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साइबर ठगों ने ऑनलाइन निवेश और चालान के झांसे में बनाया लोगों को शिकार, खाते से उड़ाए लाखों रुपये

साइबर अपराधियों का शिकार बनना अब आम बात होती जा रही है। पिछले कुछ समय में लोगों को ऑनलाइन धोखाधड़ी और फ्रॉड का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में साइबर क्राइम थाना (ईस्ट) में तीन अलग-अलग धोखाधड़ी के मामले सामने आए हैं, जिनमें ठगों ने ऑनलाइन निवेश, ट्रैफिक चालान और क्रेडिट कार्ड अपडेट जैसी साधारण गतिविधियों का बहाना बनाकर लोगों के बैंक खातों से लाखों रुपये उड़ा लिए। पुलिस ने इन तीनों मामलों में बीएनएस की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

मोटा मुनाफा पाने के चक्कर में लाखों गंवाए

सेक्टर-57 के सुशांत लोक-2 में रहने वाली निधि त्यागी का मामला इन ठगों की चालाकी को उजागर करता है। अक्टूबर 2025 में निधि को अज्ञात लोगों ने ऑनलाइन निवेश का झांसा दिया। उन्होंने निधि को भारी मुनाफे का लालच दिया और धीरे-धीरे विश्वास जीतकर उनसे तीन लाख 90 हजार रुपये अलग-अलग किस्तों में ट्रांसफर करवा लिए। जब निधि ने पैसा वापस मांगने की कोशिश की, तो ठगों ने संपर्क ही तोड़ दिया। इस धोखाधड़ी की खबर सुनकर पुलिस ने मामला दर्ज किया और जांच शुरू कर दी।

निधि का यह मामला यह दर्शाता है कि किस प्रकार साइबर अपराधी लोगों की लालच और आर्थिक इच्छाओं का फायदा उठाते हैं। ये अपराधी अक्सर सोशल मीडिया, ईमेल या वॉट्सऐप जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से लोगों से संपर्क करते हैं और उन्हें आसानी से भरोसा दिला लेते हैं।

ट्रैफिक चालान के फर्जी लिंक ने उड़ाए 4.32 लाख रुपये

सीक्टर-57 के ही एक अन्य निवासी अजय कुमार त्रिपाठी भी इसी तरह का शिकार बने। 15 दिसंबर 2025 को अजय को उनके मोबाइल पर ट्रैफिक नियम उल्लंघन के संबंध में एक संदेश आया, जिसमें एक लिंक दिया गया था। संदेश में लिखा था कि उनके चालान का भुगतान इस लिंक के जरिए किया जा सकता है। अजय ने इस लिंक पर क्लिक कर प्रक्रिया पूरी की, लेकिन जल्द ही यह पता चला कि उनके बैंक खाते से 4 लाख 32 हजार 254 रुपये गायब हो चुके थे।

पुलिस ने इस मामले में भी अज्ञात ठगों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी। ट्रैफिक चालान के नाम पर धोखाधड़ी करना एक नया तरीका है, जिसमें अपराधी लोगों को डर और डांट-डपट का उपयोग करके अपने जाल में फंसाते हैं। इस तरह के मामलों में सामान्य लोग तुरंत भरोसा कर बैठते हैं और अपना महत्वपूर्ण बैंक डेटा साझा कर देते हैं।

क्रेडिट कार्ड अपडेट के नाम पर युवती के खाते से लाखों की चोरी

तीसरा मामला सेक्टर-28 की धारणा बिष्ट के साथ हुआ। दिसंबर 2025 में धारणा को उनके क्रेडिट कार्ड से संबंधित एक लिंक भेजा गया। आरोपियों ने खुद को बैंक प्रतिनिधि बताकर उन्हें विश्वास में लिया। धारणा ने जैसे ही इस लिंक पर आवश्यक जानकारी साझा की, उनके खाते से 2 लाख 95 हजार 958 रुपये निकाल लिए गए।

