पश्चिम बंगाल में एक मेडिकल छात्र की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने पूरे शैक्षणिक माहौल को झकझोर दिया है। नादिया जिले स्थित कल्याणी जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज के छात्रावास में छह दिन से बंद पड़े कमरे से जब सड़ांध उठी, तब किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि अंदर एक युवा छात्र की लाश गल चुकी होगी। इस घटना ने न सिर्फ कॉलेज परिसर बल्कि पूरे इलाके में भय, चिंता और कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

मृतक की पहचान अंतिम वर्ष के छात्र पुलक हलदर के रूप में हुई है, जो दक्षिण 24 परगना के मोगरहाट क्षेत्र का रहने वाला था। बताया जा रहा है कि उसे आखिरी बार 20 फरवरी को हॉस्टल कैंटीन की ओर जाते देखा गया था। इसके बाद से वह अचानक लापता हो गया। शुरुआत में साथियों ने समझा कि वह पढ़ाई या किसी निजी कारण से कमरे में ही होगा, लेकिन जब कई दिनों तक न वह क्लास में दिखा और न ही किसी से संपर्क में आया, तब शक गहराने लगा।
गुरुवार को हॉस्टल के गलियारे में तेज दुर्गंध फैलने लगी। आसपास के कमरों में रहने वाले छात्रों ने पहले इसे सामान्य समझा, लेकिन जब बदबू असहनीय हो गई, तो उन्होंने प्रशासन को सूचना दी। कई बार दरवाजा खटखटाने के बावजूद अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। अंततः पुलिस को बुलाया गया। जब दरवाजा तोड़ा गया, तो अंदर का दृश्य देखकर सभी सन्न रह गए — कमरे में छात्र का सड़ा हुआ शव पड़ा था, जो कई दिनों से वहीं था।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। अधिकारियों का कहना है कि मौत का कारण अभी स्पष्ट नहीं है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय हो पाएगा कि यह आत्महत्या है, हत्या है या कोई अन्य कारण। फिलहाल पुलिस ने अस्वाभाविक मृत्यु का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
इस बीच, छात्र की मौत को लेकर कई तरह की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं। कुछ सूत्रों का दावा है कि हाल ही में हुए आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल से जुड़े दुष्कर्म-हत्या मामले को लेकर चल रहे छात्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलक कथित तौर पर मानसिक दबाव में था। यह भी कहा जा रहा है कि कुछ साथियों से उसका विवाद हुआ था और वह पढ़ाई को लेकर भी तनाव में था। हालांकि पुलिस ने इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से इनकार किया है।
कॉलेज प्रशासन का कहना है कि उन्हें इस घटना की जानकारी तब मिली जब छात्र ने कमरे का दरवाजा नहीं खोला। अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक सोमज्योति बनर्जी के अनुसार, “हमें सूचना मिली कि छात्र दरवाजा नहीं खोल रहा है। जब प्रतिक्रिया नहीं मिली तो पुलिस को बुलाया गया। दरवाजा तोड़ने पर अंदर से शव बरामद हुआ। पोस्टमार्टम के बाद ही मौत का कारण स्पष्ट होगा।”
छात्रावास में रहने वाले अन्य छात्रों ने बताया कि पुलक अधिकतर समय अकेले ही रहता था और कम ही लोगों से बातचीत करता था। कुछ छात्रों का कहना है कि पिछले कुछ समय से वह तनाव में दिख रहा था, लेकिन किसी ने यह नहीं सोचा था कि स्थिति इतनी गंभीर हो सकती है।
इस घटना के बाद कॉलेज परिसर में भय और सदमे का माहौल है। कई छात्रों ने सुरक्षा व्यवस्था और मानसिक स्वास्थ्य सहायता को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अगर छात्र कई दिनों तक कमरे में मृत पड़ा रहा और किसी को पता नहीं चला, तो यह हॉस्टल प्रबंधन की गंभीर लापरवाही है।
प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए परिसर में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया है, ताकि किसी भी तरह की अफवाह या तनाव की स्थिति को रोका जा सके। वहीं, छात्र संगठनों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और यह सुनिश्चित किया जाए कि यदि किसी तरह का उत्पीड़न या दबाव था, तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो।
स्थानीय लोगों और छात्रों के बीच भी यह चर्चा है कि मेडिकल शिक्षा के दबाव, लंबी पढ़ाई, प्रतियोगिता और सामाजिक अपेक्षाएं कई छात्रों को मानसिक रूप से तोड़ देती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मेडिकल कॉलेजों में काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य सहायता की व्यवस्था मजबूत करना समय की मांग है।
फिलहाल पुलिस छात्र के मोबाइल फोन, लैपटॉप और निजी सामान की जांच कर रही है। कॉल रिकॉर्ड, संदेश और सोशल मीडिया गतिविधियों को भी खंगाला जा रहा है, ताकि यह पता चल सके कि छात्र किन परिस्थितियों से गुजर रहा था। परिवार के सदस्यों से भी पूछताछ की जा रही है, जिससे उसकी मानसिक स्थिति और निजी जीवन के बारे में जानकारी मिल सके।
इस रहस्यमयी मौत ने कई अनुत्तरित सवाल छोड़ दिए हैं — क्या यह अकेलेपन और तनाव का परिणाम था? क्या छात्र किसी दबाव में था? या फिर इसके पीछे कोई और कारण छिपा है? इन सवालों के जवाब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही सामने आ पाएंगे।
लेकिन एक बात साफ है — एक युवा मेडिकल छात्र का इस तरह कमरे में अकेले मर जाना और कई दिनों तक किसी को पता न चलना, न सिर्फ एक व्यक्तिगत त्रासदी है बल्कि शिक्षा व्यवस्था, हॉस्टल निगरानी और मानसिक स्वास्थ्य समर्थन पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
स्वर्णिम टाईम्स : Swarnim Times आपका अपना इंटरनेट अख़बार !