दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने महंगी और लग्जरी गाड़ियों की चोरी से जुड़े एक बड़े अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए इसके मुख्य सरगना जुम्मा खान को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई न सिर्फ दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय वाहन चोरों के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है, बल्कि इससे उस नेटवर्क की परतें भी खुली हैं, जिसकी पहुंच भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों से लेकर दुबई तक फैली हुई थी। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से चोरी की गई गाड़ियों को फर्जी दस्तावेजों के सहारे बेचकर करोड़ों रुपये की कमाई कर रहा था।

अपराध शाखा की टीम ने मणिपुर के थोबल जिले से जुम्मा खान को दबोचा। वह लंबे समय से पुलिस की रडार पर था और कई मामलों में फरार चल रहा था। दिल्ली पुलिस ने बताया कि आरोपी घोषित अपराधी भी रह चुका है और उस पर पहले से कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। गिरफ्तारी के बाद की गई पूछताछ में जुम्मा खान ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं, जिनसे इस पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली सामने आई है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह खासतौर पर दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र से हाई-एंड और लग्जरी गाड़ियों को निशाना बनाता था। चोरी के बाद इन वाहनों को उत्तर-पूर्वी राज्यों में भेज दिया जाता था, जहां आरटीओ से जुड़े कुछ भ्रष्ट तत्वों की मदद से उनके फर्जी रजिस्ट्रेशन कराए जाते थे। नए नंबर प्लेट और जाली कागजात मिलने के बाद ये गाड़ियां पूरी तरह वैध दिखने लगती थीं, जिससे उन्हें पहचानना बेहद मुश्किल हो जाता था।
दिल्ली पुलिस के उपायुक्त संजीव कुमार यादव ने बताया कि इस ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए टीम ने महीनों तक मेहनत की। सीसीटीवी फुटेज की बारीकी से जांच, तकनीकी निगरानी, मोबाइल लोकेशन ट्रैकिंग और स्थानीय खुफिया इनपुट के आधार पर आखिरकार पुलिस इस नतीजे पर पहुंची कि गिरोह का संचालन उत्तर-पूर्व से किया जा रहा है। इसी कड़ी में मणिपुर के थोबल तक पुलिस पहुंची और मुख्य सरगना को गिरफ्तार किया गया।
पूछताछ के दौरान जुम्मा खान ने स्वीकार किया कि वह अब तक एक हजार से अधिक चोरी की गाड़ियों को अलग-अलग राज्यों और विदेशों में बेच चुका है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह गिरोह चोरी की गई एक लग्जरी कार को महज पांच से छह लाख रुपये में आगे बेच देता था, जबकि बाजार में उसकी असली कीमत कई गुना ज्यादा होती थी। सस्ती कीमत के लालच में कई खरीदार बिना ज्यादा जांच-पड़ताल के इन वाहनों को खरीद लेते थे, जिससे गिरोह को आसानी से ग्राहक मिल जाते थे।
जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क को सरिक उर्फ साटा और उसका भतीजा आमिर पाशा मिलकर चला रहे थे। जहां सरिक भारत में रहकर चोरी और सप्लाई की जिम्मेदारी संभालता था, वहीं आमिर पाशा दुबई से पूरे ऑपरेशन को मैनेज करता था। दुबई में बैठकर वह खरीदारों से संपर्क, पैसों के लेन-देन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नेटवर्क को फैलाने का काम करता था। पुलिस का मानना है कि आमिर पाशा की भूमिका इस गिरोह में बेहद अहम थी और उसकी गिरफ्तारी के लिए भी प्रयास तेज कर दिए गए हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह गिरोह केवल वाहनों की चोरी तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार फर्जी दस्तावेज बनाने वाले रैकेट, सीमा पार तस्करी और हवाला नेटवर्क से भी जुड़े हो सकते हैं। इसी आशंका के चलते मामले की जांच को और व्यापक बनाया गया है। दिल्ली पुलिस अब उत्तर-पूर्वी राज्यों के संबंधित आरटीओ कार्यालयों की भी जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि फर्जी रजिस्ट्रेशन किन अधिकारियों की मिलीभगत से किए गए।
इस कार्रवाई के बाद दिल्ली पुलिस ने आम लोगों से भी सतर्क रहने की अपील की है। पुलिस ने कहा है कि सस्ते दामों पर मिलने वाली लग्जरी गाड़ियों को खरीदने से पहले उनके दस्तावेजों की पूरी तरह जांच जरूर करें। वाहन की असली जानकारी, चेसिस नंबर, इंजन नंबर और आरटीओ रिकॉर्ड का मिलान किए बिना कोई भी सौदा करना जोखिम भरा हो सकता है।
फिलहाल जुम्मा खान को दिल्ली लाकर उससे गहन पूछताछ की जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि उसकी गिरफ्तारी से इस अंतरराष्ट्रीय वाहन चोरी गिरोह की पूरी कड़ी सामने आएगी और कई अन्य आरोपियों तक भी पहुंचा जा सकेगा। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। इस बड़ी सफलता के साथ दिल्ली पुलिस ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि अपराध कितना भी संगठित और अंतरराष्ट्रीय क्यों न हो, कानून के शिकंजे से बच पाना मुश्किल है।
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