माल/लखनऊ (राम किशोर रावत) : विश्व में विख्यात मलिहाबादी दशहरी आम के हरे भरे प्रतिबंधित 18 पेड़ों को वन विभाग व पुलिस विभाग की सांठगांठ के चलते लकड़ी माफियाओं द्वारा चलाया गया आरा। रक्षक ही बन रहे भक्षक भक्षक।

माल थाना क्षेत्र के गोड़वा गांव निवासी रणजीत की नहर के पास आम की बाग में खडे दशहरी के 18 पेड़ हरे-भरे फलदार खड़े थे जिन्हें पुलिस और वन विभाग के रहमों करम पर बिना परमिट के लकड़ी माफियाओं द्वारा चलाया गया आरा।इस लकड़ी को डाले में लादकर एकांत जगह पर डालकर फिर ट्रक य डीसीएम में लोड करके लखनऊ सीतापुर सहित अन्य लकड़ी मंडियों में बेची जा रही है। यह खेल वन विभाग से लेकर पुलिस विभाग जानने के बाद भी अंजान बने रहते हैं। जबकि इन्हीं पेड़ों की दशहरी अपने स्वाद के लिए विश्व में विख्यात है फल पट्टी क्षेत्र घोषित होने
- दरभंगा पुलिस की बालमित्र पहल :: सभी 40 थानों में Child Help Desk/Child Corner, DM कौशल कुमार और SSP जगुनाथ रेड्डी ने महिला थाना में फीता काट कर किया उद्घाटन
- दरभंगा में ‘मुस्लिम एलीट्स ऑफ वैशाली’ का विमोचन, प्रोफेसर तरज़ी और सैयद महमूद अहमद करीमी को मिला अलहुदा अवार्ड
- दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में जिला प्रशासन दरभंगा की पहल, सहायक निदेशक आशीष अमन ने लाभुकों को सौंपी ट्राई साइकिल की चाबी
- लहेरियासराय थाना कांड संख्या 529/26 में 5 नामजद आरोपितों पर कार्रवाई, नाबालिग से छेड़खानी मामले का दरभंगा पुलिस ने किया खंडन
- दरभंगा शहर में 16 वर्षीय नाबालिग लड़की से छेड़छाड़, लहेरियासराय थाना कांड संख्या 529/26 दर्ज 3 हफ्ते बीत जाने के बाद भी गिरफ्तारी नहीं
के बाद इनकी जिम्मेदारी वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की है। लेकिन वन विभाग के अधिकारी रक्षक ही भक्षक बन रहे हैं तो कौन करेगा इन हरे भरे पेड़ों की रखवाली। समय रहते अगर इन हरे भरे आम के पेड़ों पर प्रतिबंध ना लगाया गया तो मलिहाबाद फल पट्टी क्षेत्र का नाम तो रहेगा लेकिन या हरे भरे आम के पेड़ नहीं रहेंगे। जब की इस कारोबार में पुलिस व वन विभाग का लकड़ी माफियाओं को पूरा संरक्षण दिया जाता है जिसके चलते यह लकड़ी माफिया क्षेत्र में आम शीशम नेम सागवान चंदन जैसे प्रतिबंधित हरे भरे पेड़ों पर चलाया जाता है आरा यह लकड़ी लखनऊ सहित अन्य लकड़ी मंडियों में भी बिक्री के लिए भेजी जाती है शिकायत होने पर भी ठेकेदार की मदद करने के लिए हरसंभव प्रयास करते हैं जिम्मेदार। उच्च अधिकारियों के यहां शिकायत करने के बाद भी वन विभाग के जिम्मेदार कार्यवाही करने से कतराते नजर आते रहते हैं।
स्वर्णिम टाईम्स : Swarnim Times आपका अपना इंटरनेट अख़बार !