हरियाणा में लंबे समय से एक ऐसी समस्या बनी हुई थी, जो आम लोगों के लिए खतरे का कारण बन रही थी—स्कूलों, कॉलेजों और अस्पतालों के ऊपर से गुजरती हाईटेंशन बिजली लाइनें। ये लाइनें न केवल डर का कारण थीं, बल्कि कई बार हादसों की वजह भी बनती रही हैं। अब इस समस्या के समाधान के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।

ऊर्जा मंत्री Anil Vij ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रदेश में जहां-जहां भी इस प्रकार की खतरनाक बिजली लाइनें सार्वजनिक संस्थानों के ऊपर से गुजर रही हैं, उन्हें चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा। इस योजना को केवल घोषणा तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे जमीन पर उतारने के लिए ठोस व्यवस्था भी बनाई गई है।
सरकार ने इस पूरे अभियान को मॉनिटर करने के लिए एक विशेष सैल का गठन किया है। इस सैल की जिम्मेदारी होगी कि वह हर एक प्रोजेक्ट की बारीकी से निगरानी करे और समय-समय पर रिपोर्ट तैयार करे। खास बात यह है कि हर 15 दिन में इस कार्य की प्रगति सीधे ऊर्जा मंत्री कार्यालय तक पहुंचाई जाएगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि काम में कोई ढिलाई न हो और हर स्तर पर जवाबदेही बनी रहे।
अगर इस अभियान की मौजूदा स्थिति पर नजर डालें, तो काफी हद तक काम पूरा भी हो चुका है। उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड ने 33 केवी बिजली लाइनों के लिए 27 स्थान चिन्हित किए थे। इनमें से 21 लाइनों को पहले ही शिफ्ट किया जा चुका है। शेष 6 लाइनों पर तेजी से काम जारी है और उम्मीद है कि इन्हें भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा।
इसी तरह 11 केवी की लाइनों के मामले में भी अच्छी प्रगति देखने को मिली है। कुल 1299 स्थानों की पहचान की गई थी, जहां से बिजली लाइनों को हटाया जाना था। इनमें से 1116 स्थानों पर काम पूरा हो चुका है, जबकि बाकी स्थानों पर काम अंतिम चरण में है।
यह आंकड़े इस बात का संकेत देते हैं कि सरकार केवल योजना बना ही नहीं रही, बल्कि उसे तेजी से लागू भी कर रही है। यह कदम खासतौर पर उन जगहों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां बच्चों और मरीजों की संख्या अधिक होती है। स्कूलों और अस्पतालों के ऊपर से गुजरती बिजली लाइनें हमेशा जोखिम भरी होती हैं, और ऐसे में उनका हटाया जाना एक बड़ी राहत है।
ऊर्जा मंत्री Anil Vij ने बिजली आपूर्ति को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने अधिकारियों को साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि शहरी क्षेत्रों में 2 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 4 घंटे से अधिक बिजली कटौती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि कोई अधिकारी इस नियम का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें निलंबन भी शामिल हो सकता है।
इस फैसले का एक और महत्वपूर्ण पहलू है—मेंटेनेंस व्यवस्था में सुधार। अक्सर देखा जाता है कि ट्रांसफार्मर खराब होने या तकनीकी गड़बड़ी आने पर उसे ठीक करने में काफी समय लग जाता है। इसे ध्यान में रखते हुए मंत्री ने निर्देश दिए हैं कि सभी मेंटेनेंस टीमों के पास जरूरी उपकरण और सुरक्षा साधन उपलब्ध होने चाहिए। साथ ही ट्रांसफार्मर ट्रॉली भी उपलब्ध कराई जाए, ताकि खराब ट्रांसफार्मर को तुरंत बदला जा सके।
भविष्य की योजनाओं को लेकर भी सरकार सतर्क नजर आ रही है। नए बिजली सब-स्टेशनों के निर्माण के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। यह तय किया गया है कि इन्हें ऐसे स्थानों पर बनाया जाए, जहां जलभराव की समस्या न हो। अगर किसी कारणवश ऐसी जगह पर निर्माण करना जरूरी हो, तो सब-स्टेशन को जमीन से कम से कम 2 फुट ऊंचाई पर बनाया जाए।
इसके साथ ही, किसी भी निर्माण से पहले संबंधित विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि निर्माण कार्य में कोई बाधा न आए और सभी नियमों का पालन हो।
इस पूरे अभियान को केवल एक तकनीकी सुधार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह एक ऐसा कदम है, जो सीधे तौर पर आम लोगों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। खासकर बच्चों और मरीजों के लिए यह फैसला काफी राहत देने वाला है।
हरियाणा सरकार का यह प्रयास यह भी दिखाता है कि अब विकास के साथ-साथ सुरक्षा को भी बराबर महत्व दिया जा रहा है। केवल बिजली पहुंचाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे सुरक्षित तरीके से उपलब्ध कराना भी उतना ही जरूरी है।
आने वाले समय में जब यह पूरा अभियान समाप्त होगा, तो हरियाणा के स्कूल, अस्पताल और अन्य सार्वजनिक संस्थान न केवल बेहतर सुविधाओं से लैस होंगे, बल्कि वहां का वातावरण भी ज्यादा सुरक्षित होगा। यह पहल राज्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
कुल मिलाकर, यह फैसला हरियाणा के लिए एक सकारात्मक बदलाव की शुरुआत है, जो आने वाले समय में राज्य की छवि को और बेहतर बनाने में मदद करेगा।
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