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नौगावा में पंचवटी की स्थापना, ग्राम प्रधान ने लगाए 2200 पौधे

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इटावा (डॉ एस बी एस चौहान) : जनपद की तहसील चकरनगर के राजस्व गांव नौगावा में योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप पंचवटी स्थापित करने के लिए ग्राम प्रधान ने करीब 2200 पौधे मानक के अनुसार रोपित किए।

ग्राम प्रधान प्रतिनिधि नौगांवा धर्मेंद्र प्रताप सिंह चौहान की अगुवाई में बाबा योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप पंचवटी की स्थापना की गई है इस पंचवटी में मानक के अनुरूप पूरब में पीपल, पश्चिम में बरगद, उत्तर में आंवला, दक्षिण में नीम और बीच में बेल यानी जिसे हम बेलुआ कहते हैं को विधिवत रोपित किया गया है।

पंचवटी की पड़ताल करने के बाद हमारी टीम जब उप जिलाधिकारी चकरनगर के पास तहसील कंपाउंड पहुंची तो एक बार नहीं तीन बार तहसील कंपाउंड जाना हुआ लेकिन उप जिलाधिकारी से भेंट नहीं हो सकी और उनकी बाइट नहीं ले सका, आज मैं जब तीसरी बार पुनः पहुंचा तो वहां पर नवागत उप जिलाधिकारी मौके पर नहीं मिले तो उनके चेंबर की ही फोटो लेना उचित समझा, उसके बाद तहसीलदार मजिस्ट्रेट के ऑफिस की तरफ देखा तो वहां पर भी कुर्सी खाली थी हो सकता है कहीं सरकारी काम में व्यस्त हों, इसलिए उनकी भी बाइट नहीं हो सकी इसके बाद मैंने प्रशासनिक अधिकारी के तौर पर खंड विकास अधिकारी चकरनगर की तरफ मूड बनाया और जब वहां पहुंचा तो पाया कि खंड विकास अधिकारी दफ्तर में सरकारी काम में व्यस्त थे और मुझे उपस्थित मिले सरकारी कार्य निपटाने के बाद उन्होंने बड़ी ही प्रसन्नता के साथ वाइट देने के लिए बोले कि क्यों ना पंचवटी में चलकर ही बाइट दी जाए और प्रधान जी की भी शिकायत दूर हो जाएगी। उन्होंने अपना वाहन तुरंत ड्राइवर बुलाकर पंचवटी पहुंचे जहां पर उन्होंने पहले तो पंचवटी का अवलोकन किया। अवलोकन करने के बाद अपनी वाइट देते हुए बताया कि प्रधान जी की इस व्यवस्था से मैं बहुत खुश हूं और ऐसी व्यवस्था हमारे किसी प्रधान ने अभी तक नहीं की है। अब मैं और दूसरे लोगों को सीख देने के लिए यहां पर लेकर आऊंगा और उन्हें भी व्यवस्था दिखाऊंगा।

डॉ एस बी एस चौहान

यहां पर एक हकीकत अपने दर्शकों/पाठकों के सामने प्रस्तुत करना चाहूंगा कि पहले रहे उप जिलाधिकारी आईएएस इंद्रजीत सिंह जिनके ना कोई खाने का समय था ना कोई नाश्ता का समय था और ना ही परिवार में मिलने का कोई समय था जिस वक्त देखा जाए उस वक्त ऑन ड्यूटी ही मिला करते थे कभी भी इंद्रजीत सिंह का फोन लगाया जाए फोन पर घंटी गई कि टेलीफोन को अटेंड करना उनकी अहम भूमिका हुआ करती थी और यदि फोन कहीं किसी वजह से नहीं उठ पाया तो कॉल बैक हुआ करती थी।

नवागत उप जिलाधिकारी के बारे में बताया जाता है कि जो समस्या है उसका निस्तारण भी तत्क्षण करने का प्रयास करते हैं। एक दिन लेखपालों का विवाद हुआ उसे तुरंत सुलझाया जिससे दोनों पक्ष खुश हो गए। स्थानीय मीडिया के कुछ लोगों का आरोप है कि पहले तो टेलीफोन लगता ही नहीं है और यदि लग जाता है तो फोन रिसीव नहीं होता और यदि रिसीव न कर पाने के बाद एक प्रोसीजर सरकार का होता है कि सरकारी कॉल को बैक कॉल किया जाए कभी बैक कॉल भी नहीं आती है।

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