इटावा (डॉ एस.बी.एस. चौहान) : यमुना-चंबल – क्वारी-सिंध-पहूज आदि नदियों के किनारे बसे गांव इस समय भारी मुसीबत की बेड़ियों में जकड़े हुए हैं।

मध्य प्रदेश सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार के प्रशासनिक अधिकारी पीड़ित ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने से लेकर उनके खाने-पीने और स्वास्थ्य सेवाओं को मुहैया कराने में बारीकी से नजर रख सेवा में जुटे हुए हैं। इस मामले में सर्वाधिक सहयोग पुलिस प्रशासन कर रहा है।
- दरभंगा पुलिस की बालमित्र पहल :: सभी 40 थानों में Child Help Desk/Child Corner, DM कौशल कुमार और SSP जगुनाथ रेड्डी ने महिला थाना में फीता काट कर किया उद्घाटन
- दरभंगा में ‘मुस्लिम एलीट्स ऑफ वैशाली’ का विमोचन, प्रोफेसर तरज़ी और सैयद महमूद अहमद करीमी को मिला अलहुदा अवार्ड
- दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में जिला प्रशासन दरभंगा की पहल, सहायक निदेशक आशीष अमन ने लाभुकों को सौंपी ट्राई साइकिल की चाबी
- लहेरियासराय थाना कांड संख्या 529/26 में 5 नामजद आरोपितों पर कार्रवाई, नाबालिग से छेड़खानी मामले का दरभंगा पुलिस ने किया खंडन
- दरभंगा शहर में 16 वर्षीय नाबालिग लड़की से छेड़छाड़, लहेरियासराय थाना कांड संख्या 529/26 दर्ज 3 हफ्ते बीत जाने के बाद भी गिरफ्तारी नहीं
बता दें इस समय नदियों के तराई वाले इलाकों में बाढ़ का प्रकोप अपनी चरम सीमा पर है गांव से गांव के भू-मार्गीय संबंध एक दूसरे से कट चुके हैं। ऐसे स्थानों पर पुलिस प्रशासन के जवान डोंगी,अग्निवोट, व तैराकों की मदद से फंसे हुए लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहे हैं। किन्ही-किन्हीं स्थानों पर तो ग्रामीण अपना घर छोड़ने पर तैयार नहीं हो रहे हैं लेकिन फिर भी संबंधित उप जिलाधिकारी संबंधित थानाध्यक्ष और पुलिस प्रशासन के अधिकारी समझाने बुझाने में और उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए दिन-रात जुटे हुए हैं।

कुछ ऐसे स्थान जहां पर बाढ़ पीड़ित तो हैं लेकिन वहां पर प्रशासन कोई खास तवज्जो इसलिए नहीं दे रहा है कि वहां की जनता भू मार्ग से आपातकालीन सेवा के तहत ग्रामीणों को निकालने में कामयाब होगा इसलिए खासकर उन तराई वाले इलाकों में जो इस समय पानी से घिरे हुए हैं या गिरने की स्थिति में है वहां पर प्रशासन पूर्ण रूप से अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाता हुआ दिखाई दे रहा है/लोगों की सुरक्षा में मुस्तैद है। कुछ ग्रामीणों ने रुंदे हुए गले से बताया कि हमें तो खाने के लिए कोटे से राशन बढ़ा हुआ मिल जाएगा प्रशासनिक अधिकारियों के चलते उससे भरण-पोषण हो भी सकता है लेकिन पशुओं को क्या होगा 1-1 काश्तकार के पास दर्जनों पशु हैं उनके लिए चारे का इंतजाम कहां से होगा? यह सोचनीय व्यवस्था है। संबंधित उप जिलाधिकारियों ने पीड़ित लोगों को आश्वस्त किया है की सरकार आप लोगों के रहने खाने-पीने और चिकित्सा सुविधा जैसी व्यवस्था को बदस्तूर निभाएगी कहीं किसी को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। जो भी संभव मदद होगी की जाएगी।
स्वर्णिम टाईम्स : Swarnim Times आपका अपना इंटरनेट अख़बार !