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एक घर, सैकड़ों वोटर: एसआईआर में उजागर हुई चौंकाने वाली गड़बड़ी

उत्तर प्रदेश में चल रहे एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) अभियान के दौरान मतदाता सूची में गंभीर खामियों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला शामली जिले के कांधला कस्बे का है, जहां एक छोटे से मकान में 600 से अधिक मतदाताओं का पंजीकरण दिखाया गया है। हैरानी की बात यह है कि इस एक ही पते पर अलग-अलग परिवारों, पड़ोसियों और यहां तक कि अलग समुदायों के लोगों को भी एक साथ निवासरत दर्शा दिया गया है। इस खुलासे के बाद प्रशासनिक व्यवस्था और मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

कांधला कस्बे के मोहल्ला खैल में स्थित यह मकान ई-रिक्शा चालक नौशाद का है। मकान संख्या 8/8/75 में नौशाद अपने परिवार के साथ रहते हैं। एसआईआर के बाद जब मतदाता सूची की जांच की गई, तो सामने आया कि इसी पते पर करीब 600 से ज्यादा वोटरों के नाम दर्ज हैं, जबकि वास्तविकता में इस घर में केवल 19 लोग ही रहते हैं। यह मामला तब उजागर हुआ जब कांग्रेस के जिला कोऑर्डिनेटर ज्ञानेंद्र सिंह राघव के नेतृत्व में मीडिया प्रभारी सन्नी और अन्य कार्यकर्ताओं ने मतदाता सूची की पड़ताल की।

जांच में सामने आया कि नौशाद का मकान करीब 150 गज में बना है और इसमें कुल चार कमरे हैं। इस घर में नौशाद के पिता इसराइल, भाई शहजाद, मुरसलीन, परिवार की महिलाएं रेशमा, नाजमा, मुशर्रत सहित कुल 19 सदस्य रहते हैं। इसके बावजूद मतदाता सूची में इस पते पर सैकड़ों नाम दर्ज पाए गए। सूची में नियाजुद्दीन, साफिया, हबीब, साजिदा जैसे नाम तो हैं ही, साथ ही धनश्याम, राधेश्याम जैसे दूसरे समुदाय के लोगों को भी इसी मकान में निवासरत दिखाया गया है।

नौशाद का कहना है कि उन्हें इस गड़बड़ी की जानकारी हाल ही में मिली। उन्होंने बताया, “हमें नहीं पता कि हमारे घर के पते पर इतने लोगों के नाम कैसे जुड़ गए। इससे हमें काफी परेशानी हो रही है। आए दिन बीएलओ और अन्य अधिकारी पूछताछ के लिए आते हैं। हम जल्द ही जिलाधिकारी से मिलकर लिखित शिकायत करेंगे।” नौशाद का कहना है कि इस गलती की वजह से उन्हें और उनके परिवार को मानसिक तनाव झेलना पड़ रहा है।

इस गड़बड़ी का असर केवल नौशाद के परिवार तक ही सीमित नहीं है। मोहल्ला खैल के कई अन्य निवासी भी इससे परेशान हैं। मोहल्ले में रहने वाले याकूब की पत्नी शहनाज ने बताया कि उनका मकान नंबर भी गलत तरीके से 8/8/75 दर्ज कर दिया गया है। इसी तरह दिलशाद की पत्नी इसराना का कहना है कि गलत मकान नंबर के कारण उन्हें बार-बार बीएलओ और अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। उनका कहना है कि सही जानकारी देने के बावजूद सूची में सुधार नहीं हो पा रहा है।

कांधला क्षेत्र में यह अकेला मामला नहीं है। गंगेरु गांव में मतदाता सूची में और भी चौंकाने वाली खामियां सामने आई हैं। यहां कई मतदाताओं के मकान नंबर की जगह मोबाइल नंबर दर्ज कर दिए गए हैं। गांव निवासी हारिस ने बताया कि उनका मकान नंबर 473 है, लेकिन एसआईआर के बाद मतदाता सूची में मकान नंबर की जगह उनका मोबाइल नंबर दर्ज हो गया। इसी तरह इमरान और मनीष के पते में भी यही गलती पाई गई है। इन लोगों का कहना है कि वे लगातार अधिकारियों से संपर्क कर रहे हैं, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।

मतदाता सूची में गड़बड़ियों की हद यहीं तक नहीं है। कांधला देहात की नई बस्ती में मकान संख्या “00” पर एक साथ 145 वोटरों का निवास दिखाया गया है। वहीं रामनगर मजरा में मकान संख्या “0” पर 70 मतदाता दर्ज हैं। शामली शहर में भी लगभग 120 वोटरों को “00” नंबर के मकान में निवासरत दर्शाया गया है। इन सभी मामलों में एक ही पते पर अलग-अलग परिवारों के साथ-साथ हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगों को भी एक साथ रहना बताया गया है। कांधला में मकान संख्या “00” पर फैमिदा, नूरजहां के साथ-साथ राधेश्याम जैसे नाम भी सूची में दर्ज पाए गए हैं।

इस पूरे मामले पर जिलाधिकारी अरविंद कुमार चौहान ने कहा कि मतदाता सूची में सामने आ रही सभी खामियों को गंभीरता से लिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वोटर लिस्ट को दुरुस्त कराने के लिए बीएलओ और विशेष टीमों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रशासन का प्रयास है कि सभी त्रुटियों को जल्द से जल्द ठीक किया जाए, ताकि मतदाता सूची पारदर्शी और त्रुटिरहित बन सके।

इससे पहले भी कांधला शहर के दयानंद नगर इलाके में इसी तरह की गड़बड़ी सामने आ चुकी है। दयानंद नगर में पूर्व सभासद राजीव मलिक के मकान संख्या 232 में मतदाता सूची में 89 मतदाता दर्ज पाए गए थे, जबकि वास्तविक रूप से इस मकान में केवल 14 लोग रहते हैं। इस मामले को अमर उजाला ने 16 जनवरी के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। खबर सामने आने के बाद संबंधित अधिकारियों ने वहां भी मतदाता सूची को ठीक करने की प्रक्रिया शुरू की थी।

बीएलओ का कहना है कि मोहल्ला खैल के मकान संख्या 8/8/75 पर पुराने समय से ही बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम दर्ज होते चले आ रहे थे और उसी आधार पर सूची को आगे बढ़ा दिया गया। फिलहाल अन्य लोगों के सही मकान नंबर उपलब्ध नहीं हो सके हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सामने आई खामियों को दूर कर मतदाता सूची को सही किया जाएगा।

एसआईआर के दौरान सामने आ रहे ये मामले यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि मतदाता सूची जैसी संवेदनशील व्यवस्था में इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हो गई। एक ही घर में सैकड़ों वोटरों का दर्ज होना न सिर्फ प्रशासनिक चूक को दर्शाता है, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करता है। अब देखना यह है कि प्रशासन इन गड़बड़ियों को कितनी तेजी और पारदर्शिता से सुधार पाता है।

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