भारत अब ऊर्जा और कृषि—दोनों मोर्चों पर अपनी ताकत को क्षेत्रीय स्तर पर विस्तार देने की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रहा है। इसी कड़ी में इथेनॉल निर्यात को लेकर नई रणनीति तैयार की जा रही है, जिसके तहत पड़ोसी देशों, खासकर नेपाल के साथ बातचीत शुरू हो चुकी है। यह पहल न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगी, बल्कि किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी बड़े अवसर पैदा कर सकती है।

ग्रेन्स इथेनॉल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (JEMA) के अध्यक्ष सीके जैन के अनुसार, फिलहाल भारत में प्रथम पीढ़ी (1G) इथेनॉल के निर्यात पर प्रतिबंध है। यह इथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। हालांकि, बदलते वैश्विक परिदृश्य और पड़ोसी देशों की बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार इस नीति में बदलाव पर विचार कर सकती है। यदि ऐसा होता है, तो यह भारत के लिए एक बड़ा आर्थिक अवसर साबित हो सकता है।
भारत पहले ही अपने घरेलू स्तर पर इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम में उल्लेखनीय प्रगति कर चुका है। वर्तमान में देश E20 (20% इथेनॉल मिश्रण) के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है। इस पहल से भारत को हर साल करीब 40,000 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हो रही है, क्योंकि इससे पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत E85 (85% मिश्रण) और E100 (100% इथेनॉल) जैसे उच्च स्तरों तक पहुंचता है, तो यह बचत बढ़कर 1 लाख करोड़ रुपये तक हो सकती है।
इसी संदर्भ में, नेपाल के साथ चल रही बातचीत बेहद अहम मानी जा रही है। हाल ही में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने नेपाल का दौरा किया, जहां वहां के अधिकारियों को 10% इथेनॉल मिश्रण (E10) अपनाने का सुझाव दिया गया। यदि यह योजना लागू होती है, तो भारत नेपाल को इथेनॉल की आपूर्ति कर सकता है, जिससे दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग और मजबूत होगा।
इस पहल का एक बड़ा फायदा भारतीय किसानों को मिलेगा। इथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ना, मक्का और अन्य फसलों की मांग बढ़ेगी, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होगी। साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में नए उद्योग और रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। यह कदम सरकार के “आत्मनिर्भर भारत” और “ग्रामीण विकास” के लक्ष्यों को भी मजबूती देगा।
ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए भारत फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक पर भी जोर दे रहा है। फ्लेक्स-फ्यूल इंजन ऐसे इंजन होते हैं जो पेट्रोल और इथेनॉल के विभिन्न मिश्रणों पर चल सकते हैं। SIAM और सरकार के बीच इस तकनीक को बढ़ावा देने के लिए लगातार बातचीत चल रही है। अनुमान है कि अगले 2-3 वर्षों में भारत की सड़कों पर फ्लेक्स-फ्यूल वाहन आम हो सकते हैं।
हालांकि, उपभोक्ताओं के बीच अभी भी माइलेज को लेकर कुछ भ्रम बना हुआ है। कई लोगों को लगता है कि इथेनॉल मिश्रित ईंधन से गाड़ियों का माइलेज कम हो जाता है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह आंशिक रूप से सही है, जबकि इसके बदले मिलने वाले फायदे कहीं अधिक बड़े हैं। इथेनॉल से प्रदूषण कम होता है, यह नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है और इससे देश की विदेशी मुद्रा बचती है।
इसी बीच, भारत और नेपाल के बीच कूटनीतिक संबंध भी लगातार मजबूत हो रहे हैं। भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने हाल ही में नेपाल के निवर्तमान राजदूत शंकर प्रसाद शर्मा से मुलाकात की। यह बैठक नई दिल्ली में हुई, जिसमें दोनों देशों के बीच रणनीतिक और बहुआयामी साझेदारी की समीक्षा की गई।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस मुलाकात के दौरान भारत और नेपाल के लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया गया। विक्रम मिसरी ने कहा कि भारत नेपाल के साथ अपने संबंधों को और गहरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने डॉ. शर्मा के कार्यकाल (2022-2024) के दौरान दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में उनके योगदान की सराहना की।
शंकर प्रसाद शर्मा एक अनुभवी अर्थशास्त्री हैं और उन्होंने पहले अमेरिका में भी नेपाल के राजदूत के रूप में कार्य किया है। उनकी कूटनीतिक समझ और अनुभव ने भारत-नेपाल संबंधों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
भारत और नेपाल के बीच इथेनॉल सहयोग केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और क्षेत्रीय विकास का एक मॉडल भी बन सकता है। दक्षिण एशिया के अन्य देश भी इस पहल से प्रेरणा ले सकते हैं और भारत के साथ इसी तरह के समझौते कर सकते हैं।
आने वाले समय में, यदि भारत इथेनॉल निर्यात की अनुमति देता है, तो यह देश के ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव साबित होगा। इससे भारत न केवल अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि क्षेत्रीय ऊर्जा आपूर्ति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेगा।
कुल मिलाकर, इथेनॉल निर्यात की यह पहल भारत के लिए एक “विन-विन” स्थिति पैदा करती है—जहां एक तरफ किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लाभ मिलेगा, वहीं दूसरी तरफ देश की ऊर्जा सुरक्षा और विदेशी मुद्रा भंडार भी मजबूत होगा। नेपाल के साथ शुरू हुई यह बातचीत भविष्य में पूरे दक्षिण एशिया के लिए एक नई दिशा तय कर सकती है।
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