Breaking News

कपसाड़ हत्याकांड: बेटी की तलाश में पूरा गांव छावनी में तब्दील, राजनीति भी गरमाई

मेरठ के सरधना क्षेत्र के कपसाड़ गांव में अनुसूचित जाति की महिला की निर्मम हत्या और उसकी बेटी के अपहरण ने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया है। घटना के बाद गांव में हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि प्रशासन को ढाई किलोमीटर पहले ही बैरिकेडिंग करनी पड़ी। सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं, जबकि पीड़ित परिवार बेटी की सुरक्षित वापसी के लिए टकटकी लगाए बैठा है।

बेटी का अब तक कोई सुराग नहीं

गुरुवार को हत्या के बाद अपहृत युवती रूबी का शुक्रवार को भी कोई पता नहीं चल सका। नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से ग्रामीणों और परिजनों का गुस्सा और बढ़ता गया। मां सुनीता का शव पूरे दिन घर में रखा रहा और अंतिम संस्कार रोक दिया गया।

गांव में भारी पुलिस तैनाती

संभावित राजनीतिक और सामाजिक तनाव को देखते हुए प्रशासन ने गांव को छावनी में बदल दिया। गांव के चारों ओर सुरक्षा घेरा बना दिया गया।

20 इंस्पेक्टर

150 दरोगा

500 से अधिक पुलिसकर्मी

आरआरएफ टीम की तैनाती

एसएसपी, एसपी देहात, चार सीओ और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौके पर डटे रहे।

विपक्षी नेताओं को रोका गया, हंगामा

सुबह सपा विधायक अतुल प्रधान, भीम आर्मी और अन्य विपक्षी नेताओं को गांव में प्रवेश से रोके जाने पर हालात और बिगड़ गए। सड़क पर धरना शुरू हो गया। नारेबाजी और तीखी बहस के बीच स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई, हालांकि पुलिस ने संयम बरते रखा।

सपा विधायक ने आरोप लगाया कि

“अगर यह घटना किसी दूसरे समुदाय से जुड़ी होती, तो अब तक बुलडोजर चल चुका होता।”

भावुक क्षण: भाई का सवाल

धरने के दौरान मृतका का बेटा नरसी फूट-फूट कर रो पड़ा। विधायक से लिपटकर उसने बस एक सवाल पूछा—

“मेरी बहन आएगी या नहीं?”

इस पल ने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया।

प्रशासन से लिखित आश्वासन

करीब 19 घंटे की बातचीत और दबाव के बाद पुलिस-प्रशासन ने लिखित वादा किया—

48 घंटे में रूबी की तलाश

परिवार के एक सदस्य को चीनी मिल में स्थायी नौकरी

10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता

शस्त्र लाइसेंस और सुरक्षा की व्यवस्था

इसके बाद रात करीब 7:45 बजे सुनीता का अंतिम संस्कार किया जा सका।

हालात काबू में करने के लिए फ्लैग मार्च

मृतक सुनीता

आरोपी पारस सोम

डीआईजी, जिलाधिकारी और एसएसपी ने खुद गांव में मोर्चा संभालते हुए फ्लैग मार्च निकाला। अधिकारियों ने कई दौर की बंद कमरे में वार्ता कर हालात को संभालने की कोशिश की।

क्या है पूरा मामला

  1. गुरुवार सुबह सुनीता अपनी बेटी रूबी के साथ खेत जा रही थीं। इसी दौरान गांव के ही पारस सोम, सुनील और उनके साथियों ने सुनीता पर धारदार हथियार से हमला कर दिया और रूबी का अपहरण कर फरार हो गए। इलाज के दौरान सुनीता की मौत हो गई।

Check Also

एक पेड़ गुरु के नाम, एक संकल्प हरित गाँव के नाम: गुरु पूर्णिमा पर बच्चों ने दिया प्रकृति संरक्षण का प्रेरक संदेश

रामपुर गढ़ौवा के विद्यालय में गुरु वंदन और प्रकृति वंदन का अनूठा संगम, बच्चों ने …

कंधे पर पीपल – बरगद, मन में हरियाली का संकल्प :: वर्दीधारी अनूप मिश्रा बाँट रहे ‘प्राकृतिक AC’

उन्नाव। जहाँ एक ओर भीषण गर्मी और बढ़ते तापमान ने लोगों का जीना मुश्किल कर …

चालक को आई झपकी, गंगा एक्सप्रेसवे पर पलटी डबल डेकर बस; 20 यात्री घायल

गंगा एक्सप्रेसवे पर बड़ा हादसा: डबल डेकर बस पलटी, 20 यात्री घायल, 5 की हालत …