हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया है। प्रेम नगर क्षेत्र में रहने वाले एक दंपती ने अपनी तीन साल की बेटी के साथ कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, पहले बच्ची को फंदे से लटकाया गया और उसके बाद पति-पत्नी ने भी अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। यह घटना न केवल परिवार के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए एक गहरी चिंता और सवाल छोड़ गई है।

घटना उस समय सामने आई जब पड़ोस में रहने वाले एक रिश्तेदार के मोबाइल फोन पर मृतक युवक जितेंद्र की ओर से भेजा गया एक संदेश प्राप्त हुआ। संदेश पढ़ने के बाद परिजन तुरंत उसके घर पहुंचे, लेकिन दरवाजा अंदर से बंद था और कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल रही थी। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने दरवाजा तोड़कर घर के अंदर प्रवेश किया, जहां का दृश्य बेहद दर्दनाक था।
घर के पहले मंजिल पर बने कमरे में तीनों के शव फंदे से लटके हुए पाए गए। मृतकों की पहचान 32 वर्षीय जितेंद्र, उसकी 30 वर्षीय पत्नी युक्ता और उनकी तीन वर्षीय बेटी माधवी के रूप में हुई। पुलिस ने तुरंत तीनों शवों को नीचे उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और पूरे घर को सील कर जांच शुरू कर दी।
इस घटना की सूचना मिलते ही इलाके में सनसनी फैल गई। आसपास के लोग बड़ी संख्या में घटनास्थल पर एकत्र हो गए। हर कोई इस बात से हैरान था कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि एक परिवार ने इतना बड़ा कदम उठा लिया। पुलिस अधिकारियों ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए भीड़ को वहां से हटाया और फॉरेंसिक टीम को जांच के लिए बुलाया गया।
प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि मृतक दंपती की तीन वर्षीय बेटी गंभीर रूप से बीमार थी और उसे पैरालिसिस की समस्या थी। परिवार लंबे समय से उसकी देखभाल और इलाज को लेकर मानसिक और आर्थिक दबाव में था। बताया जा रहा है कि इसी तनाव के चलते दंपती मानसिक रूप से टूट चुका था। हालांकि पुलिस ने अभी इस पहलू को पूरी तरह से पुष्टि नहीं की है और हर एंगल से जांच की जा रही है।
जितेंद्र की नौकरी अंबाला के पोस्ट ऑफिस में थी, जबकि उसकी पत्नी युक्ता गृहिणी थी। परिवार मूल रूप से करनाल जिले के सीकरी गांव का रहने वाला है, लेकिन पिछले लगभग 15 वर्षों से वह कुरुक्षेत्र के प्रेम नगर में रह रहा था। स्थानीय लोगों के अनुसार, परिवार ज्यादा सामाजिक रूप से घुला-मिला नहीं था और काफी शांत स्वभाव का माना जाता था।
जितेंद्र के पारिवारिक बैकग्राउंड की बात करें तो उसके पिता महेंद्र सिंह पंजाब पुलिस में थाना प्रभारी रह चुके थे, जिनका कुछ साल पहले निधन हो गया था। परिवार में एक और बड़ा भाई भी है, जो लंबे समय से कनाडा में रह रहा है। इस घटना के बाद पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
पुलिस को मौके से कुछ इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और मोबाइल फोन भी मिले हैं, जिनकी जांच की जा रही है। मृतक द्वारा भेजा गया अंतिम संदेश भी पुलिस जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि यह कदम अचानक उठाया गया या इसके पीछे कोई लंबी मानसिक प्रक्रिया थी।
कृष्ण गेट थाना प्रभारी बलजीत सिंह और डीएसपी सुनील कुमार ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल इसे आत्महत्या का मामला माना जा रहा है, लेकिन सभी पहलुओं की गहराई से जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी।
इस घटना ने समाज में मानसिक स्वास्थ्य, तनाव और पारिवारिक दबाव जैसे मुद्दों पर गंभीर बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक बीमारी, आर्थिक दबाव और मानसिक तनाव किसी भी व्यक्ति को बेहद कठिन स्थिति में ले जा सकते हैं, लेकिन ऐसे में सहायता लेना और संवाद बनाए रखना बेहद जरूरी होता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि परिवार अपनी बच्ची की बीमारी को लेकर लंबे समय से चिंतित था। इलाज और देखभाल के बावजूद बच्ची की हालत में ज्यादा सुधार नहीं हो रहा था, जिससे परिवार पर मानसिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा था। हालांकि यह केवल शुरुआती जानकारी है और पुलिस इसकी पुष्टि कर रही है।
घटना के बाद इलाके में शोक और सन्नाटा पसरा हुआ है। लोग इस बात पर विश्वास नहीं कर पा रहे कि एक छोटा सा परिवार अचानक इस तरह खत्म हो सकता है। पड़ोसी और परिचित इस घटना से बेहद दुखी हैं और परिवार को याद कर भावुक हो रहे हैं।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और जांच पूरी होने का इंतजार करें। साथ ही यह भी कहा गया है कि मानसिक तनाव से जूझ रहे लोगों को समय पर काउंसलिंग और सहायता लेनी चाहिए ताकि ऐसे दुखद कदमों को रोका जा सके।
फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले को गहराई से खंगाल रही है। हर संभावित कारण की जांच की जा रही है, जिसमें मानसिक तनाव, बीमारी का दबाव और अन्य व्यक्तिगत परिस्थितियां शामिल हैं। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इस दर्दनाक घटना के पीछे वास्तविक कारण क्या थे।
यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज करना कितना खतरनाक हो सकता है। समाज और परिवारों को मिलकर ऐसे हालात में एक-दूसरे का सहारा बनना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की त्रासदी को रोका जा सके।
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