गई। इसके बाद योनो एप के जरिए ओटीपी मंगवाकर अलग-अलग बैंक खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर कर ली गई। परिवार को इसकी भनक तक नहीं लगी।
साल 2022 में पीड़िता की मां का भी निधन हो गया। इसके बाद जब शिवांगी बरनवाल ने खातों और पैसों की जानकारी जुटानी शुरू की तो उन्हें गड़बड़ी का शक हुआ। आरोप है कि जब उन्होंने आरोपियों पर दबाव बनाया तो मामला और उलझता चला गया। पीड़िता का कहना है कि बाद में आरोपियों ने एक नोटरी एग्रीमेंट के जरिए यह स्वीकार किया कि उन्होंने एक करोड़ रुपये लिए हैं और उसे लौटाने के लिए 50-50 लाख रुपये के दो चेक दिए।
हालांकि, जब ये चेक बैंक में जमा किए गए तो दोनों ही बाउंस हो गए। इसके बाद पीड़िता ने न्यायालय का रुख किया, जहां मामला फिलहाल विचाराधीन है। न्यायालयी प्रक्रिया के साथ-साथ अब पुलिस में भी मामला दर्ज हो गया है, जिससे जांच का दायरा और व्यापक हो गया है।
कैंट थाना प्रभारी शिवाकांत मिश्रा ने बताया कि पीड़िता की तहरीर के आधार पर शक्ति शुक्ला, पूजा शुक्ला और अनिल सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। सभी आरोपों की गंभीरता से जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि बैंकिंग लेन-देन, खातों की डिटेल और डिजिटल ट्रांजैक्शन की भी जांच की जा रही है।
इस पूरे मामले ने बैंकिंग सिस्टम में भरोसे और ग्राहकों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आमतौर पर लोग बैंक कर्मचारियों पर आंख मूंदकर भरोसा करते हैं, लेकिन इस घटना ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि सतर्कता कितनी जरूरी है, खासकर जब बात बड़ी धनराशि की हो।
उधर, वाराणसी के मंडुवाडीह थाना क्षेत्र से चोरी की एक अलग घटना भी सामने आई है। शिव नगर कॉलोनी, चांदपुर में रविवार देर रात चोरों ने राजकुमार सोनकर के घर को निशाना बनाया। चोर बैटरी, इनवर्टर, फ्रिज का स्टेबलाइजर, सीसीटीवी कैमरे की डीवीआर समेत कई घरेलू सामान लेकर फरार हो गए।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। मंडुवाडीह थाना प्रभारी अजय राज वर्मा ने बताया कि आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, जिससे चोरों की पहचान की जा सके। स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर दहशत का माहौल है और उन्होंने रात में गश्त बढ़ाने की मांग की है।
कुल मिलाकर, वाराणसी में एक ओर जहां करोड़ों की कथित बैंक धोखाधड़ी ने लोगों को झकझोर दिया है, वहीं दूसरी ओर चोरी की घटनाएं सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठा रही हैं। पुलिस दोनों ही मामलों में जांच का भरोसा दिला रही है, लेकिन आम लोगों की नजरें अब कार्रवाई और न्याय पर टिकी हैं।
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