हरियाणा में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। नूंह और रेवाड़ी के अस्पतालों में पानी की टंकियों में गंदगी और जानवर मिलने के मामलों के बाद भी प्रशासन पूरी तरह सतर्क नहीं हुआ है। अब ताजा मामला फरीदाबाद के बादशाह खान सिविल अस्पताल से सामने आया है, जहां अस्पताल की छत पर रखी पानी की टंकियों की स्थिति बेहद चिंताजनक पाई गई।

जानकारी के अनुसार, अस्पताल की मुख्य इमारत की छत पर करीब 10 से 12 पानी की टंकियां लगी हुई हैं, जिनसे पूरे अस्पताल में पानी की सप्लाई होती है। लेकिन निरीक्षण के दौरान पाया गया कि इनमें से कई टंकियां बिना ढक्कन के खुली पड़ी हैं, जबकि 4 से 5 टंकियों के ढक्कन पूरी तरह से गायब हैं। इतना ही नहीं, एक टंकी का पानी बहकर छत पर फैल गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि रखरखाव में गंभीर लापरवाही बरती जा रही है।
अस्पताल में इस्तेमाल होने वाला यही पानी वार्डों, ऑपरेशन थिएटर, साफ-सफाई और अन्य जरूरी कार्यों में उपयोग होता है। ऐसे में अगर पानी दूषित हो, तो यह सीधे मरीजों की सेहत के लिए खतरा बन सकता है। खुले ढक्कनों के कारण टंकियों में धूल, मिट्टी, कीड़े-मकोड़े और यहां तक कि छोटे जानवर भी प्रवेश कर सकते हैं, जिससे संक्रमण फैलने की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।
सूत्रों की मानें तो इन टंकियों की काफी समय से नियमित सफाई नहीं की गई है। टंकियों में गंदगी जमा होने की आशंका जताई जा रही है, जिससे पानी की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर इस तरह की अनदेखी को बेहद खतरनाक माना जा रहा है, क्योंकि यहां आने वाले मरीज पहले से ही बीमार और कमजोर होते हैं।
गौरतलब है कि हाल ही में हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती राव ने राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को साफ-सफाई के सख्त निर्देश दिए थे। उन्होंने विशेष रूप से पानी की टंकियों की सफाई सुनिश्चित करने के आदेश जारी किए थे, ताकि किसी भी प्रकार के संक्रमण को रोका जा सके। इसके बावजूद फरीदाबाद के इस प्रमुख अस्पताल में इन निर्देशों का पालन नहीं किया गया।
इस मामले के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों में काफी नाराजगी है। उनका कहना है कि अस्पताल प्रशासन की यह लापरवाही सीधे-सीधे मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और तुरंत सुधारात्मक कदम उठाए जाएं।
वहीं, इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने कहा कि मामले की जानकारी मिलने के बाद तुरंत संज्ञान लिया गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि एक सप्ताह के भीतर सभी पानी की टंकियों की सफाई करवा दी जाएगी। साथ ही जिन टंकियों के ढक्कन नहीं हैं, उन्हें भी जल्द ही लगवाया जाएगा।
हालांकि यह सवाल अब भी बना हुआ है कि जब पहले ही अन्य जिलों में इस तरह की घटनाएं सामने आ चुकी थीं, तो फरीदाबाद में समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई। क्या निरीक्षण में कमी रही या जिम्मेदार अधिकारियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया—यह जांच का विषय है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों में स्वच्छ पानी की उपलब्धता अत्यंत आवश्यक होती है। दूषित पानी से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, जिससे मरीजों की हालत और बिगड़ सकती है। ऐसे में पानी की टंकियों की नियमित सफाई, ढक्कन की उचित व्यवस्था और समय-समय पर निरीक्षण बेहद जरूरी है।
यह घटना यह भी दर्शाती है कि केवल आदेश जारी करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके पालन की निगरानी भी उतनी ही जरूरी है। यदि प्रशासन इस तरह की लापरवाही पर सख्त रुख नहीं अपनाता, तो भविष्य में इससे भी बड़े हादसे हो सकते हैं।
फिलहाल इस मामले के उजागर होने के बाद उम्मीद की जा रही है कि प्रशासन हरकत में आएगा और अस्पताल की व्यवस्थाओं में जल्द सुधार किया जाएगा। लेकिन जब तक जमीनी स्तर पर बदलाव नहीं होता, तब तक मरीजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहना स्वाभाविक है।
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