चौंकाने वाले आंकड़े राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की सड़कों की एक कड़वी सच्चाई बयां करते हैं। यहां हर दिन औसतन 96 वाहन चोरी हो रहे हैं। इसका मतलब यह है कि लगभग हर 15 मिनट में एक वाहन चोरों का शिकार बन रहा है। भले ही बीते वर्षों की तुलना में चोरी की घटनाओं में कुछ कमी आई हो, लेकिन कुल आंकड़ा अब भी चिंता बढ़ाने वाला है।

दिल्ली पुलिस के ताजा आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में राजधानी में कुल 35,014 वाहन चोरी के मामले दर्ज किए गए। इनमें सबसे ज्यादा संख्या दोपहिया वाहनों की रही। आंकड़ों पर नजर डालें तो 2025 में चोरी हुए कुल वाहनों में करीब 80.89 प्रतिशत दोपहिया वाहन थे, जबकि चारपहिया वाहनों की हिस्सेदारी 12.88 प्रतिशत रही। शेष 6.2 प्रतिशत में ट्रक समेत अन्य भारी और हल्के वाहन शामिल हैं।
दिल्ली के विशेष पुलिस आयुक्त देवेश चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि वर्ष 2025 में चोरी हुए 35,014 वाहनों में से 28,326 दोपहिया और 4,511 चारपहिया वाहन थे। इसके अलावा अन्य श्रेणी के 2,177 वाहन चोरी हुए, जिनमें ट्रक और व्यावसायिक वाहन भी शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, ट्रकों की चोरी भी एक गंभीर समस्या के रूप में सामने आई है।
हालांकि, पुलिस के आंकड़े यह भी दर्शाते हैं कि वाहन चोरी के मामलों में साल-दर-साल गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2023 में जहां 40,045 मामले दर्ज हुए थे, वहीं 2024 में यह संख्या 39,976 रही। 2025 में मामलों की संख्या घटकर 35,014 पर आ गई। इसके बावजूद, राजधानी में वाहन चोरी की रफ्तार अब भी तेज बनी हुई है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वाहन चोरी दिल्ली में होने वाले कुल अपराधों का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा है। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, लगातार सख्ती, तकनीकी निगरानी और सक्रिय पुलिसिंग के चलते मामलों में कमी आई है, लेकिन समस्या की गंभीरता अब भी बनी हुई है। खास बात यह भी है कि देशभर में दर्ज होने वाले वाहन चोरी के 56 प्रतिशत से अधिक मामले एनसीआर क्षेत्र से जुड़े होते हैं।
आंकड़ों से यह भी स्पष्ट होता है कि अन्य संपत्ति संबंधी अपराधों की तुलना में वाहन चोरी अब भी सबसे बड़ा सिरदर्द है। वर्ष 2025 में दिल्ली में सेंधमारी के 6,617 मामले, घरों से चोरी के 16,246 मामले और वाहन चोरी के 35,014 मामले दर्ज किए गए।
वाहन चोरी पर लगाम लगाने के लिए दिल्ली पुलिस कई स्तरों पर प्रयास कर रही है। ई-एफआईआर की सुविधा, एएनपीआर (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) कैमरों की तैनाती और एंटी-ऑटो थेफ्ट स्क्वॉड (एएटीएस) के जरिए तकनीक आधारित कार्रवाई की जा रही है। इसके साथ ही संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ाई गई है और अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोहों के खिलाफ सख्त अभियान चलाए जा रहे हैं। चोरी के मामलों में भारतीय न्याय संहिता के तहत कठोर कार्रवाई भी की जा रही है।
पुलिस का दावा है कि इन उपायों से आने वाले समय में वाहन चोरी के मामलों में और कमी लाई जाएगी। हालांकि, मौजूदा आंकड़े यह साफ संकेत देते हैं कि राजधानी में वाहन चोरी अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, जिस पर लगातार सतर्कता और सख्त कदम उठाने की जरूरत है।
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