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बिहार :: दरभंगा के एमजीएसएस में विज्ञान कला एवं हस्तशिल्प प्रदर्शनी का हुआ भव्य आयोजन

दरभंगा (विजय सिन्हा) : महात्मा गाँधी शिक्षण संस्थान, लहेरियासराय, दरभंगा में विज्ञान,कला एवं हस्तशिल्प प्रदर्शनी का भव्य आयोजन किया गया। 

कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय की प्राचार्य डॉ प्रभा मल्लिक ने की। आगत अतिथियों का स्वागत मिथिला परंपरा अनुसार माला, पाग, चादर एवं स्मृति चिन्ह से विद्यालय के निदेशक हीरा कुमार झा ने किया। अपने स्वागत उद्बोधन में बोलते हुए विद्यालय के निदेशक ने कहा कि विज्ञान केवल विकास ही नहीं बल्कि हमारे जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने में भी सहायक होता है। कला के सहयोग से हम अपने जीवन को सरल बनाते हैं। बच्चों को हमेशा कुछ नया करने की सोच विकसित करने की प्रेरणा दी, जिससे कि वह राष्ट्र का धरोहर बन सके।

कार्यक्रम का उद्घाटन अतिथियों के द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।
बतौर मुख्य अतिथि एम एल एस एम कॉलेज, दरभंगा के प्राचार्य डॉ( प्रोफेसर) विद्या नाथ झा ने कहा कि जगने से उठने तक विज्ञान हमारे साथ होता है। विज्ञान दो तरह की खोज करती है। आकस्मिक खोज और जरूरत आधारित खोज। अचानक खोज में किसी नई चीज का अचानक आविष्कार होता है और जरूरत आधारित खोज में नई-नई खोज होती रहती है। जीवन में दिक्कतों को दूर करना और जरूरतों को पूरा करना विज्ञान कहलाता है। उन्होंने लोटस इफेक्ट पर विस्तार से चर्चा करते हुए बच्चों को हीरा और उन्हें तराशने वाले को शिक्षक कहा।

विशिष्ट अतिथि के रूप में संस्कृत विश्वविद्यालय, दरभंगा के कला विभाग के प्राध्यापक डॉ (प्रो) बीरेंद्र नारायण सिंह ने कहा कि कला और भावना में बहुत बड़ा लगाव होता है। बच्चों के द्वारा किया गया खुद का मेहनत रंग लाता है। फिल्म की तरह चित्र में भी मुख्य पात्र होते हैं। जिसे बखूबी उजागर करना चाहिए। बच्चों के द्वारा प्रस्तुत ‘ग्रामीण जीवन का चित्र’ सहित अनेक चित्रों से मुग्ध होकर उन्होंने बच्चों की भूरि-भूरि प्रशंसा की।

विशिष्ट अतिथि के रूप में राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस, दरभंगा के जिला समन्वयक राम बुझावन यादव ‘रमाकर’ ने अपने संबोधन में कहा कि छोटे-छोटे मॉडलों के द्वारा किया गया विज्ञान का प्रदर्शन वास्तविक रूप से सराहनीय है। यह बच्चों की सृजनात्मकता को दिखाता है। कला और संस्कृति समाज में समरसता के लिए आवश्यक होता है। विकासशील से विकसित भारत बनाने के लिए विज्ञान और तकनीकी ही मूल तत्व होते हैं। उन्होंने कहा कि छात्र ही कल के पिता हैं। हमारे भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए आज का आयोजन बहुत ही जरूरी है।

बतौर विशिष्ट अतिथि नागेंद्र झा महिला कॉलेज, लहेरियासराय की भूगोल की प्राध्यापक डॉ (प्रो) ममता रानी ने कहा कि अकादमिक विकास की तुलना में मानव का आत्म चेतना (सांस्कृतिक विकास) अधिक महत्वपूर्ण होता है। इसलिए हमें ऐसे आयोजनों में दिलचस्पी से भाग लेना चाहिए।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्राचार्य डॉ प्रभा मल्लिक ने कहा कि ऐसे आयोजन से बच्चों को अपनी क्षमता प्रदर्शन का अवसर मिलता है, जिससे उनमें रचनात्मक विचारों की वृद्धि होती है।किसी भी मुद्दा का वर्णन करने से भाषा की प्रवीणता बढ़ती है। इस तरह का आयोजन हर एक विद्यालय में बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक होता है।

इस अवसर पर विद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा विज्ञान, कला एवं हस्तशिल्प प्रदर्शनी लगाया गया, जिसमें विभिन्न प्रकार के मॉडल, पेंटिंग, एंब्रायडरी एवं एक्सपेरिमेंट प्रदर्शित किए गए।
निर्णायक मंडल के द्वारा चयनित छात्र-छात्राओं को उत्तम प्रदर्शन के लिए अतिथियों के द्वारा पुरस्कृत किया गया।

कार्यक्रम की रूपरेखा सी सी ए प्रभारी बैद्यनाथ झा और वरीय शिक्षक राज किशोर झा के द्वारा तैयार की गई । इसमें विद्यालय के शिक्षक आमिर खान, मणि भूषण, पी के चौधरी, बी के झा, प्रेम कुमार ,वरुण कुमार सहित सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं ने बढ़ चढ़कर सहयोग किया।

इस कार्यक्रम में बच्चों द्वारा प्रस्तुत की गई सांस्कृतिक कार्यक्रम ने आगत अतिथियों एवं अभिभावकों का मन मोह लिया। कार्यक्रम का संचालन विद्यालय की वरीय शिक्षिका अपर्णा झा ने किया, जबकि वरीय शिक्षक आर के झा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ समापन किया गया।

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