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नशीला जहर बना मौत की वजह: हरियाणा में युवक की हत्या पर कोर्ट का सख्त फैसला, दो दोषियों को उम्रकैद

हरियाणा में एक युवक की संदिग्ध मौत के मामले में अदालत ने बड़ा और अहम फैसला सुनाया है। कई साल तक चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह कोई सामान्य मौत नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश के तहत की गई हत्या थी। अदालत ने दो आरोपियों को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है, जबकि साक्ष्यों के अभाव में एक आरोपी को बरी कर दिया गया।

यह मामला हरियाणा के एक गांव से जुड़ा है, जहां गांव कलसौरा निवासी युवक सुमित की मौत ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया था। शुरुआत में यह मामला सामान्य प्रतीत हुआ, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, इसमें छिपे खौफनाक सच सामने आते गए।

अदालत का यह फैसला अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रंजना अग्रवाल की कोर्ट ने सुनाया। कोर्ट ने गांव मांडखेड़ी निवासी अमन उर्फ हिमांशु और उसके भाई रमन उर्फ हैप्पी को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा दी। साथ ही दोनों पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर जुर्माना अदा नहीं किया गया, तो दोषियों को अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।

घटना की शुरुआत 9 नवंबर 2021 की शाम से होती है। उस दिन आरोपी अमन और रमन गांव कलसौरा पहुंचे थे। बताया जाता है कि दोनों नशीले पदार्थों के कारोबार से जुड़े हुए थे। इसी दौरान उनका संपर्क सुमित से हुआ। अगले दिन यानी 10 नवंबर को सुमित उन्हें लाडवा छोड़ने के लिए बाइक पर अपने घर से निकला।

लेकिन जो यात्रा सामान्य लग रही थी, वह दरअसल एक साजिश का हिस्सा थी। लाडवा जाने के बजाय आरोपी सुमित को गांव छोटा बांस के खेतों की ओर ले गए। यह एक सुनसान इलाका था, जहां उन्होंने अपनी योजना को अंजाम दिया। आरोप है कि वहां सुमित को नशीला पदार्थ दे दिया गया, जिससे वह बेहोश हो गया।

जब सुमित की हालत बिगड़ने लगी, तो उसे अस्पताल ले जाया गया। 10 नवंबर 2021 को उसे गंभीर अवस्था में भर्ती कराया गया। शुरुआत में यह मामला सामान्य चिकित्सा का लगा, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। यहीं से इस पूरे मामले ने नया मोड़ लिया।

मृतक के परिजनों को शुरू से ही इस घटना पर शक था। उन्होंने आरोप लगाया कि सुमित को जानबूझकर नशीला पदार्थ दिया गया, जिसके कारण उसकी मौत हुई। परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू की।

13 नवंबर 2021 को रादौर थाना पुलिस ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की। जांच के दौरान पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक जांच और गवाहों के बयान एकत्र किए। इन सभी साक्ष्यों से यह स्पष्ट हुआ कि सुमित की मौत प्राकृतिक नहीं थी, बल्कि उसे नशीला पदार्थ देकर उसकी जान ली गई थी।

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने पहले से ही इस पूरी घटना की योजना बना रखी थी। उन्होंने सुमित को अपने साथ ले जाकर सुनसान स्थान पर पहुंचाया और वहां उसे नशीला पदार्थ दिया। यह पूरी घटना एक साजिश के तहत अंजाम दी गई थी।

पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी। पहले इसे सामान्य मामला माना गया था, लेकिन साक्ष्य सामने आने के बाद इसे गैर इरादतन हत्या में बदल दिया गया। इसके बाद आरोपियों की तलाश शुरू की गई और उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक प्रक्रिया के तहत पेश किया गया।

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में मजबूत साक्ष्य पेश किए। गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच ने यह साबित कर दिया कि सुमित को नशीला पदार्थ दिया गया था, जिससे उसकी मौत हुई। अदालत ने इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अपना फैसला सुनाया।

हालांकि इस मामले में एक तीसरे आरोपी का भी नाम सामने आया था, लेकिन उसके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिल सके। इसी कारण अदालत ने उसे बरी कर दिया। यह न्यायिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण पहलू है, जिसमें बिना ठोस साक्ष्य के किसी को दोषी नहीं ठहराया जाता।

फैसले के बाद मृतक सुमित के परिजनों ने संतोष जताया। उनका कहना है कि उन्हें न्याय मिला है और दोषियों को सजा मिलनी ही चाहिए थी। यह फैसला उनके लिए एक बड़ी राहत है, क्योंकि उन्होंने लंबे समय तक इस केस में न्याय की लड़ाई लड़ी।

यह घटना समाज के लिए भी एक बड़ा संदेश देती है। नशीले पदार्थों का कारोबार न केवल अपराध को बढ़ावा देता है, बल्कि इससे जुड़े लोग किसी भी हद तक जा सकते हैं। यह मामला इस बात का उदाहरण है कि कैसे लालच और गलत संगत एक निर्दोष व्यक्ति की जान ले सकती है।

साथ ही, यह केस यह भी दिखाता है कि अगर परिवार और समाज जागरूक रहें और सही समय पर आवाज उठाएं, तो न्याय मिल सकता है। पुलिस और न्यायपालिका की भूमिका भी इस मामले में सराहनीय रही, जिन्होंने साक्ष्यों के आधार पर सही फैसला सुनाया।

अंत में, यह कहा जा सकता है कि यह मामला केवल एक हत्या का नहीं, बल्कि न्याय की जीत का भी है। यह उन सभी लोगों के लिए एक सबक है, जो अपराध के रास्ते पर चलते हैं। कानून देर से ही सही, लेकिन अपना काम जरूर करता है और दोषियों को उनके किए की सजा मिलती है।

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