एक दशक के लंबे अंतराल के बाद अरब देशों की लीग (लीग ऑफ अरब स्टेट्स—LAS) की अहम बैठक आज आयोजित हो रही है, जिसमें गाजा पट्टी के पुनर्निर्माण और क्षेत्रीय शांति पर व्यापक मंथन होगा। भारत में हो रही इस बैठक में मध्य-पूर्व और अरब जगत के 22 देशों के विदेश मंत्री हिस्सा ले रहे हैं। मौजूदा वैश्विक हालात—अमेरिका-ईरान के बीच तनाव, गाजा में संघर्ष-विराम के प्रयास और मुस्लिम देशों को एकजुट करने की पाकिस्तान की कोशिशों—के बीच यह सम्मेलन निर्णायक माना जा रहा है।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, बैठक में बहरीन में 2016 में हुई पिछली बैठक के फैसलों की समीक्षा की जाएगी। इसके साथ ही सदस्य देशों के बीच अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, संस्कृति, शिक्षा और मीडिया जैसे अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए एक साझा रोडमैप तैयार किया जाएगा। गाजा के पुनर्निर्माण के अलावा यमन, सूडान और लीबिया में जारी क्षेत्रीय संघर्षों पर भी गंभीर चर्चा होगी, ताकि स्थायी समाधान की दिशा में ठोस पहल की जा सके।
इस बैठक की एक बड़ी विशेषता लीबिया की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के विदेश मंत्री एल्ताहेर की भागीदारी है। मुअम्मर गद्दाफी के शासन के पतन के बाद यह पहला अवसर है, जब लीबिया सरकार का कोई मंत्री विदेश यात्रा पर है। इससे लीबिया संकट के समाधान को लेकर नई उम्मीदें जगी हैं।
कूटनीतिक नजरिए से यह सम्मेलन इसलिए भी अहम है क्योंकि यह पाकिस्तान की उस रणनीति के बीच हो रहा है, जिसके तहत वह मुस्लिम देशों को अपनी अगुवाई में एक मंच पर लाने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान पूर्वी लीबिया में प्रभाव रखने वाले खलीफा हफ्तार को जेएफ-17 लड़ाकू विमान बेचने की संभावनाएं भी तलाश रहा है। ऐसे में गाजा में शांति प्रयासों पर अमेरिका की ‘बोर्ड ऑफ पीस’ पहल और अरब लीग का सामूहिक रुख वैश्विक राजनीति में नई दिशा तय कर सकता है।
भारत के लिए यह सम्मेलन रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। लीग ऑफ अरब स्टेट्स के 22 सदस्य देशों के साथ भारत का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 240 अरब डॉलर का है। भारत के प्रमुख व्यापारिक मार्ग—स्वेज नहर, लाल सागर और अदन की खाड़ी—इन्हीं देशों से होकर गुजरते हैं। ऐसे में क्षेत्रीय स्थिरता भारत की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक हितों के लिए बेहद जरूरी है।
सम्मेलन से पहले अधिकारी स्तर की वार्ता भी हुई, जिसमें सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने आपसी समन्वय पर चर्चा की। शुक्रवार को अरब लीग के महासचिव अहमद अबुल घीत ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की, वहीं अधिकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी संवाद किया। इन बैठकों ने सम्मेलन के एजेंडे को और मजबूती दी है।
कुल मिलाकर, भारत में हो रही अरब लीग की यह बैठक केवल गाजा के पुनर्निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मध्य-पूर्व में शांति, सहयोग और विकास के लिए एक व्यापक रणनीति तय करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
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