बिहार के कटिहार जिले का 24 साल का युवा नदीम इकबाल ने अपने पिता के छोटे व्यवसाय को आधुनिक और डिजिटल तरीके से इतना बड़ा बना दिया कि आज उसका मासिक रेवेन्यू 3 करोड़ रुपये के करीब है। नदीम की कहानी यह दिखाती है कि कैसे सही सोच, मेहनत और सोशल मीडिया के इस्तेमाल से पारंपरिक व्यवसाय भी ग्लोबल ब्रांड में बदल सकते हैं।

नदीम के पिता मुहम्मद रईस पिछले 30 साल से मखाने के थोक व्यापारी थे। उनका काम असंगठित था और मुनाफा अक्सर बिचौलियों के कारण कम हो जाता था। परिवार चाहता था कि नदीम डॉक्टर बने, लेकिन नदीम के मन में बिजनेस की जिज्ञासा और जुनून हमेशा से था। नोएडा से बीबीए करने के दौरान, नदीम ने अपने कॉलेज प्रोजेक्ट में मखाने की मार्केट पर रिसर्च की। उन्हें एहसास हुआ कि मखाना सिर्फ बिहार का लोकल उत्पाद नहीं है, बल्कि यह सुपरफूड के रूप में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मार्केट में बड़ी मांग पैदा कर सकता है।
2024 में, नदीम ने अपने पिता के पारंपरिक थोक व्यवसाय को एक नए ब्रांड ‘नेचर्स मखाना’ के रूप में लॉन्च किया। उन्होंने सबसे पहले सप्लाई चेन में बदलाव किया और बिचौलियों को हटाकर सीधे 50 से अधिक कटिहार के किसानों को जोड़ लिया। उनके पास अब एक 100 लोगों की टीम है जो कच्चे मखाने को ‘पॉप’ करके खाने योग्य बनाती है। पारिवारिक फैक्ट्री का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने मखाने की ग्रेडिंग प्रक्रिया शुरू की, जिससे उत्पाद की गुणवत्ता और भरोसा बढ़ा।
नदीम ने दिल्ली के खारी बावली में एक वेयरहाउस भी बनाया और सेल्स टीम के माध्यम से सीधे बड़े ब्रांड्स और कंपनियों से संपर्क साधा। शुरुआत में बिजनेस 1 करोड़ रुपये मासिक तक पहुंचा। लेकिन इसके बाद नदीम ने डिजिटल प्लेटफॉर्म का सहारा लिया।
इंस्टाग्राम रील्स पर उन्होंने मखाने की पैकिंग और ग्रेडिंग की साधारण वीडियो डाली और केवल 500 रुपये के छोटे बजट से विज्ञापन चलाए। यह रणनीति बेहद सफल साबित हुई। वीडियो देखने के बाद देशभर से ऑर्डर आने लगे। आज उनके इंस्टाग्राम पेज पर हर महीने लगभग 7-8 लाख व्यूज आते हैं और इससे 13 से अधिक राज्यों में नए क्लाइंट जुड़े हैं।

आज ‘नेचर्स मखाना’ न केवल खुद का पैक्ड मखाना बेचता है, बल्कि अन्य कंपनियों के लिए व्हाइट लेबलिंग की सुविधा भी प्रदान करता है। नदीम का कहना है कि उनकी MBA की पढ़ाई का वास्तविक प्रशिक्षण उन्हें अपने बिजनेस में ही मिल रहा है।
उनके पिता मुहम्मद रईस भी हैरान हैं कि कैसे उनका छोटा सा पारंपरिक व्यवसाय सोशल मीडिया के माध्यम से देशभर के बड़े ब्रांड्स की पसंद बन गया। नदीम की कहानी यह साबित करती है कि अगर जुनून और स्मार्ट मार्केटिंग हो तो पारंपरिक व्यवसाय भी डिजिटल क्रांति की मदद से बड़ा और लाभकारी बन सकता है।
स्वर्णिम टाईम्स : Swarnim Times आपका अपना इंटरनेट अख़बार !