विमोचन समारोह के मुख्य वक्ता थे युवा साहित्यकार डॉ अनिल ठाकुर एवं डॉ संजीव शमा
डॉ संजीव शमा/ झंझारपुर
आरएस स्थित चिकित्सक डॉ डी चौधरी के निवास परिसर में आयोजित पुस्तक विमोचन समारोह में मैथिली निबंध संग्रह चेतनाक स्वर पुस्तक का भव्य लोकार्पण किया गया । इस अवसर पर कार्यक्रम के संयोजक चिकित्सक डॉ दिनेश चौधरी द्वारा कार्यक्रम में पधारे अतिथियों का पाग, दोपटा एवं पुष्प माल से स्वागत किया गया । पुस्तक विमोचन समारोह की अध्यक्षता करते हुए मैथिली साहित्य के मूर्धन्य विद्वान सेवानिवृत्त प्राध्यापक डॉ खुशीलाल झा ने कहा कि लेखिका डॉ गौरी चौधरी द्वारा लिखी गई पुस्तक चेतनाक स्वर मैथिली निबंध संग्रह एक पुष्प नहीं पुष्प गुच्छ है । विमोचन समारोह के मुख्य वक्ता सह समीक्षक डॉ अनिल ठाकुर ने पुस्तक में वर्णित सभी पाठों के संदर्भ में बिंदुवार समीक्षा करते हुए कहा कि पुस्तक में भारतीय संस्कृति में नारी को संदर्भित करते हुए विभिन्न आयामों को स्थान दिया गया है । पुस्तक की अवधारणा के संबंध में कहा कि पुस्तक में दो धारा को बिम्बित किया गया है ।

एक तरफ जहां वैदिक काल के साहित्य संस्कृति को रखा गया है । वहीं दूसरी ओर लोक गाथा विमर्श को रखा गया है ।उन्होंने मिथिलाक्षर के ऊपर लिखे गए निबंध के संदर्भ में कहा कि इस लेख में मिथिलाक्षर के वर्तमान और भविष्य की ओर लेखिका ने इशारा करते हुए हर एक मैथिल को जागने की आवश्यकता को बताया है ।वहीं समारोह के दूसरे मुख्य वक्ता युवा साहित्यकार डॉ संजीव शमा ने कहा कि लेखिका डॉ गौरी चौधरी ने नारी शक्ति विमर्श के साथ लोक गाथा पर विमर्श करने वाले मैथिली लेखक डॉ बुचरु पासवान एवं डॉ महेंद्र नारायण राम सरीखे लोक विमर्श करने वाले साहित्यकार को अपने पुस्तक में जगह देकर एक नये आयाम को स्थापित करने में सफल हुई है । उन्होंने पुस्तक में शामिल सभी ग्यारह निबंध के संबंध में कहा कि सभी निबंध अपने आप में काफी प्रासंगिक है ।

युवा साहित्यकार डॉ शमा ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं के छात्रों के लिए यह पुस्तक काफी उपयोगी सिद्ध होगा । विमोचन समारोह में मैथिली के वरेण्य साहित्यकार द्वय डॉ बुचरु पासवान एवं डॉ महेंद्र नारायण राम लेखिका के प्रति उदगार व्यक्त करते हुए शुभकामनाएं दी । पुस्तक की लेखिका डॉ गौरी चौधरी विमोचन समारोह में उपस्थित सभी अतिथियों एवं साहित्य प्रेमियों के प्रति आभार प्रकट की । अपने प्राध्यापक पिता स्व.सूर्य नारायण चौधरी को समर्पित अपनी पहली पुस्तक के प्रकाशन से अभिभूत लेखिका डॉ चौधरी ने कहा कि आज बाबूजी के मनोरथ को पूर्ण कर पायी हूँ । यह कहते हुए लेखिका कुछ देर के लिए भावुक हो गईं । कार्यक्रम का संचालन सहित्यांगन के मलयनाथ मंडन व धन्यवाद ज्ञापन लेखिका के पति ख्यातिलब्ध चिकित्सक डॉ डी चौधरी ने की । इस अवसर पर अजय नारायण चौधरी, ईशनाथ झा, केशव किशोर मिश्र, शेखर झा, साहित्यकार सारस्वत, कृष्णानंद झा, संतोष झा, विनय कुमार, नुनु मिश्र आदि दर्जनों साहित्य प्रेमी उपस्थित थे ।
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