हरियाणा के Panipat में बाल विवाह का एक मामला सामने आया, जहां प्रशासन की सतर्कता के चलते नाबालिग की शादी को समय रहते रोक दिया गया। मामला उस समय सामने आया जब पुलिस और बाल विवाह निषेध अधिकारी को सूचना मिली कि सेक्टर-29 थाना क्षेत्र की एक कॉलोनी में नाबालिग लड़के की शादी की तैयारी चल रही है और बारात ले जाने की तैयारी हो चुकी है।

सूचना मिलने के बाद पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। जब अधिकारियों ने शादी रोकने की बात कही तो दूल्हे के परिजनों ने यह कहते हुए दबाव बनाने की कोशिश की कि वे एक डीएसपी को जानते हैं और शादी किसी भी हाल में नहीं रुकेगी। हालांकि अधिकारियों ने कानून का हवाला देते हुए सख्ती दिखाई और विवाह को रुकवा दिया।
सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची टीम
यह मामला Sector 29 की एक कॉलोनी का है। यहां मंगलवार को दो भाइयों की शादी की तैयारियां चल रही थीं। घर में मेहमानों का आना-जाना लगा था और बारात निकलने की तैयारी भी लगभग पूरी हो चुकी थी।
इसी बीच प्रशासन को सूचना मिली कि जिन लड़कों की शादी होने जा रही है, उनमें से एक नाबालिग है। सूचना मिलते ही थाना पुलिस मौके पर पहुंची और परिवार से दस्तावेज दिखाने को कहा।
दस्तावेजों की जांच में खुला सच
पुलिस ने जब लड़कों के दस्तावेजों की जांच की तो पता चला कि उनकी उम्र विवाह के लिए तय कानूनी सीमा से कम है। कानून के अनुसार लड़के की शादी के लिए न्यूनतम उम्र 21 वर्ष और लड़की की उम्र 18 वर्ष होना अनिवार्य है।
जांच में सामने आया कि बड़े लड़के की जन्मतिथि 5 जनवरी 2006 है, जबकि छोटे लड़के की जन्मतिथि 17 अगस्त 2007 दर्ज है। यानी दोनों ही कानूनी उम्र से कम थे।
परिजनों ने बनाया दबाव
जब पुलिस ने शादी रोकने की बात कही तो परिवार के कुछ सदस्यों ने विरोध शुरू कर दिया। उन्होंने दावा किया कि वे एक डीएसपी को जानते हैं और शादी किसी भी हालत में नहीं रुकेगी।
इतना ही नहीं, लड़की पक्ष की ओर से भी एक अधिकारी का नाम लेकर कहा गया कि शादी को रोका नहीं जा सकता। हालांकि पुलिस ने इन दावों को नजरअंदाज करते हुए कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी।
महिला अधिकारी ने संभाली स्थिति
इस मामले की जानकारी मिलने के बाद महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी Rajni Gupta भी मौके पर पहुंचीं।
उन्होंने स्थिति का जायजा लिया और दोनों पक्षों से बातचीत की। साथ ही उन्हें बाल विवाह से जुड़े कानून और उसके परिणामों के बारे में भी बताया।
अधिकारी ने स्पष्ट किया कि नाबालिग की शादी कराना कानूनन अपराध है और ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
दोनों पक्षों को कोर्ट में बुलाया गया
घटना के बाद प्रशासन ने दोनों पक्षों को अगले दिन कार्यालय में बुलाया। बुधवार को दोनों परिवारों के सदस्य अधिकारी के सामने उपस्थित हुए।
इस दौरान देखा गया कि दोनों लड़कों के हाथों में मेहंदी लगी हुई थी और उनके हाथों पर दुल्हनों के नाम भी लिखे हुए थे। इससे स्पष्ट था कि शादी की तैयारी पूरी तरह से हो चुकी थी।
दस्तावेजों की दोबारा जांच करने के बाद प्रशासन ने मामला अदालत के सामने पेश करने का फैसला किया।
कोर्ट ने लगाई शादी पर रोक
इसके बाद दोनों पक्षों को Himani Gill की अदालत में पेश किया गया। अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए नाबालिग की शादी पर रोक लगा दी।
कोर्ट के सामने दोनों पक्षों ने बयान दर्ज कराया कि वे तब तक विवाह नहीं करेंगे जब तक लड़का 21 वर्ष और लड़की 18 वर्ष की आयु पूरी नहीं कर लेते।
परीक्षा देकर पहुंची नाबालिग लड़की
इस मामले का एक और दिलचस्प पहलू सामने आया। बताया गया कि जिस लड़की की शादी तय की गई थी, वह अभी 12वीं कक्षा की छात्रा है।
बुधवार को वह अपना परीक्षा पेपर देकर सीधे कार्यालय पहुंची, जहां उसे प्रशासन के सामने पेश किया गया।
यह तथ्य सामने आने के बाद अधिकारियों ने परिवार को समझाया कि इतनी कम उम्र में शादी करना लड़की के भविष्य और शिक्षा के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
परिवार ने बताई वजह
लड़की के परिवार ने अधिकारियों को बताया कि उन्होंने अपनी बेटी की शादी जल्दी करने का फैसला इसलिए लिया क्योंकि उनके परिवार से पहले दो लड़कियां घर से चली गई थीं।
परिजनों का कहना था कि इसी डर के कारण उन्होंने अपनी बेटी की शादी जल्द करने का निर्णय लिया था, ताकि भविष्य में कोई समस्या न हो।
हालांकि अधिकारियों ने उन्हें समझाया कि ऐसी आशंकाओं के कारण नाबालिग की शादी करना कानून के खिलाफ है।
प्रशासन की सख्ती से रुका बाल विवाह
अधिकारियों का कहना है कि अगर समय पर सूचना नहीं मिलती तो यह शादी हो सकती थी। लेकिन प्रशासन की सतर्कता और सख्ती के कारण बाल विवाह को रोक दिया गया।
महिला संरक्षण अधिकारी ने कहा कि समाज में अब भी कई जगहों पर बाल विवाह की घटनाएं सामने आती हैं, लेकिन जागरूकता और कानून के सख्त पालन से इन्हें रोका जा सकता है।
समाज को संदेश
यह घटना एक बार फिर यह याद दिलाती है कि बाल विवाह आज भी कई इलाकों में एक गंभीर सामाजिक समस्या बना हुआ है। हालांकि कानून और जागरूकता के चलते अब ऐसे मामलों में प्रशासन तेजी से कार्रवाई कर रहा है।
पानीपत की इस घटना में भी प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि चाहे कोई कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, कानून से ऊपर कोई नहीं है।
फिलहाल दोनों परिवारों ने अदालत के सामने यह भरोसा दिलाया है कि वे कानूनी उम्र पूरी होने से पहले अपने बच्चों की शादी नहीं करेंगे।
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