सोनीपत में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर बुधवार से अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। विभागीय कार्यालय परिसर में बड़ी संख्या में कर्मचारी एकत्रित हुए और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को जल्द से जल्द पूरा करने की मांग की। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से वेतन, पदोन्नति और सेवा संबंधी मुद्दे लंबित पड़े हैं, लेकिन बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद समाधान नहीं हो पाया है। अब मजबूर होकर उन्हें धरने का रास्ता अपनाना पड़ा है।

धरने की अध्यक्षता सोनीपत शाखा के प्रधान सुनील ने की, जबकि संचालन की जिम्मेदारी गोहाना शाखा के प्रधान मनोज ने संभाली। कार्यक्रम में प्रांतीय स्तर के पदाधिकारी भी पहुंचे। प्रांतीय चेयरमैन रणबीर दलाल और वरिष्ठ नेता राकेश त्यागी ने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि यदि समय रहते सरकार और विभाग ने उनकी मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाया, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने कर्मचारियों से एकजुट रहने की अपील की और भरोसा दिलाया कि संगठन उनके हितों की रक्षा के लिए पूरी मजबूती से खड़ा है।
शाखा सचिव नरेश कुमार ने धरने के दौरान अपनी मुख्य मांगों को विस्तार से रखा। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को समय पर वेतन न मिलना एक गंभीर समस्या बन चुकी है। कई कर्मचारियों को हर महीने वेतन में देरी का सामना करना पड़ता है, जिससे उनके परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वेतन समय पर जारी करना विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
इसके अलावा छह वर्षों से लंबित एसीपी (एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन) को तुरंत लागू करने की मांग भी जोरदार तरीके से उठाई गई। कर्मचारियों का कहना है कि एसीपी न मिलने से उनकी पदोन्नति और वेतन वृद्धि प्रभावित हो रही है। लंबे समय से सेवा दे रहे कर्मचारी अपने हक की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन फाइलें आगे नहीं बढ़ रहीं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एसीपी संबंधी निर्णय जल्द नहीं लिया गया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
नए नियुक्त कर्मचारियों की सालाना वेतन वृद्धि का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। कर्मचारियों का कहना है कि विभाग में कार्यरत नए कर्मियों को नियमानुसार वार्षिक वृद्धि नहीं मिल रही, जिससे उनमें असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने मांग की कि सभी पात्र कर्मचारियों को नियमानुसार वेतन वृद्धि का लाभ दिया जाए, ताकि वे सम्मानपूर्वक अपना जीवन यापन कर सकें।
एक अन्य महत्वपूर्ण मांग कौशल रोजगार निगम पोर्टल से जुड़ी है। कर्मचारियों ने कहा कि जो कर्मचारी पात्र हैं, उनके नाम पोर्टल पर दर्ज किए जाएं, ताकि उन्हें नियमितीकरण और अन्य सुविधाओं का लाभ मिल सके। उनका आरोप है कि कई योग्य कर्मचारियों के नाम अभी तक पोर्टल पर अपलोड नहीं किए गए, जिससे वे सरकारी योजनाओं और लाभों से वंचित हैं।
धरने के दौरान सेवानिवृत्त कर्मचारियों का मुद्दा भी उठाया गया। कर्मचारियों ने मांग की कि जो लोग सेवानिवृत्ति के बाद भी विभाग में कार्यरत हैं, उन्हें तुरंत हटाया जाए। उनका कहना है कि इससे न केवल नियमों का उल्लंघन हो रहा है, बल्कि नई पीढ़ी के कर्मचारियों के अवसर भी सीमित हो रहे हैं। संगठन का मानना है कि विभाग में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए इस विषय पर तत्काल कार्रवाई आवश्यक है।
धरने में विनोद योगी, सुरेश वशिष्ठ, सुशील, पवन, जयकिशन, दिलबाग, अशोक, नवीन, इंद्रपाल और प्रवीन सहित कई कर्मचारी मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक धरना जारी रहेगा। कर्मचारियों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की बात कही, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि यदि प्रशासन ने उनकी अनदेखी की, तो वे आगे बड़े स्तर पर आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेंगे।
धरना स्थल पर कर्मचारियों ने बैनर और तख्तियां लेकर अपनी मांगों को प्रदर्शित किया। कई कर्मचारियों ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि वेतन में देरी और पदोन्नति न मिलने से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है। कुछ कर्मचारियों ने कहा कि महंगाई के इस दौर में नियमित और समय पर आय न मिलना गंभीर चिंता का विषय है।
फिलहाल विभाग की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है। यदि वार्ता के लिए पहल की जाती है तो कर्मचारियों और विभागीय अधिकारियों के बीच जल्द बैठक हो सकती है। हालांकि कर्मचारी स्पष्ट कर चुके हैं कि वे केवल लिखित आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहते हैं।
सोनीपत में शुरू हुआ यह अनिश्चितकालीन धरना आने वाले दिनों में किस दिशा में जाएगा, यह प्रशासन की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा। फिलहाल कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर पूरी तरह से एकजुट नजर आ रहे हैं और उन्होंने संकेत दिए हैं कि यदि जरूरत पड़ी तो आंदोलन को जिला स्तर से प्रदेश स्तर तक ले जाया जा सकता है।
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