धारणा ने अपनी शिकायत में बताया कि ठगों ने बैंक अधिकारी होने का भरोसा दिला कर उन्हें झांसा दिया। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि साइबर अपराधी कितने चालाक और तैयार रहते हैं। वे लोगों को विश्वास में लेकर, डर या लालच के माध्यम से उनके महत्वपूर्ण वित्तीय डेटा का इस्तेमाल कर लाखों की ठगी कर लेते हैं।

पुलिस और विशेषज्ञों की चेतावनी

साइबर क्राइम थाना ने इन घटनाओं की गंभीरता को देखते हुए लोगों से सचेत रहने की अपील की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि निवेश के नाम पर या ट्रैफिक चालान के लिंक, क्रेडिट कार्ड अपडेट जैसी प्रक्रियाओं में कोई भी लिंक क्लिक करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करना बेहद जरूरी है।

विशेषज्ञ भी लोगों को यह चेतावनी देते हैं कि ऑनलाइन निवेश करते समय हमेशा विश्वसनीय प्लेटफॉर्म का ही चुनाव करें। किसी अज्ञात व्यक्ति या लिंक के जरिए पैसा भेजना या अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा करना भारी नुकसान का कारण बन सकता है।

साइबर ठगों की नई तकनीकें

साइबर अपराधी अब न केवल निवेश, बल्कि बैंकिंग, क्रेडिट कार्ड, मोबाइल वॉलेट और ऑनलाइन शॉपिंग जैसे क्षेत्र में भी अपनी चालाकी का इस्तेमाल कर रहे हैं। ये अपराधी लगातार नए-नए तरीके खोजते रहते हैं, जिससे सामान्य व्यक्ति उनके जाल में फंस जाए।

नकली लिंक और फिशिंग: यह सबसे आम तरीका है। अपराधी नकली वेबसाइट बनाकर लोगों से जानकारी निकालते हैं।

भरोसा जीतना: सोशल मीडिया, कॉल या ईमेल के जरिए लोगों का विश्वास जीतना।

डर और लालच का इस्तेमाल: ट्रैफिक चालान, बैंक नोटिस, निवेश में मोटा मुनाफा जैसे बहाने।

जागरूकता ही सुरक्षा की कुंजी

विशेषज्ञ कहते हैं कि साइबर ठगी से बचने का सबसे अच्छा तरीका है सतर्क रहना। किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी वैधता की जाँच करें। अपने बैंक और क्रेडिट कार्ड के विवरण किसी भी अज्ञात व्यक्ति या साइट के साथ साझा न करें।

साथ ही, यदि कोई अज्ञात व्यक्ति निवेश, बैंक या चालान के संबंध में कॉल, मैसेज या ईमेल करता है, तो तुरंत इसकी पुष्टि संबंधित संस्था से करें। किसी भी आपात स्थिति में पुलिस को तुरंत सूचित करना चाहिए।

निष्कर्ष

हाल ही में सामने आए तीन मामले यह दिखाते हैं कि साइबर ठग अब बहुत ही परिष्कृत और चालाक हो गए हैं। निवेश, ट्रैफिक चालान और क्रेडिट कार्ड अपडेट जैसे बहाने अब आम हो गए हैं। इसलिए लोगों को सतर्क रहकर और सही जानकारी के साथ ऑनलाइन काम करना चाहिए। केवल सतर्कता और जागरूकता ही साइबर अपराधियों के जाल से बचा सकती है।

इन घटनाओं ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि साइबर अपराध केवल आर्थिक नुकसान नहीं पहुँचाता, बल्कि मानसिक और भावनात्मक तनाव भी पैदा करता है। इसलिए समय रहते सतर्क होकर और सही कदम उठाकर इन अपराधों से खुद को सुरक्षित रखना ही सबसे बड़ा उपाय है।

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