प्रयागराज के संगम तट पर आज मौनी अमावस्या के अवसर पर आस्था और श्रद्धा का अद्भुत दृश्य देखने को मिल रहा है। ब्रह्म मुहूर्त से ही लाखों श्रद्धालु संगम में पुण्य की डुबकी लगा रहे हैं और यह क्रम पूरे दिन लगातार जारी रहने की उम्मीद है। प्रशासन के अनुसार आज लगभग साढ़े तीन करोड़ श्रद्धालुओं के संगम स्नान करने का अनुमान है, जिसे देखते हुए मेला क्षेत्र में सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर व्यापक इंतजाम किए गए हैं।

माघ मेले के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण स्नान पर्व मौनी अमावस्या पर संगम तट श्रद्धालुओं से खचाखच भरा हुआ है। श्रद्धालु मौन व्रत धारण कर स्नान और दान-पुण्य कर रहे हैं। मान्यता है कि जो लोग पूरे माघ माह में कल्पवास नहीं कर पाते, उन्हें मौनी अमावस्या के दिन संगम स्नान से एक महीने के कल्पवास के बराबर पुण्य फल प्राप्त होता है।
प्रशासन पूरी तरह सतर्क
माघ मेला अधिकारी ऋषि राज ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए साढ़े तीन किलोमीटर तक फैले स्नान घाटों का निर्माण किया गया है। सभी सात सेक्टरों के श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे अपने निकटतम घाट पर ही स्नान करें। मेला क्षेत्र में पर्याप्त संख्या में चेंजिंग रूम, सार्वजनिक घोषणाओं के लिए पब्लिक एड्रेस सिस्टम, और एकीकृत कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) के जरिए निगरानी की जा रही है।
यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए विशेष योजना लागू की गई है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो। जल पुलिस, स्थानीय पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) की तैनाती के साथ सुरक्षा को और मजबूत किया गया है।
जल, थल और नभ से निगरानी
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है और ड्रोन कैमरों के माध्यम से पूरे मेला क्षेत्र पर नजर रखी जा रही है। पुलिस आयुक्त जोगेंद्र कुमार ने सभी अधिकारियों को सतर्क रहने और भीड़ प्रबंधन को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
शुभ योग में हो रहा स्नान
इस वर्ष मौनी अमावस्या पर बुधादित्य, महालक्ष्मी, भौमादित्य और नारायण जैसे शुभ योग बन रहे हैं, जिससे इस दिन का धार्मिक महत्व और बढ़ गया है। ज्योतिषाचार्य दिवाकर त्रिपाठी के अनुसार मौनी अमावस्या को स्नान पर्वों में सर्वाधिक पुण्यदायी माना जाता है। इस दिन पितरों के निमित्त दान और तर्पण करने का भी विशेष विधान है।
आस्था का अद्वितीय संगम
मौनी अमावस्या से एक दिन पहले ही करीब डेढ़ करोड़ श्रद्धालु संगम में स्नान कर चुके थे, जबकि आज श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना है। संगम तट पर हर ओर “हर-हर गंगे” और “जय संगम” के जयघोष गूंज रहे हैं। यह पर्व न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा की जीवंत झलक भी प्रस्तुत करता है।
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