मेरठ से सामने आई एक अनोखी घटना ने समाज को एक नई सोच दी है। यहां एक पिता ने अपनी बेटी के तलाक को दुख की बजाय खुशी के रूप में मनाया। ढोल-नगाड़ों के साथ बेटी का स्वागत कर उन्होंने यह संदेश दिया कि तलाक असफलता नहीं, बल्कि गलत रिश्ते से बाहर निकलने की हिम्मत है।

रिटायर्ड जज ज्ञानेंद्र शर्मा ने अपनी बेटी प्रणिता शर्मा के तलाक के बाद उसका स्वागत किसी त्योहार की तरह किया। अदालत से जैसे ही तलाक की मंजूरी मिली, परिवार के लोग वहां पहुंचे और बेटी को अपने साथ नाचते-गाते घर लेकर आए। पूरे रास्ते जश्न का माहौल बना रहा।
इस दौरान परिवार के सभी सदस्य एक जैसे कपड़े पहने हुए थे, जिन पर “I Love My Daughter” लिखा था। यह नजारा देखने वालों के लिए हैरान करने वाला था, लेकिन साथ ही यह एक मजबूत संदेश भी दे रहा था कि बेटी की खुशी सबसे अहम है।
प्रणिता की शादी साल 2018 में हुई थी, लेकिन शादी के बाद उनका जीवन आसान नहीं रहा। उन्हें लगातार मानसिक और शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। एक बच्चे के जन्म के बाद भी हालात नहीं सुधरे।
काफी समय तक सहने के बाद उन्होंने अपने जीवन को नई दिशा देने का फैसला किया और तलाक के लिए अदालत का रुख किया। 4 अप्रैल 2026 को कोर्ट ने उनके तलाक को मंजूरी दे दी, जो उनके लिए एक नई शुरुआत का संकेत था।
इस मौके पर उनके पिता ने कहा कि उन्होंने अपनी बेटी को हमेशा मजबूत बनना सिखाया है। अगर वह किसी गलत स्थिति में है, तो उसे वहां रहने के लिए मजबूर करना गलत होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी तरह का समझौता या मुआवजा नहीं लिया, क्योंकि उनके लिए सबसे जरूरी उनकी बेटी की खुशी है।
प्रणिता ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना चाहिए। अगर वे किसी भी प्रकार की प्रताड़ना का सामना कर रही हैं, तो उन्हें आवाज उठानी चाहिए।
मेरठ की यह घटना समाज के लिए एक उदाहरण बन गई है। यह दिखाती है कि परिवार का साथ हो तो मुश्किल फैसले भी आसान हो जाते हैं। यह सिर्फ एक तलाक की कहानी नहीं, बल्कि एक नई सोच और बदलाव की शुरुआत है।
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