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आरक्षण मौलिक अधिकार, संविधान विरोधी प्राविधान बर्दाश्त नहीं – लल्लू

राज प्रताप सिंह, लखनऊ ब्यूरो। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने यूपी लोक सेवा आयोग द्वारा पीसीएस समेत अन्य परीक्षाओं में आरक्षण के प्राविधान में किए गए बदलावों पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा है कि इस बदलाव से प्रदेश के लाखों की संख्या में अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और जनजाति के अभ्यर्थी प्रभावित होंगे।

उन्होंने आरोप लगाया कि बाबा साहब द्वारा निर्मित संविधान को खत्म करने की साजिश रची जा रही है, इसके खिलाफ सड़क से लेकर सदन तक लड़ा जाएगा।
श्री लल्लू ने कहा है कि आयोग द्वारा आरक्षण में बदलाव करना संविधान में वर्णित न्याय की संकल्पना ‘सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक न्याय का खुला उल्लंघन है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 16 (4) राज्य के सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग को उचित अवसर प्रदान करने के लिए राज्य को निर्देशित करता है। इसी के तहत अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को आरक्षण मिला हुआ है।


उन्होंने कहा कि आयोग का निर्णय कि सभी परीक्षाओं के अंतिम चयन परिणाम में अनारक्षित वर्ग में आरक्षित वर्ग की ओवरलैपिंग नहीं हो सकेगी, यह पूरी तरह से संविधान के खिलाफ है। यह आरक्षित वर्ग को उनके अधिकारों से वंचित करने का षडयंत्र है।

सरकार या आयोग यह तर्क देकर नहीं बच सकते कि हाईकोर्ट के किसी आदेश के तहत ऐसा किया जा रहा है। यदि कोई न्यायिक अड़चन है तो यह सरकार की जिम्मेदारी है कि उसे दूर कर संविधान के तहत आरक्षण की व्यवस्था को लागू कराए, जिससे लाखों पिछड़ों, दलित वर्ग के छात्रों के अधिकारों का हनन न हो पाए।

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