उत्तर प्रदेश में किसानों से जुड़ा एक अहम मुद्दा तेजी से गंभीर रूप लेता जा रहा है। राज्य के लाखों किसान अब तक “फार्मर रजिस्ट्री” प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए हैं, जिसके कारण उनके सामने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं बेचने और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में बड़ा संकट खड़ा हो गया है। यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है, जब रबी सीजन में गेहूं की खरीद प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में लगभग 82 लाख किसानों ने अभी तक फार्मर रजिस्ट्री नहीं कराई है। जबकि राज्य में कुल करीब 2.88 करोड़ किसानों का पंजीकरण होना है। इनमें से अब तक लगभग 2.06 करोड़ किसानों की ही रजिस्ट्री हो सकी है, जो कुल लक्ष्य का लगभग 80 प्रतिशत है। इसका सीधा मतलब यह है कि करीब 20 प्रतिशत किसान अभी भी इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया से बाहर हैं और यही वर्ग अब सबसे अधिक प्रभावित होने वाला है।
सरकार ने फार्मर आईडी को अनिवार्य बनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अब बिना पंजीकरण के किसान न तो एमएसपी पर अपनी फसल बेच पाएंगे और न ही उन्हें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, पशुपालन, मत्स्य पालन और अन्य कृषि योजनाओं का लाभ मिलेगा। इस निर्णय का उद्देश्य जहां एक ओर पारदर्शिता बढ़ाना है, वहीं दूसरी ओर यह सुनिश्चित करना भी है कि योजनाओं का लाभ सही पात्र किसानों तक पहुंचे।
राजधानी लखनऊ का उदाहरण इस समस्या को और स्पष्ट करता है। यहां हजारों किसान अब भी रजिस्ट्री से वंचित हैं। जिले में कुल किसानों की संख्या के मुकाबले बड़ी संख्या ने अब तक पंजीकरण नहीं कराया है। इससे यह संकेत मिलता है कि जागरूकता और सुविधा दोनों स्तरों पर अभी काफी काम किए जाने की जरूरत है।
हालांकि, राज्य के कुछ जिलों ने इस दिशा में बेहतर प्रदर्शन किया है। रामपुर जिला इस मामले में सबसे आगे है, जहां लगभग सभी किसानों ने रजिस्ट्री पूरी कर ली है। इसके अलावा मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, एटा और कासगंज जैसे जिलों में भी उच्च प्रतिशत के साथ रजिस्ट्री का काम पूरा हुआ है। वहीं, सुल्तानपुर, कानपुर देहात, देवरिया, गोरखपुर और कौशांबी जैसे जिले अभी भी पीछे चल रहे हैं, जहां बड़ी संख्या में किसान इस प्रक्रिया से बाहर हैं।
फार्मर रजिस्ट्री को लेकर सरकार की मंशा साफ है कि भविष्य में सभी योजनाओं का लाभ इसी आधार पर दिया जाएगा। इसमें उर्वरक, बीज, कीटनाशक वितरण से लेकर सब्सिडी और फसल खरीद तक सब कुछ शामिल है। यानी फार्मर आईडी अब किसान की पहचान का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज बन चुकी है।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, यह कदम किसानों का एक सटीक डिजिटल डाटाबेस तैयार करने की दिशा में उठाया गया है। इससे यह पता चल सकेगा कि किस किसान के पास कितनी जमीन है, वह कौन-कौन सी फसल उगाता है और उसे किस प्रकार की सहायता की जरूरत है। इससे योजनाओं को अधिक प्रभावी तरीके से लागू किया जा सकेगा।
लेकिन जमीनी स्तर पर कई समस्याएं सामने आ रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता की कमी, इंटरनेट की सीमित उपलब्धता और दस्तावेजों की दिक्कतें किसानों के लिए बड़ी बाधा बन रही हैं। कई किसान ऐसे हैं जिन्हें यह जानकारी ही नहीं है कि रजिस्ट्री न कराने के क्या नुकसान हो सकते हैं।
इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया है। 15 अप्रैल तक चलने वाले इस अभियान के तहत कृषि विभाग के कर्मचारी और अन्य अधिकारी गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक कर रहे हैं और उनकी रजिस्ट्री कराने में मदद कर रहे हैं। इसका उद्देश्य है कि अधिक से अधिक किसानों को इस प्रक्रिया से जोड़ा जा सके।
रजिस्ट्री की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए सरकार ने कई विकल्प भी दिए हैं। किसान अपने आधार कार्ड, खतौनी और आधार से जुड़े मोबाइल नंबर के साथ जन सेवा केंद्र पर जाकर रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। इसके अलावा वे ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से भी खुद पंजीकरण कर सकते हैं। हालांकि, इसके लिए उन्हें अपने खेतों और जमीन से संबंधित सभी विवरण सही तरीके से दर्ज करने होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि फार्मर रजिस्ट्री योजना भविष्य में किसानों के लिए काफी लाभकारी साबित हो सकती है। इससे न केवल योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचेगा, बल्कि कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता भी बढ़ेगी। इसके अलावा सरकार को नीतियां बनाने में भी मदद मिलेगी।
फिर भी, यह जरूरी है कि इस योजना को लागू करते समय किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज न किया जाए। अगर किसी किसान के पास जरूरी दस्तावेज नहीं हैं या वह तकनीकी प्रक्रिया को समझने में असमर्थ है, तो उसे उचित सहायता प्रदान की जानी चाहिए।
वर्तमान समय में सबसे बड़ी चिंता यह है कि गेहूं खरीद का सीजन चल रहा है और लाखों किसान अभी भी रजिस्ट्री से बाहर हैं। अगर उन्होंने समय रहते पंजीकरण नहीं कराया, तो उन्हें एमएसपी का लाभ नहीं मिलेगा और उन्हें अपनी फसल कम कीमत पर बेचनी पड़ेगी। इससे उनकी आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ सकता है।
अंत में यह कहा जा सकता है कि फार्मर रजिस्ट्री योजना एक महत्वपूर्ण और दूरगामी कदम है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसे कितनी प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है। सरकार को चाहिए कि वह इस प्रक्रिया को और सरल बनाए और किसानों तक इसकी जानकारी पहुंचाने के लिए अधिक प्रयास करे।
किसानों के लिए यह समय बेहद अहम है। उन्हें जल्द से जल्द अपनी रजिस्ट्री पूरी करनी चाहिए, ताकि वे न केवल अपनी फसल का उचित मूल्य पा सकें, बल्कि सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ भी उठा सकें। अन्यथा, आने वाले समय में उन्हें कई आर्थिक और प्रशासनिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
स्वर्णिम टाईम्स : Swarnim Times आपका अपना इंटरनेट अख़बार !