लालगंज क्षेत्र के निनवार दक्षिण गांव में बृहस्पतिवार की सुबह ऐसा हादसा हुआ, जिसने खुशियों से भरे घर को पल भर में गम के सन्नाटे में बदल दिया। जिस घर में सेहरा सजने और शहनाइयों की गूंज होने वाली थी, वहां चीख-पुकार और आंसुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। शादी से ठीक पहले दूल्हे पुष्पेंद्र कुमार सिंह की नहर में डूबने से मौत हो गई। यह हादसा इतना अचानक और हृदयविदारक था कि गांव ही नहीं, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।

निनवार दक्षिण गांव निवासी जंग बहादुर सिंह के बड़े बेटे पुष्पेंद्र कुमार सिंह की शादी बृहस्पतिवार को तय थी। शाम चार बजे बरात प्रयागराज के लिए रवाना होनी थी। घर में सुबह से ही शादी की तैयारियां चल रही थीं। महिलाएं गीत गा रही थीं, रिश्तेदार आ-जा रहे थे और दूल्हे के सेहरे व कपड़ों को अंतिम रूप दिया जा रहा था। लेकिन किसी को क्या पता था कि सुबह की यह चहल-पहल कुछ ही घंटों में मातम में बदल जाएगी।
परिजनों के अनुसार, बृहस्पतिवार सुबह करीब सात बजे पुष्पेंद्र अपनी बाइक लेकर लालगंज की ओर निकला था। बताया जा रहा है कि उसे किसी जरूरी काम से जाना था। वह घर से बिल्कुल सामान्य मनःस्थिति में निकला था। किसी को अंदेशा नहीं था कि यह उसकी आखिरी यात्रा होगी। गांव से कुछ ही दूरी पर स्थित बाणसागर नहर के पास पहुंचते ही उसकी बाइक अचानक अनियंत्रित हो गई और सीधे नहर में जा गिरी।
नहर में पानी गहरा होने के कारण पुष्पेंद्र खुद को संभाल नहीं सका और देखते ही देखते पानी में डूब गया। कुछ ग्रामीणों ने नहर में गिरी बाइक देखी। जब उन्होंने बाइक का नंबर पहचाना तो तुरंत गांव में सूचना दी। खबर मिलते ही परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। घर में मौजूद लोग दौड़ते हुए घटनास्थल की ओर पहुंचे। कुछ ही देर में गांव के अन्य लोग और रिश्तेदार भी वहां जुट गए।
ग्रामीणों की मदद से पुष्पेंद्र को नहर से बाहर निकाला गया। उस समय तक वह बेहोश हो चुका था। परिजन आनन-फानन में उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) लालगंज ले गए। अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। जैसे ही यह खबर परिजनों तक पहुंची, घर में कोहराम मच गया। मां बेसुध हो गईं, पिता की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे और भाई-बहन दहाड़ें मारकर रोने लगे।
इस दर्दनाक हादसे की सबसे मार्मिक बात यह रही कि पुष्पेंद्र के छोटे भाई उपेंद्र कुमार सिंह के साथ ही उसका तिलक समारोह हाल ही में संपन्न हुआ था। चार फरवरी को दोनों भाइयों का एक साथ तिलक हुआ था। पूरे गांव में खुशी का माहौल था। लोग दोनों भाइयों की जोड़ी की तारीफ कर रहे थे। किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि कुछ ही दिनों में यह खुशी ऐसे टूट जाएगी।
बताया जाता है कि पुष्पेंद्र पढ़ाई में भी काफी होनहार था। वह शिक्षक भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रहा था और परिवार को उससे काफी उम्मीदें थीं। पिता जंग बहादुर सिंह ने बताया कि पुष्पेंद्र पढ़-लिखकर शिक्षक बनना चाहता था और बच्चों को शिक्षा देना उसका सपना था। शादी के बाद वह अपनी पढ़ाई को और गंभीरता से आगे बढ़ाने की योजना बना रहा था।
घटना की सूचना मिलने पर पुलिस भी मौके पर पहुंची। थानाध्यक्ष अभय कुमार सिंह ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह एक दुर्घटना प्रतीत हो रही है। बाइक अनियंत्रित होकर नहर में चली गई, जिससे युवक की डूबने से मौत हो गई। पुलिस ने आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
इधर, जिस घर में कुछ घंटे बाद बरात निकलनी थी, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है। सेहरा, कपड़े और सजावट का सामान जस का तस पड़ा है। रिश्तेदार जो शादी में शामिल होने आए थे, वे शोक संवेदनाएं व्यक्त करते नजर आए। गांव की महिलाएं रोती-बिलखती मां को ढांढस बंधाने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन यह दुख ऐसा था जिसे शब्दों में समेटना मुश्किल था।
गांव के बुजुर्गों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसा दृश्य पहले कभी नहीं देखा। शादी वाले घर से उठती खुशियों की आवाजें अचानक चित्कार में बदल जाना हर किसी को भीतर तक झकझोर गया। पूरे निनवार दक्षिण गांव में चूल्हे नहीं जले और हर कोई इस परिवार के दुख में शामिल नजर आया।
यह हादसा एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि जिंदगी कितनी अनिश्चित है। एक पल में सब कुछ बदल जाता है। जिस युवक के सिर पर सेहरा सजने वाला था, उसकी अर्थी उठेगी, यह किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। पुष्पेंद्र की असमय मौत ने न सिर्फ एक परिवार, बल्कि पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है।
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