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India–China Trade: भारत-चीन रिश्तों में नई गर्माहट, द्विपक्षीय व्यापार 155.6 अरब डॉलर के स्तर पर

भारत की वैश्विक व्यापारिक स्थिति लगातार मजबूत हो रही है और हालिया घटनाक्रम इस बात का स्पष्ट संकेत दे रहे हैं। एक ओर भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से लंबित व्यापार समझौते पर सहमति बन चुकी है, वहीं दूसरी ओर यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। अब इसी कड़ी में भारत और चीन के बीच व्यापारिक संबंधों को लेकर भी एक सकारात्मक तस्वीर सामने आई है।

भारत और चीन के बीच रिश्तों में धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिल रहे हैं, जिसका असर सीधे द्विपक्षीय व्यापार पर दिखाई दे रहा है। दोनों देशों के बीच व्यापार का आंकड़ा बढ़कर 155.6 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो आर्थिक सहयोग की मजबूती को दर्शाता है। यह जानकारी नई दिल्ली में आयोजित चीनी नववर्ष समारोह के दौरान सामने आई।

मंगलवार को राजधानी दिल्ली में चीनी नववर्ष के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में भारत में चीन के राजदूत जू फेइहोंग ने भारत–चीन व्यापार को लेकर अहम जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों में निरंतर वृद्धि हो रही है और आपसी सहयोग के नए अवसर सामने आ रहे हैं। यह संकेत करता है कि आर्थिक मोर्चे पर दोनों देश व्यावहारिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

इससे पहले भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। दोनों देशों ने लंबे समय से अटके व्यापार समझौते पर सहमति बना ली है। इसके साथ ही पारस्परिक टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। इस फैसले को भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में एक नए युग की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है, जिससे दोनों देशों के उद्योगों और निवेशकों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।

वहीं 27 जनवरी को भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस समझौते के बाद भारतीय उत्पादों को यूरोपीय बाजारों में बेहतर पहुंच मिलने की संभावना है, जबकि यूरोप की कंपनियों के लिए भारत में निवेश और व्यापार के रास्ते और आसान होंगे।

इन तमाम घटनाक्रमों के बीच चीन के साथ व्यापार में बढ़ोतरी भारत की बहुस्तरीय व्यापार नीति को दर्शाती है। भारत एक ओर पश्चिमी देशों के साथ आर्थिक साझेदारी मजबूत कर रहा है, तो दूसरी ओर एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के साथ भी संतुलित संबंध बनाए रखने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और चीन के बीच बढ़ता व्यापार दोनों देशों की आर्थिक जरूरतों और व्यावसायिक वास्तविकताओं को दर्शाता है। भले ही राजनीतिक और रणनीतिक मुद्दों पर मतभेद रहे हों, लेकिन व्यापारिक स्तर पर सहयोग जारी रहना क्षेत्रीय और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अहम माना जा रहा है।

कुल मिलाकर, भारत के लिए यह दौर वैश्विक व्यापार में अपनी भूमिका को और मजबूत करने का है। अमेरिका, यूरोपीय संघ और चीन जैसे बड़े आर्थिक साझेदारों के साथ एक साथ व्यापारिक प्रगति भारत को आने वाले वर्षों में एक प्रमुख वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित करने में मदद कर सकती है।

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