बठिंडा के रामपुरा सिटी क्षेत्र से मानवता को झकझोर देने वाली खबर सामने आई है, जहां एक बंद घर में पिता-पुत्र का शव बरामद हुआ। पुलिस और स्थानीय लोगों के अनुसार यह मामला अत्यंत दुखद और असहाय स्थिति की कहानी पेश करता है।

थाना सिटी रामपुरा पुलिस को सूचना मिली कि घर में कोई संदिग्ध स्थिति है। मौके पर पहुंची पुलिस ने पाया कि घर में 80 वर्षीय रमेश कुमार और उनके 50 वर्षीय पुत्र संजय कुमार मृत पड़े हैं। शवों को सहारा जनसेवा संस्था की मदद से सिविल अस्पताल ले जाया गया।
स्थानीय पुलिस और एसएचओ हरबंस सिंह ने बताया कि रमेश कुमार और उनके पुत्र संजय कुमार लंबे समय से रामपुरा में रह रहे थे, जबकि मूलतः वे गाजियाबाद के निवासी थे। पुलिस के मुताबिक, संजय कुमार की मौत करीब 12 दिन पहले हुई थी। इसके बाद स्वास्थ्य और चलने-फिरने में असमर्थ रमेश कुमार को बिना किसी मदद के अपने बेटे की मौत के बाद घर में अकेले रहना पड़ा। उसकी मौत भूख और प्यास से हुई प्रतीत होती है।
घटना की जानकारी संजय कुमार की बहन को तब लगी जब पिछले 12–13 दिन से उनके पिता और भाई से कोई संपर्क नहीं हो रहा था। बहन और रिश्तेदारों ने घर का दरवाजा खोला और अंदर दोनों मृतक पाए।
एसएचओ हरबंस सिंह ने बताया कि शवों को पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल भेजा गया है। हालांकि प्राथमिक जांच से प्रतीत होता है कि संजय कुमार की मृत्यु पहले हुई थी और इसके बाद पिता रमेश कुमार भूख-प्यास और अकेलेपन के चलते दम तोड़ बैठे। पुलिस इस बात की जांच में भी जुटी है कि संजय कुमार की मृत्यु कैसे हुई और क्या इसमें कोई अन्य कारण या तीसरा पक्ष शामिल है।
पुलिस ने यह भी बताया कि मृतकों के परिवार ने किसी भी तरह की कानूनी कार्रवाई नहीं करवाने की इच्छा जताई है। अधिकारियों का कहना है कि यह घटना अकेलेपन और देखभाल की कमी के खतरनाक परिणामों को उजागर करती है।
इस दुखद घटना ने स्थानीय लोगों को भी सकते में डाल दिया है। पड़ोसी और रिश्तेदार कह रहे हैं कि दोनों पिता-पुत्र लंबे समय से समाज से कटे हुए थे और किसी से कोई नियमित संपर्क नहीं था। यह मामला एक बार फिर इस बात पर प्रकाश डालता है कि बुजुर्गों और अकेले परिवार के सदस्यों के लिए समय पर मदद और समाजिक निगरानी कितनी महत्वपूर्ण है।
पुलिस ने आसपास के क्षेत्र में पड़ोसियों और सामाजिक संगठनों से अपील की है कि ऐसे अकेले और असहाय लोगों पर नजर रखें और समय पर मदद मुहैया कराएं, ताकि इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।
यह दुखद मामला पिता-पुत्र के बीच की घातक अकेलेपन और समाजिक असावधानी की कहानी को उजागर करता है, और यह भी दर्शाता है कि संकट में तुरंत मदद नहीं मिलने पर परिणाम कितने भयावह हो सकते हैं।
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