करनाल में नकली सोने की आड़ में ज्वेलरी शोरूम को ठगने वाले एक शातिर गिरोह का खुलासा हुआ है। पुलिस ने इस मामले में पिता और बेटी को गिरफ्तार किया है, जबकि गिरोह के अन्य सदस्य अभी फरार हैं। इस पूरे मामले ने ज्वेलरी कारोबारियों के बीच चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि आरोपी बेहद चालाकी से नकली सोने को असली बताकर लाखों की ठगी को अंजाम दे रहे थे।

डीएसपी राजीव कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि इस गिरोह में कुल 8 लोगों की संलिप्तता सामने आई है। इनमें से 2 आरोपियों को पुलिस ने पकड़ लिया है, जबकि बाकी 6 की तलाश के लिए लगातार दबिश दी जा रही है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बहादुरगढ़ निवासी सर्वपाल सिंह और उसकी बेटी खुशी अरोड़ा के रूप में हुई है।
पुलिस के मुताबिक, सर्वपाल सिंह एक कुख्यात अपराधी है, जिसके खिलाफ पहले से ही लगभग 50 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इन मामलों में हत्या, धोखाधड़ी, जालसाजी और चोरी जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। उसकी आपराधिक पृष्ठभूमि को देखते हुए पुलिस इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रही है।
गिरफ्तारी के बाद सर्वपाल सिंह को चार दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया, जहां उससे गहन पूछताछ की गई। रिमांड खत्म होने के बाद उसे कोर्ट में पेश किया गया और न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। वहीं उसकी बेटी खुशी अरोड़ा को पहले ही अदालत से जमानत मिल चुकी है।
इस मामले की शुरुआत 7 अप्रैल को हुई, जब एक ज्वेलरी शोरूम के प्रतिनिधि यतिन गोयल ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि कुछ लोग बार-बार उनके शोरूम में आकर सोने के आभूषण बेच रहे थे और बदले में असली सोना या नकद रकम लेकर जा रहे थे। शुरुआत में किसी को इस पर शक नहीं हुआ, लेकिन बाद में मामला संदिग्ध लगने लगा।
शोरूम में खरीदे गए सोने की जब जांच की गई और उसे पिघलाया गया, तब सच्चाई सामने आई। आभूषणों के ऊपर तो सोने की परत चढ़ी हुई थी, लेकिन अंदर सस्ती धातु भरी हुई थी। यही कारण था कि शुरुआती जांच में मशीनें भी इस नकली सोने को पकड़ नहीं पाईं।
डीएसपी राजीव कुमार ने बताया कि आरोपी बेहद शातिर तरीके से ठगी को अंजाम देते थे। वे 12 ग्राम की नकली अंगूठी देकर बदले में करीब 8 ग्राम असली सोना या ज्वेलरी ले लेते थे और साथ ही करीब 4 ग्राम की कीमत नकद में भी हासिल कर लेते थे। इस तरह वे एक ही सौदे में दोहरा फायदा उठाते थे।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने इसी तरीके से चार से पांच बार शोरूम को निशाना बनाया। कुल मिलाकर उन्होंने करीब 66 ग्राम सोने की धोखाधड़ी की। हालांकि पुलिस ने इस मामले में बड़ी सफलता हासिल करते हुए 56 ग्राम सोना बरामद कर लिया है।
बाकी 10 ग्राम सोने को लेकर यह जानकारी सामने आई है कि उसकी रकम आरोपी द्वारा शोरूम मालिक के खाते में ट्रांसफर की गई थी, लेकिन इसकी पुष्टि अभी जांच के बाद ही हो पाएगी। पुलिस इस पहलू को भी गंभीरता से खंगाल रही है।
इस पूरे मामले में अभी कई सवालों के जवाब मिलना बाकी हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस गिरोह ने अन्य ज्वेलर्स को भी इसी तरह ठगा है या नहीं। फिलहाल इस बारे में कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन संभावना जताई जा रही है कि यह गिरोह लंबे समय से इस तरह की वारदातों को अंजाम दे रहा था।
जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि गिरोह के सभी सदस्य आपस में पारिवारिक रूप से जुड़े हुए हैं। इससे यह साफ होता है कि यह कोई सामान्य अपराध नहीं, बल्कि एक संगठित और योजनाबद्ध ठगी का नेटवर्क है।
डीएसपी राजीव कुमार ने कहा कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। पुलिस की टीमें लगातार अलग-अलग जगहों पर दबिश दे रही हैं और जल्द ही सभी आरोपियों को पकड़ने का दावा किया जा रहा है।
इस घटना ने ज्वेलरी व्यापारियों को सतर्क रहने की जरूरत पर जोर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि सोने की खरीद-फरोख्त के दौरान सिर्फ मशीनों पर भरोसा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अन्य जांच प्रक्रियाओं को भी अपनाना जरूरी है।
फिलहाल पुलिस इस मामले की गहन जांच में जुटी हुई है और फरार आरोपियों की तलाश जारी है। यह मामला इस बात का उदाहरण है कि अपराधी किस तरह नई-नई तकनीकों का इस्तेमाल कर लोगों को ठगने के तरीके ढूंढ रहे हैं। ऐसे में सतर्कता ही इस तरह की धोखाधड़ी से बचने का सबसे बड़ा उपाय है।
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