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मणिशृंखला की 30 वें पुस्तक ‘जितियामणि’ का लोकार्पण, मैथिली साहित्यकार मणिकांत झा द्वारा रचित

राजू सिंह की स्पेशल रिपोर्ट दरभंगा : मणि शृंखला अंतर्गत महात्मा गांधी शिक्षण संस्थान द्वारा प्रकाशित वरिष्ठ साहित्यकार मणिकांत झा के 30 वें रचना संग्रह जितियामणि का विमोचन बृहस्पतिवार की देर शाम हुआ. महात्मा गांधी शिक्षण संस्थान के संगोष्ठी कक्ष में आयोजित समारोह में एमएलएसएम कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य डॉ विद्यानाथ झा, वरिष्ठ पत्रकार विष्णु कुमार झा, वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेंद्र कुमार चौधरी, मृदुला सिंह, बहादुरपुर प्रखंड के पूर्व उप प्रमुख देव कुमार झा, संगीतकार सह चिकित्सक डा एडीएन सिंह, सुप्रसिद्ध तबला वादक गौरी कांत झा एवं पीजी मैथिली विभाग के अध्यक्ष प्रो रमेश झा ने किया.

कार्यक्रम की शुरुआत डा ममता ठाकुर द्वारा विद्यापति रचित जय जय भैरवि के गायन से हुआ. जबकि इससे पहले अतिथियों ने गंधर्व कुमार झा के वेद मंत्रोच्चारण के बीच दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की. मौके पर जया ने गणेश वंदना प्रस्तुत किया जबकि डा ममता ठाकुर सहित नीलम झा एवं दीपक कुमार झा ने जितियामणि पुस्तक से अनेक रचनाओं की सस्वर प्रस्तुति दी.कार्यक्रम में अपना विचार रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेंद्र कुमार चौधरी ने कहा कि जितिया के दिन प्रत्येक नारी दुर्गा स्वरूप में आकर अपने पुत्र के रक्षार्थ जितिया व्रत करती है. आज दस दिवसीय देवी पूजन उत्सव के शुभारंभ के अवसर पर जितियामणि पुस्तक का लोकार्पण होना अत्यंत महत्वपूर्ण है. वरिष्ठ पत्रकार विष्णु कुमार झा ने कहा कि किसी लेखक की लेखन यात्रा में गीत सरीखा लय और ताल निहित होता है. मणिकांत झा के रचना संसार में मिथिला के लोक भाव के सभी रंगों का समाहित होना इनकी विशिष्टता है.

लनामिवि के पीजी मैथिली विभागाध्यक्ष रमेश झा ने कहा कि मैथिली के विलुप्त होते शब्दों को व्यवहार में लाने की कला में लेखक माहिर हैं. यह उनकी विभिन्न रचनाओं में स्वत: मुखर होकर सामने आता रहा है. यह मैथिली साहित्य के उज्जवल भविष्य के लिए शुभ संकेत है. देव कुमार झा ने मैथिली का मिथिला से विलुप्त होने पर चिंता जाहिर करते हुए इसे बचाकर रखने में मणिकांत झा की पुस्तकों को कारगर बताया. बासुकी नाथ झा ने कहा कि जितिया ऐसा पावन पर्व है जिसमें मां अपने पुत्रों के रक्षार्थ व्रत करती है. मां जगदंबा ने सृष्टि के रक्षा के लिए इस व्रत का की शुरुआत की थी. आज कलश स्थापन के दिन इस आयोजन से मैथिली साहित्य की रक्षा की शुरुआत हो चुकी है. आत्माराम महतो ने पुस्तक की प्रशंसा करते हुए मिथिला क्षेत्र में मैथिली माध्यम प्राथमिक शिक्षा के पाठ्यक्रम में लागू होने की बात रखी. मृदुला सिंह ने मणि शृंखला के पल्लवित पुष्पित होने की कामना की. डा एडीएन सिंह ने मणि शृंखला की पुस्तकों को मिथिला के लोकाचार को संरक्षित एवं संवर्धित करने में सहायक बताया. गौरी कांत झा ने जितिया मनी पुस्तक से रचनाओं का सस्वर पाठ किया.

अध्यक्षीय संबोधन में डॉ विद्यानाथ झा ने कहा कि मनुष्य एक चेतनाशील प्राणी है और जितिया पर्व इसका प्रतीक है. उन्होंने जितिया पर्व के वैज्ञानिक पहलुओं की विस्तार से चर्चा करते हुए मानव कल्याण के लिए इस पर्व को जहां महत्वपूर्ण बताया वहीं जितियामणि की रचना को मैथिली साहित्य के लिए अत्यंत लाभकारी बताया. विद्यापति सेवा संस्थान के मीडिया संयोजक प्रवीण कुमार झा के संचालन में आयोजित कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत करते हुए महात्मा गांधी शिक्षण संस्थान के चेयरमैन हीरा कुमार झा ने कहा कि मिथिला की परंपरा, संस्कृति, लोकाचार एवं पर्व त्योहार के महत्व को मणिकांत झा आम लोगों के समक्ष बखूबी रखते आ रहे हैं. जितियामणि इसका एक और जीवंत उदाहरण है. धन्यवाद ज्ञापन करते हुए मणिकांत झा ने जितियामणि की रचना के उद्देश्यों पर विस्तार से चर्चा की.

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