उत्तर प्रदेश में बुधवार का दिन मौसम के लिहाज से बेहद चौंकाने वाला रहा। सुबह जहां तेज धूप और उमस ने लोगों को परेशान कर रखा था, वहीं दोपहर बाद अचानक आसमान का मिजाज पूरी तरह बदल गया। राजधानी लखनऊ समेत प्रदेश के कई जिलों में दिन के समय ही ऐसा अंधेरा छा गया मानो शाम हो गई हो। तेज हवाओं, धूलभरी आंधी और हल्की बारिश ने न सिर्फ लोगों को हैरान किया बल्कि भीषण गर्मी से जूझ रहे प्रदेशवासियों को बड़ी राहत भी दी

दिन की शुरुआत सामान्य गर्मी भरे मौसम के साथ हुई थी। सुबह से ही तेज धूप और चुभती गर्मी ने लोगों को घरों में रहने पर मजबूर कर दिया था। सड़कों पर निकलने वाले लोग गर्म हवाओं और उमस से बेहाल नजर आ रहे थे। लेकिन जैसे-जैसे दिन चढ़ा, मौसम ने अचानक करवट ले ली। दोपहर बाद काले घने बादल तेजी से आसमान पर छा गए और देखते ही देखते वातावरण में अंधेरा फैल गया।
तेज हवाओं के साथ उठी धूलभरी आंधी ने कई इलाकों में दृश्यता कम कर दी। सड़क पर चल रहे वाहन चालकों को मजबूरी में अपनी गाड़ियां रोकनी पड़ीं। कई जगहों पर पेड़ों की शाखाएं टूटकर गिर गईं और बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई। इसके कुछ ही देर बाद बूंदाबांदी शुरू हो गई, जिसने गर्मी से झुलस रहे लोगों को बड़ी राहत दी। बारिश के साथ चली ठंडी हवाओं ने मौसम को सुहावना बना दिया।
मौसम विभाग के अनुसार, इस अचानक बदलाव के पीछे पश्चिमी विक्षोभ का असर जिम्मेदार है। इस सिस्टम के कारण उत्तर प्रदेश के पश्चिमी और मध्य हिस्सों में बादल सक्रिय हो गए, जिससे आंधी और बारिश की स्थिति बनी। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बदलाव का असर आने वाले कई दिनों तक देखने को मिल सकता है।
आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने जानकारी दी कि प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी दोनों हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश और बूंदाबांदी के आसार बने हुए हैं। इसके साथ ही तेज हवाएं और वज्रपात की भी संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने कई जिलों के लिए अलर्ट जारी करते हुए लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है।
बताया जा रहा है कि प्रदेश के 58 जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश और बिजली गिरने का खतरा बना हुआ है। वहीं 32 जिलों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है। ऐसे में खुले स्थानों पर रहने वाले लोगों, किसानों और यात्रियों को विशेष सतर्क रहने की जरूरत है।
इस अचानक बदले मौसम का सबसे सकारात्मक पहलू यह रहा कि लोगों को भीषण गर्मी और लू से राहत मिली। पिछले कई दिनों से तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार बना हुआ था, जिससे जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया था। खासकर बुजुर्ग, बच्चे और बीमार लोग इस गर्मी से सबसे ज्यादा परेशान थे। लेकिन बुधवार को आई बारिश और तेज हवाओं ने तापमान में गिरावट दर्ज कराई, जिससे लोगों ने राहत की सांस ली।
अगर बात करें तापमान की, तो मंगलवार को बांदा जिले में पारा 47.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था, जो न सिर्फ प्रदेश बल्कि देश के सबसे गर्म स्थानों में से एक था। ऐसे में बुधवार को अचानक बदले मौसम ने वहां के लोगों को काफी राहत पहुंचाई। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में तापमान में और गिरावट देखने को मिल सकती है।
अमेठी जिले में भी मौसम का यह बदलाव बेहद खास रहा। यहां पिछले करीब 15 दिनों से लगातार 40 से 43 डिग्री सेल्सियस के बीच तापमान बना हुआ था। लोग गर्मी और उमस से परेशान थे। लेकिन बुधवार दोपहर करीब 12 बजे के बाद अचानक तेज हवाएं चलने लगीं और आसमान में काले बादल छा गए।
कुछ ही देर में बूंदाबांदी शुरू हो गई और फिर देखते ही देखते ओले गिरने लगे। करीब 15 मिनट तक चली इस ओलावृष्टि ने पूरे इलाके को सफेद चादर से ढक दिया। सड़कों, खेतों और घरों की छतों पर ओलों की मोटी परत जम गई। इस नजारे ने लोगों को हैरान कर दिया, क्योंकि इस समय आमतौर पर इतनी गर्मी होती है कि बारिश की उम्मीद भी कम ही होती है।
हालांकि, इस बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि का असर कई सामाजिक और पारिवारिक आयोजनों पर पड़ा। जिले में चल रहे करीब 400 से ज्यादा शादी समारोह और अन्य कार्यक्रम प्रभावित हुए। कई जगहों पर टेंट और सजावट को नुकसान पहुंचा, जिससे आयोजकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
इसके अलावा किसानों के लिए भी यह मौसम मिला-जुला असर लेकर आया है। जहां एक तरफ बारिश से कुछ फसलों को फायदा हो सकता है, वहीं ओलावृष्टि से खड़ी फसलों को नुकसान होने की आशंका भी जताई जा रही है। खासकर गेहूं और सब्जियों की खेती करने वाले किसानों के लिए यह चिंता का विषय बन गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में मौसम का यही रुख बना रह सकता है। पश्चिमी विक्षोभ के लगातार सक्रिय रहने से प्रदेश में बीच-बीच में बारिश, आंधी और बादलों का दौर जारी रह सकता है। इससे जहां एक ओर गर्मी से राहत मिलेगी, वहीं दूसरी ओर वज्रपात और तेज हवाओं का खतरा भी बना रहेगा।
ऐसे में लोगों को सलाह दी जा रही है कि खराब मौसम के दौरान घरों में ही रहें और अनावश्यक यात्रा से बचें। खुले मैदानों, पेड़ों के नीचे या बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचना चाहिए। वाहन चलाते समय भी विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है, क्योंकि धूलभरी आंधी और बारिश के दौरान दृश्यता कम हो जाती है।
कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश में बुधवार को आया यह मौसम परिवर्तन जहां एक ओर राहत लेकर आया, वहीं दूसरी ओर कई चुनौतियां भी सामने लेकर आया। गर्मी से परेशान लोगों के लिए यह किसी राहत भरी सांस से कम नहीं था, लेकिन इसके साथ ही सतर्क रहने की भी उतनी ही जरूरत है, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सके।
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