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मंदिरों में रोजगार-स्वरोजगार की संभावना, हमने काशी से इसकी शुरुआत की : मुख्यमंत्री योगी

राज प्रताप सिंह, लखनऊ ब्यूरो। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भाषाओं को बोझ न मानकर आर्थिक प्रगति और स्वावलंबन का आधार बनाएं। हमें भारतीय भाषाओं के लिए भाषा विश्वविद्यालय की व्यवस्था करनी होगी। विश्वविद्यालयों को पाठ्यक्रम तैयार कर मांग के अनुसार भाषा शिक्षकों की सप्लाई चेन बनानी होगी। तभी हम प्रतिस्पर्धा में खड़े हो सकेंगे।
योगी शनिवार को लखनऊ विश्वविद्यालय में भारतीय भाषा महोत्सव-2020 का उद्घाटन करने के बाद बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि देश की सभी भाषाओं व दुनिया की कुछ भाषाओं का आधार संस्कृत है। हिंदी देश के बड़े भूभाग में बोली जाती है। महात्मा गांधी ने स्वाधीनता आंदोलन में हिंदी को राष्ट्रभाषा कहा था, लेकिन आजादी के बाद इसे प्रभावी ढंग से आगे नहीं बढ़ाया गया। भाषा शब्दों से बनती है। शब्द की ताकत है, इसी से भावना व्यक्त होती है।

शब्द को ब्रह्म कहा गया है, ब्रह्म सत्य और शाश्वत है। दुनिया को साहित्य का पाठ हम भारतीयों ने पढ़ाया है। ऋग्वेद सबसे प्राचीन ग्रंथ है। महाभारत में जो धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष है, वह दुनिया में कहीं नहीं है। अवधी में रचा गया श्रीरामचरितमानस किसी बंधन में नहीं बंधा। गोस्वामी तुलसीदास ने इसे जन-जन तक पहुंचा दिया। अवधी को भले ही भारतीय संविधान ने मान्यता न दी हो, लेकिन भारत के लोग हर दिन श्रीरामचरितमानस का पाठ करते हैं। यह भारत की वास्तविक ताकत है। हमें इसे पहचानना होगा।

योगी ने कहा कि सौ साल पहले महात्मा गांधी काशी हिंदू विश्वविद्यालय के समारोह में आए थे। उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन किए थे। उन्होंने गंदगी व अव्यवस्था देखकर हैरानी जताई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में हमने काशी विश्वनाथ मंदिर के सौंदर्यीकरण का काम शुरू कर दिया है। 300 मकान खरीदे गए, जिनमें 67 मंदिर मिले। इन्हें संरक्षित किया जा रहा है। मंदिर जाने का रास्ता भी 50 फीट चौड़ा कर दिया गया है।

काशी में पंडागीरी से बहुत लोग परेशान रहते थे। इस प्रवृत्ति से मुक्ति के लिए ऐसी व्यवस्था की कि मंदिर के दर्शन व रुद्राभिषेक कराने से लेकर योग्य गाइड तक काम कर सकें। श्रद्धालु उनकी सेवाएं चाहता है तो रजिस्ट्रेशन के समय पैसा जमा करा लिया जाता है। पहले चरण में 30 लोगों को पुरोहित की ट्रेनिंग दी। पहले पुरोहित-पंडा महीने में पांच-दस हजार रुपये कमाते थे।

इन 30 पुरोहितों ने सबसे कम 30 हजार और अधिकतम डेढ़ लाख रुपये कमाए। अब 100 से ज्यादा गाइड हैं जो दर्शन-पूजन करा रहे हैं। यह एक नई पद्धति है। इसकी हर मंदिर में संभावना है। काशी विश्वनाथ मंदिर में चढ़ने वाले फूलों से चंदौली के एक गांव में महिलाओं के समूह से इत्र, धूपबत्ती, अगरबत्ती और कंपोस्ट खाद बनवा रहे हैं। महिलाएं हर महीने 9 से 15 हजार रुपये कमा रही हैं।

योगी ने कहा, हिंदी भाषा देश के बड़े भूभाग को जोड़ने का कार्य करती है। यह रोजगार का बहुत बड़ा माध्यम है। भारत के ऋषि संस्कृत को बहुत पहले ही रोजगार से जोड़ चुके हैं। अगर संस्कृत पढ़ने वाला व्यक्ति अपनी बुद्धि का सही ढंग से उपयोग करे तो वह कभी भूखा नहीं मर सकता। देश, दुनिया में ऐसे कई विश्वविद्यालय हैं, जहां संस्कृत और हिंदी पढ़ाने के लिए योग्य शिक्षकों की आवश्यकता है। यदि विश्वविद्यालय भाषाओं की शिक्षा देना शुरू कर दें तो दुनिया भर में शिक्षकों की आवश्यकता पूरी की जा सकती है।

इंटर्नशिप स्कीम देगी युवाओं को देश-दुनिया के लिए मंच
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार युवाओं के लिए इंटर्नशिप स्कीम लेकर आई है। यह देश-दुनिया के लिए युवाओं को मंच देगी। इसी के साथ हर जिले में युवा हब बनाया जाएगा। आज वैश्विक मंचों पर प्रधानंत्री मोदी लोगों को हिंदी में ही संबोधित करते हैं। वे भावनात्मक रूप से पूरी दुनिया को भारत से जोड़ते हैं। आज विभिन्न देशों के राजदूत व अन्य लोग भारत आकर हिंदी में संवाद करने के लिए हिंदी सीख रहे हैं। पहले उनसे अंग्रेजी में संवाद करना अनिवार्य होता था।

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