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साइबर ठगों पर नूंह पुलिस का शिकंजा: फर्जी सिम, नकली अकाउंट और ऑनलाइन जाल बिछाकर ठगी करने वाले तीन आरोपी दबोचे

हरियाणा के नूंह जिले में साइबर अपराध के खिलाफ चल रही मुहिम के बीच पुलिस को एक अहम सफलता हाथ लगी है। जिले की विभिन्न पुलिस इकाइयों ने अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर तीन ऐसे आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो आधुनिक तकनीक का गलत इस्तेमाल कर लोगों को ठगी का शिकार बना रहे थे। यह कार्रवाई न केवल साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ा कदम मानी जा रही है, बल्कि इससे यह भी स्पष्ट हो गया है कि पुलिस अब डिजिटल अपराधों को लेकर पूरी तरह सतर्क और सक्रिय है।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान अमीउल हक, रोबिन और यूसुफ के रूप में हुई है। तीनों आरोपी अलग-अलग गांवों से पकड़े गए हैं और तीनों के ठगी करने के तरीके भी अलग-अलग थे, लेकिन उनका मकसद एक ही था—लोगों को धोखे में रखकर पैसे ऐंठना।

पहला मामला थाना पिनंगवा क्षेत्र से सामने आया। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि गांव मामलिका में रहने वाला एक युवक फर्जी सिम कार्ड और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को ठग रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस ने बिना देर किए एक टीम का गठन किया और गांव में छापेमारी की। इस कार्रवाई के दौरान अमीउल हक को गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस ने जब उसके पास से बरामद मोबाइल फोन की जांच की, तो कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। मोबाइल में एक फर्जी सिम कार्ड लगा हुआ था, जिसके जरिए आरोपी लोगों से संपर्क करता था। इसके अलावा, मोबाइल में कई नकली व्हाट्सएप अकाउंट, संदिग्ध ग्रुप और बारकोड भी मिले। पुलिस का मानना है कि इन बारकोड का इस्तेमाल लोगों को डिजिटल पेमेंट के नाम पर ठगने के लिए किया जाता था।

जांच के दौरान यह भी पता चला कि आरोपी जिस सिम कार्ड का इस्तेमाल कर रहा था, उसके खिलाफ पहले से ही ऑनलाइन शिकायत दर्ज थी। इसका मतलब यह है कि आरोपी पहले भी कई लोगों को अपना शिकार बना चुका था और पुलिस से बचने के लिए लगातार अपनी पहचान बदलता रहता था।

दूसरा मामला साइबर थाना नूंह के तहत दर्ज किया गया। पुलिस टीम ने दिल्ली-अलवर रोड के पास स्थित गांव आकेड़ा के नजदीक से रोबिन नाम के आरोपी को गिरफ्तार किया। रोबिन, पाडला शाहपुरी गांव का रहने वाला है और वह भी साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है।

रोबिन की तलाशी के दौरान पुलिस को उसके पास से दो मोबाइल फोन और एक एटीएम कार्ड मिला। जब इन उपकरणों की जांच की गई, तो यह सामने आया कि इनका इस्तेमाल देश के कई राज्यों में साइबर अपराध के लिए किया गया था। राजस्थान, गोवा और असम जैसे राज्यों में भी उसके खिलाफ ठगी के मामले जुड़े पाए गए हैं।

रोबिन के मोबाइल फोन में फर्जी व्हाट्सएप अकाउंट, संदिग्ध चैट और क्यूआर कोड से जुड़े डेटा मिले हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपी लोगों को किसी न किसी बहाने से क्यूआर कोड स्कैन करने के लिए कहता था। जैसे ही कोई व्यक्ति कोड स्कैन करता, उसके बैंक खाते से पैसे निकल जाते थे और उसे ठगी का एहसास तब होता जब बहुत देर हो चुकी होती।

तीसरा मामला सीआईए स्टाफ फिरोजपुर झिरका द्वारा सामने लाया गया, जिसमें यूसुफ नाम के आरोपी को नल्हड़ रोड क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया। यूसुफ गांव बींवा का रहने वाला है और वह ऑनलाइन मार्केटिंग प्लेटफॉर्म का गलत इस्तेमाल कर लोगों को ठगता था।

पुलिस जांच में सामने आया कि यूसुफ सोशल मीडिया पर गाय और भैंस बेचने के नाम पर फर्जी विज्ञापन डालता था। वह खुद को एक भरोसेमंद पशु व्यापारी बताता और लोगों को सस्ते दामों का लालच देता। जब कोई व्यक्ति उससे संपर्क करता, तो वह एडवांस पेमेंट के नाम पर पैसे मांगता और जैसे ही पैसे उसके खाते में आते, वह संपर्क तोड़ देता।

यूसुफ के पास से बरामद मोबाइल फोन की जांच में कई फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट, बैंकिंग ऐप्स और संदिग्ध लेन-देन के रिकॉर्ड मिले हैं। इससे यह साफ होता है कि वह लंबे समय से इस तरह के अपराधों में शामिल था और कई लोगों को ठग चुका था।

पुलिस प्रवक्ता कृष्ण कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि तीनों आरोपी अपनी असली पहचान छिपाने के लिए फर्जी सिम कार्ड और नकली बैंक खातों का इस्तेमाल करते थे। वे अलग-अलग नामों और प्रोफाइल के जरिए लोगों से संपर्क करते और उन्हें अपने जाल में फंसा लेते थे।

तीनों मामलों में आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और टेलीकम्युनिकेशन एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने उनके कब्जे से बरामद सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जब्त कर लिया है और उन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।

इसके अलावा, पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि क्या इन आरोपियों के तार किसी बड़े साइबर गिरोह से जुड़े हैं। शुरुआती जांच से संकेत मिल रहे हैं कि यह एक संगठित नेटवर्क हो सकता है, जो अलग-अलग राज्यों में सक्रिय होकर लोगों को ठगी का शिकार बना रहा था।

इस कार्रवाई के बाद नूंह पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे ऑनलाइन लेन-देन करते समय सतर्क रहें। किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर क्यूआर कोड स्कैन न करें और अपनी निजी या बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा न करें।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराध के खिलाफ यह अभियान लगातार जारी रहेगा और आने वाले समय में ऐसे और भी अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

नूंह पुलिस की इस सख्त कार्रवाई ने यह संदेश दिया है कि अब साइबर अपराधियों के लिए बच निकलना आसान नहीं होगा। वहीं, यह घटना आम लोगों के लिए एक चेतावनी भी है कि डिजिटल दुनिया में थोड़ी सी लापरवाही भी भारी नुकसान का कारण बन सकती है। इसलिए जरूरी है कि हर व्यक्ति जागरूक रहे और किसी भी संदिग्ध गतिविधि से खुद को दूर रखे।

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